World Radiography Day: दुमका में रेडियोलॉजिस्ट की उपलब्धता से बदली स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर, मरीजों को राहत
झारखंड के दुमका में रेडियोलॉजिस्ट की उपलब्धता से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार आया है, जिससे मरीजों को अल्ट्रासाउंड और ...और पढ़ें

हर वर्ष 8 नवंबर को मनाया जाता विश्व रेडियोग्राफी दिवस। (एआइ फोटो)
HighLights
रेडियोलॉजिस्ट की उपलब्धता से दुमका की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार।
मरीजों को बड़े शहरों में इलाज के लिए जाने से मुक्ति मिली।
भ्रूण विकृतियों और गंभीर बीमारियों का शुरुआती पता लगाना संभव हुआ।
राजीव, दुमका। झारखंड की उप राजधानी दुमका में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर न्यूनतम परिस्थितियों में तेजी से बदलाव के कारण मरीजों को काफी राहत मिल रही है। खासकर दुमका में रेडियोलाजिस्ट की उपलब्धता ने स्वास्थ्य सेवाओं की दुनिया को काफी बदल दिया है।

दुमका और संताल परगना में रेडियोलाजिस्ट की उपलब्धता से अल्ट्रासाउंड और सीटी गाइडेड बायोप्सी तथा विभिन्न इमेजिंग गाइडेड प्रक्रियाएं अब आसानी से संभव हो पा रही है।
लिवर एब्सेस की ड्रेनेज और पीटीबीडी यानि की पर्क्यूटेनियस ट्रांसहेपेटिक बिलियरी ड्रेनेज जैसी प्रक्रियाओं से कई मरीजों के उपचार में मदद मिल रही है।
दुमका में इन सुविधाओं से मरीजों को हर बार बड़े शहरों के तृतीयक चिकित्सा केंद्रों में जाने की आवश्यकता भी कम होने लगी है। इसकी वजह से मरीजों को उपचार में देरी, यात्रा का खर्च और परिवार पर आर्थिक बोझ से भी राहत मिली है।
एआइ के जरिये रेडियोलाजी इमेज विश्लेषण
डा.अभिषेक कहते हैं कि रेडियोलाजी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से इमेज विश्लेषण और असामान्यताओं की पहचान में सहायता मिल रही है। हालांकि मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, लक्षण और जांचों का समग्र मूल्यांकन में रेडियोलाजिस्ट की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होने से संताल परगना के मरीजों को कुछ मामलों में बड़े चिकित्सा केंद्रों तक जाने की आवश्यकता कम करने में भी मदद मिली है। इससे समय और यात्रा के खर्च में भी बचत संभव हुई है। हालांकि, जटिल मामलों में उच्चस्तरीय चिकित्सा केंद्रों में रेफरल की जरूरत बनी रहती है।
कई बीमारियों व समस्याओं की पहचान हो पा रही है संभव
डा.अभिषेक के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड से भ्रूण में हृदय, मस्तिष्क और रीढ़ की जन्मजात विकृतियों तथा क्लेफ्ट लिप और पैलेट जैसी समस्याओं की पहचान संभव हो रहा है। इनमें से कुछ विकृतियां आनुवंशिक असामान्यताओं से जुड़ी होती हैं।
समय पर पहचान से आगे की जांच, विशेषज्ञ परामर्श और प्रसव की उचित योजना बनाने में मदद मिलती है। कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाना मरीज के उपचार के विकल्प बढ़ा रहे हैं। सीटी स्कैन, एमआरआइ और अल्ट्रासाउंड से संदिग्ध ट्यूमर की पहचान और मूल्यांकन किया जाता है।
जरूरत पड़ने पर इमेजिंग गाइडेड बायोप्सी से बीमारी की पुष्टि की जाती है। समय पर निदान से उपचार जल्दी शुरू हो सकता है। कई मामलों में तो मरीज की जीवन प्रत्याशा तथा जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो पा रही है।
विश्व रेडियोग्राफी दिवस
हर वर्ष 8 नवंबर को विश्व रेडियोग्राफी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में एक्स-रे और रेडियोग्राफी की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इसी दिन 1895 में वैज्ञानिक विल्हेम कॉनराड रॉन्टजन ने एक्स-रे की खोज की थी।
रेडियोग्राफी के माध्यम से शरीर के अंदरूनी अंगों और हड्डियों की जांच संभव होती है। यह बीमारी की पहचान और बेहतर उपचार में डॉक्टरों की मदद करती है। इस अवसर पर रेडियोग्राफरों के योगदान को भी सम्मानित किया जाता है।
किसी भी बीमारी के सफल उपचार की शुरुआत सही निदान से होती है। आधुनिक चिकित्सा में रेडियोलॉजी बीमारी की पहचान, उसकी गंभीरता के आकलन और उपचार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी तकनीकों ने छोटे शहरों में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की संभावनाएं बढ़ाई हैं। रेडियोलॉजिस्ट की भूमिका केवल जांच और रिपोर्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज के उपचार और उसके परिणाम को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण है।
डा.अभिषेक कुमार, रेडियो-डायग्नोसिस, द होप हास्पिटल, दुमका
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