84 की उम्र में रिटायर्ड शिक्षक का कमाल, पान और ऑर्गेनिक खेती से पेश कर रहे सफलता की मिसाल
84 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक चूड़ामणि प्रसाद यादव जामा प्रखंड में पान और जैविक गोभी की खेती कर अन्य किसानों को प्रेरित कर रहे हैं।

84 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक चूड़ामणि ने पान की खेती से किसानों को दिखाई नई राह
HighLights
84 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक चूड़ामणि कर रहे पान की खेती।
जैविक गोभी उगाकर अन्य किसानों को भी प्रेरित किया।
दुमका में पान की अच्छी मांग, पर गुटखा से चुनौती।
जागरण टीम, जामा/बारापलासी। जामा प्रखंड के बारापलासी गांव के निवासी 84 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक चूड़ामणि प्रसाद यादव इस उम्र में भी खेती-किसानी से जुड़ कर कई अभिनव प्रयोग कर रहे हैं। उनका यह प्रयास गांव के कई किसानों को नई फसलों की खेती करने के लिए प्रेरित कर रहा है।
चूड़ामणि अभी लगभग पांच कट्ठा जमीन पर पान की खेती कर रहे हैं। चूड़ामणि बताते हैं कि पान के पत्तों की मांग घर से लेकर बाजार तक है। खासकर आसपास के गांवों में होने वाली पूजा के दौरान श्रद्धालु उनके पास आकर ही पान खरीदते हैं। घर से ही ले जाते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर बड़ा बाजार मिल जाए तो निसंदेह पान की खेती किसानों के लिए काफी फायदेमंद है।
ऑर्गेनिक खेती को दे रहे बढ़ावा
चूड़ामणि अपने पुत्र के साथ बगैर खाद के प्रयोग किए गोबर से तैयार कंपोस्ट से गोभी की खेती कर गांव में सर्वश्रेष्ठ किसान के तौर मिसाल कायम कर चुके हैं। उन्हें देखकर गांव में अन्य किसान भी ऑर्गेनिक गोभी की खेती कर रहे हैं।
चूड़ामणि बताते हैं कि वह कई वर्ष पहले से अपनी निजी जमीन पर पान की खेती का प्रयोग कर रहे थे और इसी का परिणाम है कि अब सफलता हासिल हुई है। चूड़ामणि कहते हैं कि पान बेचकर अच्छी आमदनी हो रही है। यह किसानों के लिए एक बेहतर कैश क्रॉप है।
पान के मुरीदों को दाम की फिक्र नहीं
दुमका में पान के मुरीदों को बढ़े हुए दाम की फिक्र नहीं है। दुमका के टीन बाजार निवासी अजय गुप्ता पान खाने के शौकीन हैं। पूछने पर कहते हैं कि जब दो रुपये में पान की एक खिल्ली मिलती थी तब से लेकर आज तक पान खा रहे हैं। आज एक खिल्ली मीठा पत्ता पान का दाम 15 रुपये है।
वहीं, बंगला पत्ती पान 10 रुपये में एक खिल्ली है। दुमका में टीन बाजार में पान की सबसे पुरानी दुकान छेदी लाल पान की दुकान से प्रसिद्ध है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में पान खाने के शौकीन आते हैं।
छेदीलाल के पुत्र संजय बताते हैं कि पान के शौकीनों की कमी नहीं है लेकिन हाल के वर्षों में गुटखा ने पान बाजार को चुनौती जरूरी दे दी है। हालांकि गुटखा प्रतिबंधित है, लेकिन इसके बावजूद इसका सेवन करने वालों की कमी नहीं है।
संजय बताते हैं कि एक खिल्ली पान का दाम दाम बढ़ने के पीछे महंगा पान मसाला और जर्दा है। दुमका के नीचे बाजार में राज होटल के नीचे स्थित अमित चौरसिया के पान की दुकान में 20 से 50 रुपये की गिलौरी पान भी मिलता है।
दुमका में कोलकाता से आता है पान
दुमका बाजार में पान की आपूर्ति कोलकाता के कालीतल्ला से होती है। यहां मीठा और बांग्ला पान पत्ता डिमांड में है। यहां मगही व बनारसी पान का प्रचलन नहीं के बराबर है। दुमका में पान के दो-तीन थोक विक्रेता हैं।
थोक विक्रेता रमेश चौरसिया बताते हैं कि पान का भाव मौसम और जरूरत पर चढ़ता-उतरता है। दुमका में अभी 1700 से 1800 रुपये में एक हजार बंगला पान पत्ता आ रहा है, जबकि मीठा पान पत्ता 600 से 700 रुपये सैकड़ा की दर से आता है।
रमेश कहते हैं कि पान के मुरीदों की संख्या में धीरे-धीरे कमी हो रही है। इसके पीछे गुटखा खाने वालों की संख्या में इजाफा और पान मसाला की तेजी से बढ़ती कीमत है।
उन्होंने कहा कि दुमका के अलावा उनके यहां से पान गोड्डा के बाजार में भी भेजा जाता है। दुमका के टीन बाजार में पूजन सामग्री की दुकानदारी करने वाले राजकुमार चौरसिया कहते हैं कि पर्व-त्योहार और पूजा-पाठ में पान के पत्तों की जरूरत होती है।
श्रद्धालु यहां पूजन सामग्री के साथ पान खरीदने आते हैं। खुदरा में दो रुपये में एक पान आसानी से बिक जाता है। राजकुमार कहते हैं कि पान बहुत ही नाजुक होता है और इसके रखरखाव में काफी सावधानी बरतनी पड़ती है।
पान के सेवन से कई फायदे
- पाचन में सहायक
- एंटी ऑक्सीडेंट गुण
- मुंह की दुर्गंध से अस्थायी राहत
