धनबाद, जेएनएन। आपने सांप-छछूंदर वाली कहावत तो सुनी ही होगी। यह कहावत देश की पहली एसी डबलडेकर के लिए बिल्कुल सटीक है। रेलवे न तो इस टे्रन को चला पा रही है और न ही स्थायी तौर पर रद करने की घोषणा कर रही है।

जी हां, अक्टूबर 2011 में हावड़ा से धनबाद के बीच चली देश की पहली एसी डबलडेकर टे्रन को इस मर्तबा भी एक जुलाई को जारी नये टाइम टेबल में शामिल कर लिया गया है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी कई टाइम टेबल की किताबों में डबलडेकर दौड़ चुकी है।

क्यों फ्लॉप हुई ट्रेनः एसी डबलडेकर का किराया आम ट्रेनें की तुलना में काफी अधिक था। उस पर टाइम टेबल भी यात्री अनुकूल नहीं बनाया गया। शाम में धनबाद से हावड़ा के लिए पहले ब्लैक डायमंड और उसके ठीक पीछे शताब्दी एक्सप्रेस चलती है। डबलडेकर को हावड़ा के लिए तीसरी टे्रन बना दिया गया। शाम छह बजे खुलकर देर रात तकरीबन 11 बजे हावड़ा पहुंचाने वाली टे्रन को यात्रियों ने नकार दिया।

सोमवार-शुक्रवार छोड़ पांच दिन परिचालन के दिन तयः पहले डबलडेकर रोजाना चलती थी। अब इस टे्रन को दोनों ओर से सोमवार व शुक्रवार को छोड़ पांच दिन चलाने की सूचना टाइम टेबल में जारी की गई है।

12385 हावड़ा-धनबाद डबलडेकर

हावड़ा - सुबह 8.35

धनबाद - दोपहर 12.50

12386 धनबाद-गोविंदपुर डबलडेकर

धनबाद - शाम 6.00

हावड़ा - रात 10.40

धनबाद ने ट्रायल को मांगी थी रैक, पूर्व रेलवे ने भेज दिया एक कोचः पारसनाथ से डबलडेकर को चलाने के लिए धनबाद रेल मंडल ने पूरी कर ली थी। ट्रायल के लिए डबलडेकर के रैक की आवश्यकता थी। इसके लिए मंडल से मुख्यालय स्तर पर लगातार पत्राचार किया गया। पर पूर्व रेलवे ने पूरी टे्रन के बजाय एक कोच भेज दिया। तकरीबन डेढ़ साल से डबलडेकर की एक कोच धनबाद यार्ड में खड़ी है।

पूर्व रेलवे को इससे जुड़ा प्रस्ताव भेजा जा चुका है। डीआरएम स्वयं कई बार इस मामले में बात कर चुके हैं। धनबाद रेल मंडल ने तैयारी कर ली है। रैक उपलब्ध होते ही ट्रायल होगा और उसके बाद परिचालन शुरू हो जाएगा।

- पीके मिश्रा, पीआरओ

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