लड़कियों के लिए बने मदरसे में पुरुष शिक्षक क्यों? गोड्डा में मासूम के मर्डर की FIR और सुसाइड नोट से उठे सवाल
गोड्डा जिले के महगामा में एक मदरसे में 13 वर्षीय नाबालिग लड़की की मौत के मामले में हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई है। मृतका के पिता ने शिक्षकों और संचालनकर्ताओं सहित पांच लोगों पर हत्या की साजिश का आरोप लगाया है। पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है जिसकी जांच की जा रही है।

जागरण संवाददाता, गोड्डा। जिले के महगामा प्रखंड के कस्बा स्थित मदरसा में 13 वर्षीय नााबालिग किशोरी की मौत के मामले में हत्या की साजिश करने की प्राथमिकी दर्ज की गयी है।
मृतका के पिता मो. तैय्यब के बयान पर महगामा थाना में केस दर्ज किया गया है। दर्ज प्राथमिकी में पिता ने मदरसा में पढ़ा रहे शिक्षकों व संचालनकर्ता सहित पांच लोगों को नामजद किया है।
दर्ज प्राथमिकी में बताया गया है कि साजिश के तहत उनकी बच्ची की हत्या की गयी है तथा मामले को आत्महत्या बनाने का प्रयास किया गया है। पुलिस ने पिता के बयान पर हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
महागामा थाना प्रभारी शिव दयाल सिंह ने बताया कि केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की छानबीन की जा रही है। बताया कि बच्ची के शव के पोस्टमार्टम के लिए दुमका भेज दिया गया है। पुलिस जांच पड़ताल में जुट गई हैं।
थाना प्रभारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद से ही मौत के कारणों का पता चल पाएगा। फिलहाल पुलिस सभी बिंदुओं पर अनुसंधान शुरू की है। वहीं, बताया कि बच्ची के पास से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसकी भी जांच की जा रही है।
मालूम हो कि गुरूवार को बिहार के भागलपुर जिले के सनोखर थाना क्षेत्र की बच्ची का शव महागामा के कसबा स्थित मदरसा में बरामद किया गया था। उक्त मदरसा में करीब 500 बालिका छात्रावास में रहती है। यह मदरसा निजी संस्थान है। सरकार से इसकी कोई मान्यता नहीं मिली है। मृतक के पिता मो. तैय्यब ने अपने बेटी की मौत पर मदरसा प्रबंधन पर हत्या करने का आरोप लगाया है।
जिले में 100 से अधिक निजी मदरसा संचालित
जिले भर में अनाधिकृत रूप से मदरसा का संचालन हो रहा है। ऐसे 100 से अधिक निजी मदरसा हैं जो जिला शिक्षा विभाग में रजिस्टर्ड नहीं हैं। वहीं, शिक्षा विभाग से पंजीकृत 67 मदरसा है जो सरकारी है। सबसे ज्यादा सरकारी मदरसा जिले भर में महगामा प्रखंड में हैं।
महगामा में ही 30 सरकारी मदरसा हैं। इसके बाद बसंतराय तथा अन्य प्रखंडों में हैं। इसके अलावा कई गैरसरकारी मदरसा हैं जिनका संचालन गैर कानूनी तरीके से हो रहा है। इनके संचालन पर कोई रोक टोक नहीं है। शिक्षा विभाग के पास इसका कोई आंकड़ा नहीं होता है।
इसमें दो दर्जन ऐसे मदरसा है जो आवासीय हैं। मतलब वहां छात्रावास में रहकर बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में न तो खान-पान और न ही रहने के मापदंड का ही वहां अनुपालन होता है। कई आवासीय मदरसा तो ऐसे हैं जहां बुनियादी सुविधा तक नही हैं। पीने के पानी से लेकर अन्य सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गई हैं।
बच्चियों के लिए आवासीय मदरसा का संचालन पुरुष के जिम्मे
महागामा के कसबा स्थित मदरसा बच्चियों के लिए है। यहां 1100 से अधिक छात्राएं अध्ययनरत है। इसमें से 500 छात्राओं को छात्रावास में रखा जाता है। मदरसा प्रबंधन प्रत्येक अभिभावक से इसके लिए सालाना 20 हजार रुपये का शुल्क लेता है।
सबसे ताज्जुब की बात यह है कि बच्चियों के आवासीय मदरसा का संचालन पुरुष कर रहे हैं। सरकार के स्तर से इसपर कोई नियंत्रण नहीं है। इन मदरसों के संचालन को लेकर जिला परिषद की पूर्व सदस्य बेगम निशात जिया ने सवाल उठाया है।
बताया है छात्राओं के मदरसे का संचालन पुरुषों के जिम्मे नहीं होना चाहिए। कहा कि कई मदरसा में तो बाउंड्री तक नहीं है। ऐसे में किसी के आने जाने तक की भनक नहीं लगती है। न ही गार्ड आदि का इंतजाम है।
इस पूरे मामले को पूर्व जिप सदस्य ने डीसी से कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए। ताकि, भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृति नहीं हो सके।
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