यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 17, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
गांवों को दुमका शहर में मिलाने पर होगा विरोध
दुमका : दुमका प्रखंड के सरुवा पंचायत के अंतर्गत जोगीडीह और करमडीह के ग्रामीणों ने दुमका शहर का मास्ट

दुमका : दुमका प्रखंड के सरुवा पंचायत के अंतर्गत जोगीडीह और करमडीह के ग्रामीणों ने दुमका शहर का मास्टर प्लान बनाए जाने के मुद्दे पर अविलाल मुर्मू की अध्यक्षता में ग्रामसभा की गई। बताते चलें कि मास्टर प्लान द्वारा ही दुमका शहरी क्षेत्र का विस्तारीकरण किया जाना है। इसमें कुसुमडीह, जोगीडीह, बागडुबी, ननकू कुरुवा, खैरबनी, श्रीअमड़ा, सरुवा, महुआडंगाल, विजयपुर, जोगीडीह, हरवाडीह, धतिकबोना, हिजला, मोरटंगा, कुल्हरिया, सोनवाडंगाल, बलिया, नेतुरपहाड़ी, सोनवाडंगाल, बगनोचा, रघुनाथगंज, करमटोला, खिजुरिया, गिधनीपहाड़ी, कड़हरबिल, हरणाकुंडी, पुराना दुमका, बंदरजोरी, बाघमारा, कुरुवा समेत कई गांव को दुमका शहरी क्षेत्र के साथ जोड़ना है।
ग्रामसभा में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि जोगीडीह और करमडीह गांव दुमका नगर परिषद में नहीं मिलेगा। अगर गांवों को जोड़ा गया तो वहां पंचायती राज खत्म हो जाएगा। आदिवासियों की मांझी परगना व्यवस्था खत्म हो जाएगी। प्रधानी व्यवस्था खत्म हो जाएगी। इसलिए इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। ग्रामीणों ने खेद जताते हुए कहा कि एक ओर जहां सरकार ग्राम उदय से भारत उदय और सबका साथ सबका विकास की बात करती है वहीं दूसरी ओर बिना ग्रामसभा की अनुमति के विकास के नाम पर गांवों को शहर से जोड़ रही है। इससे गरीब ग्रामीणों पर कर का बोझ और बढ़ेगा। किसान कर्ज के बोझ से बेघर जाएंगे। बैठक में मैसा हांसदा, भीमसेंट हेम्ब्रोम, शिवलाल राणा, बूधर मुर्मू, अजित राणा, मीणा सोरेन, किरण देवी, कुलवंती रानी, सुनीता देवी, संजली हांसदा, जान हेंब्रम, सोमलाल हेम्ब्रोम, शांति टुडू, दोरकी हेम्ब्रोम, जीतन राणा, एमावेल मुर्मू, किरण देवी, सरस्वती देवी, वीणा देवी, मुन्नी हेम्ब्रोम, अनिल मुर्मू, पोलुस मुर्मू, मुन्ना सोरेन, बिटिया टुडू, हलोदी मरांडी, चांदीमुनी देवी मौजूद थे।
