गोड्डा : जिला मुख्यालय से तकरीबन आठ किमी दूर गोड्डा-पाकुड़मुख्य मार्ग में जमनी के पास तीन नदियों के संगम स्थल पर अवस्थित सिंहवाहिनी धाम आस्था का केंद्र बिन्दु है। यहां सालों भर साधकों व श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। यह ऋषि यामिनी की तपोस्थली मानी जाती है। प्राचीनकाल में यहां राजा पद्मासेन का राज था। मां सिंहवाहिनी राजपरिवार की कुल देवी के रूप में पूजी जाती थी। यह धाम जाताजोरी, कझिया व हरना नदी के संगम पर अवस्थित है। बताया जाता है कि एक समय यहां भयंकर बाढ़ आई थी, इससे इस क्षेत्र में भारी तबाही मची थी। इसके बाद राजा ने अपनी राजधानी इस स्थान से बदलकर महेशपुर ले गये। इस दौरान मंदिर में स्थापित सोने की प्रतिमा को भी साथ ले गये। इस स्थल पड़े अवशेषों को स्थानीय साधकों ने सहेजकर उसकी पूजा अर्चना शुरू की। इसके बाद धीर- धीरे इस धाम पर आकर्षक मंदिर का निर्माण कराया गया। यहां प्रत्येक शारदीय व बासंतिक नवरात्र में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। यहां तांत्रिक पद्धति से देवी की पूजा की जाती है। स्थानीय पुजारी विष्णुकांत झा, रविन्द्र झा आदि का कहना है कि मां सिंहवाहिनी धाम इस क्षेत्र के श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र बना हुआ है। इस बहुत ही रमणीक स्थल है। प्रकृति की घनी वादियों के बीच सहज ही साधकों को शांति व सुकून महसूस होता है।

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