Sanskrit Day 2021: बोलने में हो रही तकलीफ तो संस्कृत के श्लोकों का करें उच्चारण, स्पीच थेरेपी के लिए इससे बढ़कर कोई भाषा नहीं
Sanskrit Day 2021 दरअसल किसी किसी व्यक्ति में जीभ या होंठ में हल्की दरार होती है। इसे क्लिफ्ट पैलेट या क्लिफ्ट लिप कहते हैं। इस कारण उनको साफ बोलने में परेशानी होती है। तब स्पीच थेरेपी का चिकित्सक इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए संस्कृत ही सर्वोत्तम मानी गई है।

आशीष सिंह, धनबाद। संस्कृत यानी देवभाषा। दुनिया की प्राचीनतम भाषा। आप यह भी जान लें कि संस्कृत भाषा से स्पष्ट बोलने की क्षमता बढ़ाती है। जिन्हें बोलने में तकलीफ होती है, उनकी जुबान को ठीक करने में इस भाषा का ही प्रयोग होता है। धनबाद में भी संस्कृत भाषा का प्रयोग स्पीच थेरेपी में हो रहा है। दो साल में 100 से अधिक लोग, जिनको बोलने में दिक्कत होती थी इस थेरेपी से धाराप्रवाह बोलने लगे हैं। 21 अगस्त को विश्व संस्कृत दिवस मनाया जाता है। आज 21 अगस्त है। धनबाद समेत देश-दुनिया में संस्कृत दिवस मनाया जा रहा है।
स्पीच थेरेपी के लिए संस्कृत सर्वोत्तम भाषा
दरअसल किसी किसी व्यक्ति में जीभ या होंठ में हल्की दरार होती है। इसे क्लिफ्ट पैलेट या क्लिफ्ट लिप कहते हैं। इस कारण उनको साफ बोलने में परेशानी होती है। तब स्पीच थेरेपी का चिकित्सक इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए संस्कृत ही सर्वोत्तम मानी गई है। धनबाद में संस्कृत भाषा का प्रयोग स्पीच थैरेपी में हो रहा है। स्पीच थेरेपिस्ट डा. गणेश चक्रवर्ती ने बताया कि मुंह के किस हिस्से (कंठ, तालू, होंठ) से श्लोक उच्चारण में कौन ध्वनि निकलेगी, यह पता चलने पर जानना आसान होता है कि क्लिफ्ट पैलेट या लिप की समस्या से मरीज को कौन सा शब्द बोलने में मुश्किल होती है।
संस्कृत बोलिए, बंद हो जाएगा हकलाना
जो व्यक्ति धाराप्रवाह बोल नहीं पाते या हकलाते हैं उन्हें संस्कृत बोलनी चाहिए। जो बच्चे स्पष्ट बोलने में असमर्थ हैं, वे संस्कृत श्लोक एवं मंत्रों का अभ्यास करें तो बोलने में सुधार होता है। संस्कृत के शब्द का उच्चारण शानदार होता है, इसलिए हकलाने की समस्या खत्म हो जाती है। कुछ बच्चे कभी-कभी पानी को तानी या टानी बोलते हैं। लड़के की आवाज लड़की की तरह हो जाती है। संस्कृत के छंद बोलकर पढऩे से यह समस्या दूर हो सकती है। हम लोग स्पीच थेरेपी में संस्कृत के विशेष छंद और श्लोक का निश्चित समय तक उच्चारण अभ्यास करवाकर लोगों की बोलने में होने वाली समस्या को दूर करते हैं।
30 साल से इस विधि से मरीजों का इलाज कर रहा हूं। संस्कृत में वाक्यों की संरचना आसान होती है। शब्दों को इधर-उधर रखने पर भी वाक्यों के मायने स्पष्ट होते हैं।
- डा गणेश चक्रवर्ती, स्पीच थैरेपी विशेषज्ञ हीरापुर
संस्कृत में हर अक्षर का कैसे उच्चारण करना है, इसका अलग शास्त्र है। मंत्र, श्लोक के उच्चारण से मन, बुद्धि पवित्र होते हैं और मनुष्य आरोग्य को प्राप्त होता है। अर्थात वाणी की शुद्धता, उच्चारण की शुद्धता से मनुष्य शुद्ध बोलता है। यह वैज्ञानिक भाषा है। अन्य भाषाओं की जननी है। संस्कृत में जो बोला जाता है वही लिखा भी जाता है। संस्कृत की मांग जर्मनी में अधिक है। यही कारण है कि अकेले जर्मनी में ऐसी 14 यूनिवर्सिटी हैं जो संस्कृत के कोर्स चलाती हैं।
- डा. गोपाल कृष्ण झा, पूर्व प्राचार्य, संस्कृत उच्च विद्यालय, धनबाद
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