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    भारत में कार्बन बाजार का बेहतर भविष्य, ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया के उत्‍पादन की चल रही तैयारी

    By Deepak Kumar PandeyEdited By:
    Updated: Wed, 31 Aug 2022 01:08 PM (IST)

    इंवायरमेंटल इंफार्मेशन सिस्टम (एनविस) सेंटर और पर्यावरण विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग आइआइटी आइएसएम धनबाद की ओर से पर्यावरण विषय पर व्याख्यान शृंखला का आयोजन किया गया। इसमें पर्यावरण विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के बीटेक एमटेक और पीएचडी स्काॅलर शामिल हुए।

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    व्याख्यान शृंखला में बतौर मुख्य अतिथि ग्रीनविच विश्वविद्यालय के प्रो. कोलिन हिल्स उपस्थित हुए।

    जागरण संवाददाता, धनबाद: इंवायरमेंटल इंफार्मेशन सिस्टम (एनविस) सेंटर और पर्यावरण विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग आइआइटी आइएसएम धनबाद की ओर से पर्यावरण विषय पर व्याख्यान शृंखला का आयोजन किया गया। इसमें पर्यावरण विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के बीटेक, एमटेक और पीएचडी स्काॅलर शामिल हुए।

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    व्याख्यान शृंखला में बतौर मुख्य अतिथि पर्यावरण और मेटेरियल्स इंजीनियरिंग ग्रीनविच विश्वविद्यालय के प्रो. कोलिन हिल्स उपस्थित हुए। प्रो. हिल्स दूषित भूमि उपचार केंद्र ग्रीनविच विश्वविद्यालय के निदेशक और इंडो-यूके पर्यावरण अनुसंधान और नवाचार केंद्र के समन्वयक भी हैं। उनके साथ ग्रीनविच विश्वविद्यालय में वरिष्ठ व्याख्याता और इंडो-यूके पर्यावरण अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र की संयोजक डाॅक्‍टर निमिषा त्रिपाठी भी थीं। ग्रीनविच विश्वविद्यालय के वरिष्ठ व्याख्याता और इंडो-यूके पर्यावरण अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र के भारतीय सह-समन्वयक एवं मुख्य वैज्ञानिक सिम्फर डाॅक्‍टर राजशेखर सिंह भी इस व्याख्यान शृंखला में शमिल हुए। व्याख्यान शृंखला की शुरुआत में एनविस सेंटर आइआइटी आइएसएम के समन्वयक सह ईएसई विभाग के प्रमुख प्रो अंशुमाली ने सभी वक्ताओं, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और छात्रों का स्वागत किया। कार्यक्रम के बारे में एक संक्षिप्त रूपरेखा दी।

    व्याख्यान शृंखला और अतिथि वक्ताओं को दर्शकों से परिचित कराया। इसके बाद प्रो. कोलिन हिल्स ने सीओ-2 के त्वरित खनिजकरण के बारे में जानकारी दी। डाॅक्‍टर निमिषा त्रिपाठी ने बायोमास अपशिष्ट मूल्यांकन के लिए कम कार्बन का विकल्प और डाॅक्‍टर राजशेखर सिंह ने भारत में कार्बन बाजार के भविष्य पर चर्चा की। कहा कि भारत अभी भी तेल, प्राकृतिक गैस और दूसरे ईंधनों के लिए दूसरे देशों से होने वाले आयतों पर निर्भर है। देश में ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया के उत्पादन पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि देश में ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भरता कम की जा सके। अंत में छात्रों के प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया। छात्रों ने कई प्रश्न भी पूछे। प्रो. अंशुमाली ने कार्यक्रम का संचालन किया। मौके पर प्रो. बिस्वजीत पाल, प्रो. सुरेश पांडियन माजूद थे।