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    झारखंड में कमाल का स्कूल, सप्ताह में दो दिन ही बुलाए जाते विद्यार्थी

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 08:43 AM (IST)

    गिरिडीह प्लस टू उच्च विद्यालय में 1200 की क्षमता के बावजूद 3500 से अधिक छात्र नामांकित हैं। कक्षाओं और शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को हर दिन स्कूल आने से मना किया जाता है और कई छात्र सप्ताह में केवल दो दिन ही पढ़ पाते हैं। कुछ छात्रों को तो ज़मीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। अधिकारियों को सूचित किए जाने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला है।

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    बच्चों के साथ अभिभावकों को भी दिया गया संदेश, रोज बच्चे को न भेजें।

    ज्ञान ज्योति, गिरिडीह। सरकारी विद्यालयों में बच्चों की शतप्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित कराने पर विभाग का पूरा जोर है। इसके लिए कई कार्यक्रम चलाए जाते हैं। बावजूद झारखंड के गिरिडीह में ऐसा भी सरकारी विद्यालय है, जहां विद्यार्थियों को प्रतिदिन स्कूल आने से मना किया जाता है। ऐसा प्राचार्य और शिक्षक ही करते हैं। विभागीय पदाधिकारी भी इससे अवगत हैं।

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    हम बात कर रहे हैं गिरिडीह प्लस टू उच्च विद्यालय की। यहां तीन हजार से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन है। बच्चों में पढ़ाई की इतनी ललक है कि हर दिन आना चाहते हैं, पर जगह की कमी होने से मन मसोस कर रह जाते हैं। यहां बच्चों को बैठाने की क्षमता केवल 1200 विद्यार्थियों की है।

    अब आप ही सोचिए कि स्कूल में क्षमता से तीन गुना से अधिक बच्चे आएंगे तो कहां बैठेंगे। सो शिक्षकों ने इसका समाधान यही निकाला कि विद्यार्थियों को एक साथ न बुलाया जाए। इतनों को ही बुलाएं कि वे ठीक से पढ़ सकें, पढ़ाए गए विषयों को समझ सकें।

    12 सौ के बैठने की क्षमता, नामांकित तीन हजार

    यहां छात्राएं 1780 और छात्र 1815 यानी कुल 3595 बच्चे हैं। यहां नौवीं व दसवीं कक्षा में लगभग 1500 विद्यार्थी नामांकित हैं। इस बार 11 वीं कक्षा में कला संकाय में 1300, वाणिज्य में 160 और विज्ञान में 180 छात्र-छात्राओं ने नामांकन लिया। कला में तो उम्मीद से तीन गुना अधिक नामांकन हुए। 12 वीं में कला संकाय में 273, वाणिज्य में 92 व विज्ञान वर्ग में 90 छात्र-छात्राएं हैं।

    सप्ताह में दो दिन ही पढ़ पाते

    इंटर कला के विद्यार्थियों को कभी भी एक साथ स्कूल नहीं बुलाया जाता। छात्राओं के लिए सप्ताह में चार दिन और छात्रों के लिए दो दिन निर्धारित हैं। छात्राओं की संख्या अधिक है, इसलिए उन्हें भी आधी-आधी संख्या में दो-दो दिन ही बुलाया जाता है।

    इस तरह अमूमन बच्चे सप्ताह में दो दिन ही स्कूल आकर पढ़ाई कर पाते हैं। इसके लिए स्कूल प्रबंधन की ओर से बाकायदा बच्चों व उनके अभिभावकों को ताकीद की गई है। वहीं विद्यालय में शिक्षकों का अभाव है। केवल 30 शिक्षक यहां हैं। आवश्यकता इससे अधिक की है। शिक्षकों की कमी से कक्षाओं के संचालन में परेशानी होती है।

    इस स्कूल से निकले आइएएस, आइएफएस, राजनीतिज्ञ

    इस विद्यालय की स्थापना वर्ष 1887 में हुई। यह गिरिडीह का सबसे पुराना माध्यमिक विद्यालय है। जब हजारीबाग प्रमंडल में केवल चार माध्यमिक विद्यालय थे, तब यह स्कूल भी उनमें से एक था।

    यहां से व्यवसायी, अधिकारी से लेकर राजनीतिज्ञ तक निकले हैं। आइएएस केके खंडेलवाल, आइएफएस राहुल कुमार, पूर्व विधायक निर्भय कुमार शाहाबादी ने इसी विद्यालय से शिक्षा ग्रहण की है। कई विद्यार्थी वकील, डाक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, शिक्षक बने हैं।

    हमारी परेशानी समझिए ना

    कक्षा 11 कला वर्ग की लक्ष्मी कुमारी व इसी कक्षा की साबिया परवीन कहती हैं कि कई बार जमीन पर बैठकर पढ़ना होता है। हमारी परेशानी समझिए, इस समस्या का समाधान कराएं अंकल।

    विद्यालय में बच्चों के अनुपात में कक्षाओं की कमी है। समस्या के समाधान की दिशा में पहल कर रहे हैं।

    -वसीम अहमद, जिला शिक्षा पदाधिकारी, गिरिडीह

    विद्यालय में जगह की कमी है। सभी विद्यार्थियों को एक साथ नहीं बैठा सकते। कला संकाय के विद्यार्थियों को सप्ताह में दो-दो दिन बुलाते हैं। सूचना विभाग को दी है। विद्यालय में अतिरिक्त कक्ष बनने से समस्या दूर होगी। शहर में प्लस टू स्कूलों की संख्या कम है। ऐसे में विभाग का आदेश है कि बच्चों का नामांकन लेने से मना नहीं करें, ताकि पढ़ने से कोई वंचित न रहे। इसलिए क्षमता से अधिक नामांकन हो जाता है।

    -दयानंद कुमार, प्राचार्य, प्लस टू उच्च विद्यालय, गिरिडीह