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राज्यपाल संतोष गंगवार की छात्रों को नसीहत, नौकरी तलाशने के बजाय खुद अवसर पैदा करने की क्षमता विकसित करें

Published: Thu, 05 Nov 2026 11:31 PM (IST)

सिदो-कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षा समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने छात्रों को बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने और अवसर पैदा करने की सलाह दी।

दीक्षा समारोह में विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान करते राज्यपाल संतोष गंगवार और विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो। (फोटो जागरण)

दीक्षा समारोह में विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान करते राज्यपाल संतोष गंगवार और विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो। (फोटो जागरण)

HighLights

  1. राज्यपाल ने छात्रों को बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने को कहा।

  2. 38 गोल्ड मेडल और 15 पीएचडी की उपाधियां प्रदान की गईं।

  3. मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा छात्रवृत्ति योजना का जिक्र।

राजीव, दुमका। सिदो-कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय के 10 वां दीक्षा समारोह में बतौर मुख्य अतिथि झारखंड के राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने विभिन्न संकायों में स्वर्ण पदक हासिल करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि वह बड़ा लक्ष्य निर्धारित करें और निरंतर सिखें।

नौकरी पाने का प्रयास करें लेकिन अवसर पैदा करने की क्षमता खुद के अंदर पैदा करें। विज्ञान, शोध और तकनीक को विकास का मार्ग बनाएं। झारखंड के युवाओं में प्रतिभा और सामर्थ्य की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है कि अपने ज्ञान, कौशल, नवाचार, उद्यमशीलता के माध्यम से नए अवसर का निर्माण करें।

कहा कि झारखंड और देश के प्रगति का आधार बनें। उपाधि पाने वाले छात्र-छात्राएं कम से कम एक जरूरतमंद विद्यार्थी की पढ़ाई में संकल्प लें। इससे समाज में परिवर्तन तय है। कुलाधिपति ने कहा कि अपनी उपलब्धियों को सीमित रखने के बजाए समाजहित में लगाएं।

कहा कि राज्य के विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ शैक्षणिक सत्रों को नियमित करना आवश्यक है। परीक्षाओं में अनावश्यक विलंब नहीं हो। परीक्षा परिणाम सही समय पर प्रकाशित होना चाहिए। विद्यार्थियों का समय व भविष्य के लिए हरेक मामले में पारदर्शिता जरूरी है।

कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में विकसित भारत 2047 का लक्ष्य देश के सामने है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की भूमिका सबसे अहम है। कहा कि शिक्षा के साथ हमारी संस्कृति, भाषाएं, परंपराएं और लोक ज्ञान हमारी धरोहर है।

इस विरासत को संरक्षित रखते हुए आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, तकनीक व शोध के क्षेत्र में हमें आगे बढ़ना आवश्यक है। विश्वविद्यालय में ऐसी शोध प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जो कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण व ग्रामीण विकास जैसी स्थानीय आवश्यकताओं के समाधान में सहायक हो।

इससे विद्यार्थियों को अपने प्रतिभाओं का उपयोग करने का अवसर मिलेगा। कहा कि कुलाधिपति के तौर पर उनकी अपेक्षा है कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक नीति व निर्णय में केंद्र में छात्रों का हित हो। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित कक्षाएं, शिक्षकों का मार्गदर्शन, प्रयोगशालाओं की सुविधाएं सुनिश्चित हो।

ऐसा शैक्षणिक वातावरण हो जहां विद्यार्थी निर्भिक होकर सवाल पूछ सकें। नए विचार उन्नत कर सकें। विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा केवल उनकी उपलब्धियों व भवनों से नहीं बल्कि शैक्षणिक माहौल से होनी चाहिए।

कुलाधिपति ने कहा कि उपाधि हासिल करने वाले छात्र-छात्राएं भविष्य में अपने लक्ष्य को हासिल करें। इससे पूर्व विशिष्ट अतिथि झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने कहा कि शिक्षा के साथ कर्म भी मूल्यांकन का आधार है। कहा कि वे भविष्य में देश, राज्य व समाज के प्रति जवाबदेह बनें।

कहा कि मेधावी छात्रों के लिए विदेशों में पढ़ाई के लिए हेमंत सोरेन की सरकार ने मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना की शुरुआत की है। इस मौके पर कुल 38 गोल्ड मेडल, 15 पीएचडी की डिग्री प्रदान की गई जबकि विभिन्न संकायों के 4995 छात्र-छात्राओं को इन एब्सेंशिया के तहत डिग्री प्रदान किए जाने की घोषणा की गई।

इसमें एक छात्रा शालिनी भोल को पहली बार एमबीबीएस की डिग्री के लिए गोल्ड मेडल की उपाधि प्रदान की गई। मौके पर एसकेएमयू की कुलपति प्रो.डा.कुनुल कंडीर समेत कई मौजूद थे।

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