विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

धनबाद की रिम्पी कौर: संघर्ष से सफलता तक का सफर, 200 परिवारों को दे रहीं रोजगार

Published: Tue, 13 Oct 2026 01:32 PM (IST)

Rimpi Kaur: आर्थिक तंगी और घरेलू प्रताड़ना का सामना करते हुए रिम्पी कौर ने आत्मनिर्भरता की राह चुनी। आज वह ...और पढ़ें

'रूबरू' रेस्टोरेंट की संचालिका रिम्पी काैर। (फोटो जागरण)

'रूबरू' रेस्टोरेंट की संचालिका रिम्पी काैर। (फोटो जागरण)

HighLights

  1. आर्थिक तंगी से जूझकर बनीं सफल उद्यमी।

  2. धनबाद में 200 परिवारों को दिया रोजगार।

  3. कैंटीन से शुरू कर रेस्टोरेंट तक का सफर।

रविशंकर सिंह, धनबाद। कभी बेटे की स्कूल फीस भरने के लिए दूसरों के सामने हाथ फैलाने की मजबूरी थी। जेब में इतने पैसे भी नहीं होते थे कि अपनी छोटी-छोटी जरूरतें पूरी कर सकें।

Rimpi Kaur

मुश्किल वक्त में साथ देने के बजाय सबने मुंह मोड़ लिया। लेकिन रिम्पी कौर ने परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने के बजाय उनसे लड़ने का फैसला किया।

आंसुओं को ताकत और संघर्ष को अपनी पहचान बनाकर उन्होंने ऐसी राह चुनी, जिस पर आज उनके साथ सैकड़ों लोगों के परिवारों की उम्मीदें भी आगे बढ़ रही हैं।

धनबाद की यह महिला उद्यमी कभी खुद आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं, लेकिन आज रोजगार सृजन के जरिये करीब 200 परिवारों की जिंदगी संवारने में योगदान दे रही हैं।

उनकी कहानी सिर्फ एक महिला की सफलता की दास्तां नहीं, बल्कि संघर्षों से जूझकर आत्मनिर्भर बनने और दूसरों को भी अपने पैरों पर खड़ा करने की प्रेरक मिसाल है।

रिम्पी महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना चाहती हैं। एकल मां के रूप में बेटे की परवरिश और कारोबार की जिम्मेदारी संभाल रहीं रिम्पी अब उसे पायलट बनाने का सपना देख रही हैं।

प्रताड़ना से टूटने के बजाय खुद को बनाया मजबूत

वर्ष 1984 में धनबाद के बैंक मोड़ में जन्मी रिम्पी कौर ने धनबाद पब्लिक स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने मार्केटिंग में पढ़ाई की और अपने लिए बेहतर भविष्य के सपने संजोए।

वर्ष 2010 में शादी के बाद हालांकि उनकी जिंदगी में मुश्किलों का दौर शुरू हो गया। उनके अनुसार, शादी के पहले ही दिन ससुराल में फर्नीचर की मांग की गई। बाद में स्वागत समारोह के नाम पर भी उनके और उनके परिवार से दो लाख रुपये मांगे गए।

इसके बाद उन्हें शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। लगातार संघर्ष के बीच उन्होंने वर्ष 2021 में ससुराल छोडने का फैसला किया। उस समय उनका बेटा श्रेयांश व मां का दिया हौसला ही जीने की वजह बना।

मां सिमरजीत कौर से मिले हौसले ने उन्हें कभी टूटने नहीं दिया। आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि बेटे की फीस भरने के लिए भी उन्हें परिजनों से मदद मांगननी पड़ती थी। लेकिन उन्होंने अपनी परिस्थितियों को अपनी नियति मानने से इनकार कर दिया।।

कैंटीन से शुरू हुआ सफर अब कई क्षेत्रों में रोजगार

रिम्पी के जीवन में बदलाव तब आया, जब उनकी मां ने कागज में कंगन लपेट कर दिया, कहा कुछ करो। फिर रिंपी को मानो जीने का हौसला मिल गया।। जून 2022 में उन्हें यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया की कैंटीन में काम करने का अवसर मिला।

यहीं से उन्होंने अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में पहला कदम बढ़ाया। धीरे-धीरे स्कूलों में कपड़े की आपूर्ति से लेकर कैटरिंग तक के काम मिलने लगे। कोयला नगर डीएवी से मिले काम ने उन्हें आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण अवसर दिया।

इससे करीब पांच लाख रुपये की आमदनी हुई और उनके भीतर अपना कारोबार खड़ा करने का आत्मविश्वास मजबूत हुआ। इसके बाद उन्होंने काम का दायरा बढ़ाया। स्कूलों, बैंकों और अन्य संस्थानों में भोजन की आपूर्ति के साथ कपड़ों के निर्माण का काम भी शुरू किया।

वर्तमान में वह सरकारी विभागों के लिए कपड़े तैयार करने के काम से जुड़ी हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को दिए जाने वाले कपड़ों की सिलाई और तैयारी में भी उनकी इकाई योगदान दे रही है।

इस कार्य से करीब 80 लोगों को रोजगार मिला है। इसके अलावा उनके अन्य कारोबार भी कई परिवारों की आजीविका का सहारा बने हैं।

'रूबरू' से बनाई अपनी अलग पहचान

वर्ष 2024 में रिम्पी ने बैंक मोड़ के समीप ''रूबरू'' नाम से रेस्टोरेंट शुरू किया। यहां करीब 10 लोग काम कर रहे हैं। कैंटीन, कैटरिंग, रेस्टोरेंट और कपड़ों के कारोबार के बीच उन्होंने अपनी मेहनत से एक अलग पहचान बनाई है।

कभी आर्थिक तंगी के कारण जिन लोगों के बीच उन्हें असहजता का सामना करना पड़ता था, आज वही लोग उनके काम और हौसले की सराहना करते हैं।

रिम्पी के मुताबिक, मुश्किल समय में कुछ दोस्तों ने उन्हें अपने समूह से बाहर कर दिया था। आज वही लोग उन्हें फोन कर उनके काम और उपलब्धियों की जानकारी लेते हैं।

यह भी पढ़ें- धनबाद स्वास्थ्य विभाग बहाली में बड़ा घोटाला: मेरिट वाले बाहर, सिविल सर्जन की बेटी का चयन

यह भी पढ़ें- झारखंड से 122 दिन बाद मानसून की विदाई, दुर्गापूजा में बारिश का टेंशन खत्म; अब सुबह-शाम बदलेगा मौसम का मिजाज