दुमका: कभी पुरस्कार पाने वाला स्कूल आज बदहाल, 1 शिक्षक के कंधे पर 8 कक्षाओं और एमडीएम का जिम्मा
दुमका के उत्क्रमित मध्य विद्यालय रनदोई में 163 छात्रों पर केवल एक शिक्षक है, जिससे शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। ...और पढ़ें

1 शिक्षक के कंधे पर 8 कक्षाओं और एमडीएम का जिम्मा (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
रनदोई स्कूल में 163 छात्रों पर केवल एक शिक्षक।
एक शिक्षक आठ कक्षाओं और विभागीय कार्य संभालता है।
जर्जर भवन और रसोइया की कमी से स्कूल बदहाल।
अमरेंद्र कुमार भगत, रामगढ़ (दुमका)। रामगढ़ प्रखंड के धोबा पंचायत अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय रनदोई में शिक्षा व्यवस्था शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रही है। विद्यालय में नामांकित 163 छात्र-छात्राओं के भविष्य की जिम्मेदारी महज एक शिक्षक के कंधों पर है।
शिक्षक की कमी का आलम यह है कि एक ही शिक्षक को आठ कक्षाओं के बच्चों की पढ़ाई से लेकर विभागीय रिपोर्ट तैयार करने, मध्याह्न भोजन की निगरानी करने और विद्यालय की अन्य व्यवस्थाओं को संभालने तक की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना चुनौती बन गया है।
विद्यालय में कुल 163 बच्चे नामांकित
विद्यालय में कुल 163 बच्चे नामांकित हैं। इनमें पहली कक्षा में 15, दूसरी में 23, तीसरी में 17, चौथी में 14, पांचवीं में 13, छठी में 38, सातवीं में 21 और आठवीं में 22 छात्र-छात्राएं शामिल हैं।
प्रभारी प्रधानाध्यापक अशोक कुमार पांडेय के अनुसार विद्यालय में प्रतिदिन लगभग 100 बच्चों की उपस्थिति रहती है। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को पढ़ाने के लिए विद्यालय में एकमात्र शिक्षक ही उपलब्ध हैं।
शिक्षक के अभाव में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है। पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को एक कमरे में, तीसरी, चौथी और पांचवीं कक्षा के बच्चों को दूसरे कमरे में तथा छठी, सातवीं और आठवीं कक्षा के बच्चों को तीसरे कमरे में बैठाया जाता है।
जनगणना कार्य में प्रतिनियुक्त हैं दूसरे शिक्षक
19 दिसंबर 2025 को रोहित कुमार नामक एक शिक्षक ने विद्यालय में योगदान दिया था। लेकिन महज दो माह तक विद्यालय में सेवा देने के बाद 11 फरवरी 2026 से उन्हें प्रखंड कार्यालय में जनगणना कार्य के लिए प्रतिनियुक्त कर दिया गया। प्रभारी प्रधानाध्यापक अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि एक शिक्षक के भरोसे विद्यालय का संचालन करना काफी मुश्किल हो गया है।
दो साल से रसोइया का एक पद रिक्त
विद्यालय में मध्याह्न भोजन योजना के संचालन में भी परेशानी हो रही है। फिलहाल एक ही रसोइया के भरोसे भोजन तैयार किया जाता है। विद्यालय में कार्यरत एक अन्य रसोइया की करीब दो वर्ष पहले मृत्यु हो गई थी। इसके बाद से आज तक दूसरे रसोइया का चयन नहीं हो सका है। ऐसे में एक रसोइया के सहारे भोजन बनाने की जिम्मेदारी निभाई जा रही है।
जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं बच्चे
शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के बीच विद्यालय भवन की स्थिति भी चिंताजनक है। भवन धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है। इसके बावजूद बच्चे इसी भवन में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। विद्यालय में शिक्षकों की कमी, रसोइया का रिक्त पद और भवन की जर्जर स्थिति मिलकर शिक्षा व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश कर रहे हैं।
कभी बेहतर व्यवस्था के लिए मिल चुका है पुरस्कार
स्थानीय स्तर पर उत्क्रमित मध्य विद्यालय रनदोई की पहचान कभी बेहतर शैक्षणिक एवं विद्यालय प्रबंधन व्यवस्था के लिए होती थी। तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक दिलीप कुमार झा के कार्यकाल में विद्यालय में पर्याप्त संख्या में शिक्षक हुआ करते थे।
विद्यालय को व्यवस्थित रखने के लिए उन्हें कई बार पुरस्कृत भी किया गया था। जिला के शिक्षा विभाग के कई पदाधिकारी ने भी विद्यालय का निरीक्षण किया था। लेकिन समय के साथ शिक्षकों की संख्या घटती चली गई और आज स्थिति यह है कि 163 बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा एक शिक्षक पर आ गया है।
शिक्षकों की कमी के कारण विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्रखंड के अधिकांश विद्यालयों में शिक्षकों की कमी की समस्या है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय रनदोई के दूसरे शिक्षक को जनगणना कार्य के लिए प्रखंड कार्यालय में प्रतिनियुक्त किया गया है। - आनंद शंकर मुर्मू, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी रामगढ़
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