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    राम मंदिर आंदोलन के प्रति जागरूकता को आरएसएस ने निकाली साइकिल यात्रा

    By JagranEdited By:
    Updated: Sun, 20 Dec 2020 08:38 PM (IST)

    धनबाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने रविवार को धनबाद के तेतुलतल्ला मैदान से साइकि

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    राम मंदिर आंदोलन के प्रति जागरूकता को आरएसएस ने निकाली साइकिल यात्रा

    धनबाद : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने रविवार को धनबाद के तेतुलतल्ला मैदान से साइकिल रैली निकाली। साहसिक यात्रा कार्यक्रम के जरिए यह रैली चिटाही स्थित रामराज मंदिर को रवाना हुई। रविवार सुबह सात बजे निकली रैली की शुरुआत पुराना बाजार नगर इकाई की ओर से की गई। इसमें धनसार, हीरापुर, बिशुनपुर व सरायढेला इकाई के स्वयंसेवक भी जुड़ते गए। रैली में 70 स्वयंसेवक शामिल थे। उनके साथ पेयजल, अल्पाहार व स्वास्थ्य उपकरणों के साथ एक चिकित्सीय टीम भी चिटाही को रवाना हुई। इन्हें मिलाकर लगभग डेढ़ सौ की संख्या रैली में शामिल थी। सभी जय श्री राम का उद्घोष करते जा रहे थे। उन्हें नगर कार्यवाह ने रवाना किया।

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    रैली का भूली, तेतुलमारी, वेस्ट मोदीडीह, कतरास पंचगढ़ी व छाताटांड़ में पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया। कई जगह स्थानीय लोगों की ओर से अल्पाहार भी कराया गया। चिटाही रामराज मंदिर दर्शन को पहुंचने के बाद स्वयंसेवकों को स्थानीय धर्मशाला ले जाया गया जहां सभी का स्वागत किया गया। सिनिडीह विद्यालय में भोजन के बाद सभी केंदुआ-करकेंद के रास्ते लौटे। गोधर में भी स्वयंसेवको के ऊपर पुष्पवर्षा की गई।

    स्वयंसेवकों ने बताया कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान स्वयंसेवकों द्वारा किए गए संघर्ष और बलिदान को याद करने, आम जनमानस तक राम मंदिर के प्रति किए गए बलिदानों को पहुंचाने के उद्देश्य से ही इस यात्रा की योजना बनी है। लोगों को यह पता होना चाहिए कि यह सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई का नतीजा नहीं है। इसके लिए पिछले 500 वर्षों में अनेक योद्धाओं, संत-महात्माओं व आम लोगों ने संघर्ष किया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिदू परिषद, बजरंग दल के सैकड़ों स्वयंसेवकों ने अपना बलिदान दिया। तब जाकर आज भव्य श्री राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह राम मंदिर न सिर्फ हमारी आस्था का केंद्र है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर भी है। हमारी धर्म ध्वजा है। अपने धर्म व संस्कृति के प्रति हमारे अनुराग का उद्घोष है। यह हिदू धर्म की सार्वभौमिकता का प्रतीक है। हिदुत्व की अमरता की गाथा है। हमें अपने धार्मिक प्रतीकों एवं अपनी संस्कृति के प्रति ऐसे ही प्रतिबद्ध रहते हुए अपने अन्य मान बिदुओं की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। यह आग्रह ही इस यात्रा का एकमात्र उद्देश्य है।