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धनबाद की ‘वन देवियां’: न मानदेय की चिंता, न विरोध का डर; वर्षों से जंगलों की कर रहीं पहरेदारी

Published: Thu, 15 Oct 2026 02:19 PM (IST)

Ramakunda Women: धनबाद के तोपचांची वन क्षेत्र में रामाकुंडा वन समिति की महिलाएं बिना मानदेय के वर्षों से जंगलों की ...और पढ़ें

जंगल की रखवाली में जुटीं रामाकुंडा की महिलाएं। (फोटो जागरण)

जंगल की रखवाली में जुटीं रामाकुंडा की महिलाएं। (फोटो जागरण)

रविशंकर सिंह, धनबाद। जब जंगलों की रक्षा का सवाल आया, तो इन महिलाओं ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे। न मानदेय की चिंता और न विरोध की परवाह। प्रकृति के प्रति समर्पण ऐसा कि वर्षों से जंगलों की पहरेदारी में जुटी हैं।

झारखंड के धनबाद जिले के तोपचांची वन क्षेत्र में रामाकुंडा वन समिति की महिलाएं पेड़-पौधों और वन्यजीवों को बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं। ये महिलाएं प्रकृति की सच्ची देवी बनकर न केवल जंगलों को संरक्षित कर रही हैं, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं।

रामाकुंडा वन समिति की अध्यक्ष मुंदरी देवी के नेतृत्व में सोमरी देवी, पूर्णिमा देवी, बबुनी देवी और अन्य महिलाएं वर्षों से इस अभियान में जुटी हैं। 34 वर्षीय बबुनी देवी से लेकर 50 वर्ष तक उम्र की महिलाएं जंगलों में गश्ती करती हैं।

पेड़ों की अवैध कटाई रोकना, ग्रामीणों को पौधों का महत्व समझाना और वन विभाग को अवैध गतिविधियों की सूचना देना इनके रोजमर्रा के काम का हिस्सा बन गया है।

विरोध के बावजूद नहीं डिगे कदम

समिति की महिलाओं ने बताया कि लकड़ी काटने वालों और ग्रामीणों से अक्सर विवाद, गाली-गलौज और दुर्व्यवहार भी सहना पड़ता है। इसके बावजूद उनका संकल्प कमजोर नहीं पड़ा।

अभी जुलाई से सितंबर तक बरसात के दिनों में करील काटने वाले दर्जनों लाेगों को महिलाओं ने रोका और वन विभाग को सूचना दी। इसके बाद वन विभाग के कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर कटाई रुकवाई।

इनके प्रयास के कारण ही अब आसपास के गांव के बच्चों, युवाओं और अन्य ग्रामीणों में भी वन संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।

11 सदस्यों से शुरू हुई समिति, पांच महिलाएं अब भी सक्रिय

वर्ष 2013 में गठित रामाकुंडा वन समिति में कुल 11 सदस्य थे। हालांकि, आर्थिक लाभ और मानदेय नहीं मिलने के कारण कुछ सदस्यों ने काम छोड़ दिया। इसके बावजूद पांच महिलाएं बिना किसी आर्थिक प्रोत्साहन के जंगलों की रखवाली कर रही हैं।

पूर्णिमा देवी बताती हैं कि समिति के प्रयास अब रंग लाने लगे हैं। महिलाएं लोगों को पेड़ काटने से रोकने के साथ पौधारोपण के लिए भी प्रेरित करती हैं। उनका मानना है कि जंगल सुरक्षित रहेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, पानी और प्राकृतिक संसाधन मिल सकेंगे।

वन विभाग ने लगाए 25 हजार पौधे

रामाकुंडा वन समिति की पहल से आसपास के जंगलों को सुरक्षित करने में मदद मिली है। वन विभाग ने रामाकुंडा के आसपास लगभग 25 हजार पौधे भी लगाए हैं।

वन कर्मी शोभाराम महतो के अनुसार, समिति की महिलाएं समय-समय पर पेड़ों की अवैध कटाई की सूचना देती हैं। उनके सहयोग से कई बार कटाई रोकी गई और अवैध रूप से काटी गई लकड़ियां भी बरामद की गई हैं।

मिल चुका है चार लाख रुपये का पुरस्कार

वन संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2018 में पीसीसीएफ की ओर से रामाकुंडा वन समिति को सर्वश्रेष्ठ वन समिति के रूप में चार लाख रुपये का पुरस्कार मिला था।

समिति से संबद्ध 11 वीं की छात्रा अंजली कुमारी और पायल का कहना है कि समिति की सदस्य केवल महिलाएं हैं। लेकिन उन्हें मानदेय और जरूरी सुविधाएं मिलें, ताकि वे और बेहतर तरीके से जंगलों की रक्षा कर सकें।

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रामाकुंडा वन समिति की महिलाओं की पहल पूरे वन प्रमंडल के लिए मिसाल है। पेडों की कटाई रोकने के अलावा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में इनके काम को राज्य स्तर पर सराहना मिली है। समिति की महिलाओं को सशक्त करने के लिए जल्द सहायता उपलब्ध कराएंगे।

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विकास पालीवाल, डीएफओ, धनबाद वन प्रमंडल