जल संरक्षण में डोभा बना उपयोगी
गांडेय(गिरिडीह) जल संरक्षण के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं संचालित की जा रही है

गांडेय(गिरिडीह) : जल संरक्षण के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं संचालित की जा रही है। वर्षा जल संचयन के लिए मनरेगा योजना के तहत गांव-गांव में तालाब, डोभा, टीसीबी समेत अन्य योजनाएं संचालित हो रही हैं। उनमें डोभा का निर्माण व्यापक पैमाने पर हुआ है। गांडेय बीपीओ विनय कुमार ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2020-21 तक लगभग 6110 डोभा का निर्माण होना था। वर्तमान में 1529 डोभा निर्माण लंबित है। शेष डोभा धरातल पर बना हुआ है। डोभा बनने से वर्षा जल का संचयन हो रहा है। वहीं डोभा से जलस्तर में वृद्धि भी हुई है।
बता दें कि तत्कालीन मुख्यमंत्री के आदेश पर वित्तीय वर्ष 2016 में युद्धस्तर पर डोभा का निर्माण शुरू हुआ। कृषि विभाग के तहत सभी पंचायतों में डोभा बना। डोभा 30-30 फीट के आकार का बना। बाद में उसी वर्ष मनरेगा योजना से डोभा बनना शुरू हुआ। शुरुआत में यह 30-30 फीट के आकार का बन रहा था। बाद में इसके लागत में वृद्धि करते हुए 40 -50 फीट, 50-50 फीट एवं 60-60 फीट के आकार तक बड़ा डोभा बना। गांडेय प्रखंड में भी सभी पंचायतों में युद्धस्तर पर डोभा का निर्माण हुआ। मैदानों व ढलानों में डोभा बन जाने से बरसात का बहता पानी उसमें भरकर संचयित हो जाता है। इससे डोभा में जमा होकर पानी जमीन वाटर लेबल को रिचार्ज करता है।
बता दें कि डोभा से वर्षा जल संचयन के साथ-साथ कृषि कार्यो में भी उपयोगी हुआ है। स्थल चयन कर बनाए गए डोभा से बरसात का पानी जमा होने से किसान कृषि कार्य में भी इसका उपयोग करते हैं। इससे धान का पटवन भी होता है। साथ ही कुछ किसान अपने डोभा में मत्स्य पालन भी करता है। डोभा से वर्षा जल संचयन होने से जल संरक्षण के लिए उपयोगी साबित हुआ है। प्रशासनिक पदाधिकारियों के देखरेख के अभाव में कुछ डोभा अस्तित्व में नहीं हैं।
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