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हेमंत सोरेन के सामने भाजपा की लगातार हार, नई टीम के सामने Giridih By-Election खुद को साबित करने का बड़ा अवसर

Published: Mon, 05 Oct 2026 11:17 AM (IST)

Jharkhand BJP की नई टीम के सामने गिरिडीह उपचुनाव पहली बड़ी चुनौती है। यह भाजपा के लिए राज्य में अपना सियासी नैरेटिव बदलने का महत्वपूर्ण मौका है।

Jharkhand BJP Politics: सौदान सिंह, आदित्य साहू, गजेंद्र सिंह पटेल, पवन साय और बाबूलाल मरांडी।

Jharkhand BJP Politics: सौदान सिंह, आदित्य साहू, गजेंद्र सिंह पटेल, पवन साय और बाबूलाल मरांडी।

HighLights

  1. झारखंड भाजपा की नई टीम के सामने गिरिडीह उपचुनाव पहली परीक्षा।

  2. गिरिडीह उपचुनाव भाजपा के लिए सियासी नैरेटिव बदलने का अहम अवसर।

  3. 2019 के बाद भाजपा ने झारखंड में कोई उपचुनाव नहीं जीता।

मृत्युंजय पाठक, धनबाद। Jharkhand Politics:  इस समय भारतीय जनता पार्टी (‍BJP) लिए झारखंड दुखती रग बना हुआ है। इसके चारों तरफ के राज्यों-बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़-में कमल लहलहा रहा है। पांचों राज्यों से घिरे बीच के ही इस राज्य में ही भाजपा की सरकार नहीं है।

झारखंड में लगातार दो विधानसभा चुनाव (2019 और 2024) में भाजपा को हार मिली है। नेता-कार्यकर्ता भविष्य को लेकर हताश और निराश हैं। इस बीच भाजपा संगठन में व्यापक बदलाव हुए हैं। सीधे कहें तो झारखंड भाजपा की नई टीम बनी है। 

मध्य प्रदेश के सांसद और आदिवासी नेता गजेंद्र सिंह पटेल को झारखंड भाजपा का प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ सौरभ सिंह (छत्तीसगढ़) और निवेदिता सिंह (बिहार) को सह प्रभारी बनाया गया है। वहीं पवन साय को प्रदेश संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है।

सौदान सिंह को बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल का राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री/क्षेत्रीय संगठन प्रभारी बनाया गया है। सौदान सिंह पहले भी झारखंड के क्षेत्रीय संगठन प्रभारी रह चुके हैं। 

गिरिडीह उपचुनाव पहली बड़ी चुनौती 

झारखंड भाजपा के प्रभारी गजेंद्र सिंह पटेल और संगठन महामंत्री पवन साय रांची पहुंचकर काम-काज संभाल चुके हैं। यूं तो संगठन में जो बदलाव हुए हैं उसे सामान्य प्रक्रिया कही जा सकती है। लेकिन, संयोग से नई टीम के सामने खुद से साबित करने का मौका भी है-गिरिडीह उपचुनाव।

झारखंड दिवंगत मंत्री और गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से खाली हुई सीट पर उपचुनाव होना है। झामुमो की ओर से सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा का नाम लगभग तय माना जा रहा है। 

गिरिडीह उपचुनाव राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्पूर्ण 

गिरिडीह का मुकाबला अब राजनीतिक दुष्टि से काफी महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि भाजपा के लिए यह महज एक सीट हासिल करने की लड़ाई नहीं होगी। पार्टी ने संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। ऐसे में गिरिडीह उपचुनाव नई जिम्मेदारी संभालने वाले नेताओं के सामने खुद को साबित करने का अवसर है।

संगठन में बदलाव के बाद जमीन पर नई रणनीति कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है, बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को कितना सक्रिय किया जाता है और स्थानीय समीकरणों को पार्टी किस तरह साधती है, इसकी पहली बड़ी परीक्षा इसी उपचुनाव में होगी।

2019 से 2025 के बीच आठ उपचुनाव, एक में भी भाजपा की जीत नहीं

2019 विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार हुई और हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड में झामुमो गठबंधन की सरकार बनी। इसके बाद आठ उपचुनाव हुए। भाजपा को एक में भी सफलता नहीं मिली। एक मात्र रामगढ़ उपचुनाव में भाजपा की सहयोगी आजसू की जीत हुई।

Hemant Soren

2020, Dumka: बसंत सोरेन (झामुमो) -80,559 वोट; लुईस मरांडी (भाजपा)- 73,717 वोट; जीत का अंतर 6,842 वोट। भाजपा दूसरे स्थान पर रही।

2020, Bermo: कुमार जयमंगल (अनूप सिंह), कांग्रेस -94,022 वोट; योगेश्वर महतो बाटुल (भाजपा) — 79,797 वोट; जीत का अंतर 14,225 वोट। भाजपा दूसरे स्थान पर रही।

2021, Madhupur: हफीजुल हसन (झामुमो) — 1,10,812 वोट; गंगा नारायण सिंह (भाजपा) — 1,05,565 वोट; जीत का अंतर 5,247 वोट। भाजपा दूसरे स्थान पर रही।

2022, Mander: शिल्पी नेहा तिर्की (कांग्रेस) — 95,486 वोट; गंगोत्री कुजूर (भाजपा) — 71,796 वोट; जीत का अंतर 23,690 वोट। भाजपा दूसरे स्थान पर रही।

2023, Ramgarh: सुनीता चौधरी (आजसू) — 1,15,669 वोट; बजरंग महतो (कांग्रेस) — 93,699 वोट; जीत का अंतर 21,970 वोट। भाजपा का प्रत्याशी मुकाबले में नहीं था।

2023, Dumri: बेबी देवी (झामुमो) — 1,00,317 वोट; यशोदा देवी (आजसू) — 83,164 वोट; जीत का अंतर 17,153 वोट। भाजपा ने आजसू उम्मीदवार को समर्थन दिया।

2024, Gandey: कल्पना सोरेन (झामुमो) — 1,09,827 वोट; दिलीप कुमार वर्मा (भाजपा) — 82,678 वोट; जीत का अंतर 27,149 वोट। भाजपा दूसरे स्थान पर रही।

2025, Ghatshila: सोमेश चंद्र सोरेन (झामुमो) — 1,04,936 वोट; बाबूलाल सोरेन (भाजपा) — 66,335 वोट; जीत का अंतर 38,601 वोट। भाजपा दूसरे स्थान पर रही।... इसमें से दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी का नाम बटा

2024 में बेहद करीबी था मुकाबला

गिरिडीह सीट पर भाजपा के लिए एक सकारात्मक पहलू यह है कि 2024 के विधानसभा चुनाव में मुकाबला बेहद करीबी रहा था। सुदिव्य कुमार सोनू को 94,042 वोट, जबकि भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी को 90,204 वोट मिले थे। दोनों के बीच अंतर महज 3,838 वोट का था।

Giridih News

2019 के बाद लगातार चुनौती

2019 के विधानसभा चुनाव के बाद झारखंड की चुनावी राजनीति में भाजपा को लगातार चुनौती मिली है। ऐसे में गिरिडीह उपचुनाव का नतीजा पार्टी के लिए मनोवैज्ञानिक और संगठनात्मक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।

खासकर विधानसभा चुनाव के बाद उपचुनावों में भाजपा की जीत नहीं मिलने की पृष्ठभूमि में गिरिडीह में जीत पार्टी के लिए अलग संदेश देगी।

अगर भाजपा यह सीट जीतने में सफल रहती है तो इसे संगठन में किए गए बदलाव के बाद पहली बड़ी चुनावी सफलता के तौर पर पेश किया जा सकता है।

इससे नई प्रदेश टीम को कार्यकर्ताओं के बीच सकारात्मक संदेश देने का अवसर मिलेगा और आने वाले चुनावों के लिए संगठन के मनोबल पर भी असर पड़ सकता है।

लोकसभा चुनाव से पहले नैरेटिव पर असर 

वहीं 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले झारखंड में राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने के लिहाज से भी गिरिडीह का परिणाम अहम होगा।

भाजपा के लिए जीत का मतलब केवल विधानसभा की एक सीट बढ़ना नहीं, बल्कि यह संदेश देना भी होगा कि संगठनात्मक बदलाव के बाद पार्टी चुनावी जमीन पर अपनी स्थिति बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

ऐसे में गिरिडीह उपचुनाव भाजपा की नई संगठनात्मक टीम के लिए पहली बड़ी परीक्षा और अपनी रणनीति को जमीन पर साबित करने का महत्वपूर्ण मौका होगा।

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