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    धनसार के पूर्व शिक्षक गणेश झा की पुस्तक का हुआ लोकार्पण; झरिया के साहित्यकार बनखंडी मिश्र ने लिखी भूमिका Dhanbad News

    By Atul SinghEdited By:
    Updated: Tue, 17 Aug 2021 11:30 AM (IST)

    विश्व प्रसिद्ध कोयला नगरी झरिया की पहचान साहित्य के क्षेत्र में दशकों से रही है। यहां के हिंदी और उर्दू के साहित्यकारों ने समय-समय पर अपनी बेमिसाल कृति से इस शहर का नाम रोशन किया है। काव्य संकलन की भूमिका झरिया के वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार बनखंडी मिश्र ने लिखी है।

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    विश्व प्रसिद्ध कोयला नगरी झरिया की पहचान साहित्य के क्षेत्र में दशकों से रही है। (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

    गोविन्द नाथ शर्मा, झरिया: विश्व प्रसिद्ध कोयला नगरी झरिया की पहचान साहित्य के क्षेत्र में दशकों से रही है। यहां के हिंदी और उर्दू के साहित्यकारों ने समय-समय पर अपनी बेमिसाल कृति से इस शहर का नाम रोशन किया है। 18 वीं सदी के लब्ध प्रतिष्ठित आशुकवि पंडित छत्रनाथ झा की ओर से करीब दो - ढाई सौ वर्ष पूर्व रचित व धनसार निवासी पूर्व शिक्षक गणेश झा 'सुरेश' की ओर से संकलित काव्य संकलन ''छत्रनाथ रचनावली" का वर्चुअल लोकार्पण बिहार के सहरसा जिले के बनगांव में सम्पन्न हुआ।

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    काव्य संकलन की भूमिका झरिया के वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार बनखंडी मिश्र ने लिखी है। लगभग 128 पृष्ठ की इस पुस्तक के सम्पादक पंडित हरिश्चन्द्र मिश्र और सह सम्पादक डॉ. विनय कर्ण (पटना) हैं। इनके अथक परिश्रम और लगभग आठ वर्षों के निरन्तर प्रयास से उग्राद्या रिसर्च एंड डेवेलपमेंट सेंटर पटना की ओर से प्रकाशित किया गया है। सामग्री-संकलन, परिमार्जन और पुस्तक के प्रकाशन में भोलन झा, कमल नयन, अश्विनी झा, विश्वनाथ मिश्र का सराहनीय योगदान रहा। पुस्तक लोकार्पण समारोह का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन से हुआ। अध्यक्षता बनगांव के प्रख्यात शिक्षाविद और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक विक्रमादित्य खां ने की। अस्वस्थता के कारण गणेश झा व बनखंडी मिश्र समारोह में वर्चुअली शामिल हुए।

    अतिथियों का स्वागत मिथिला की परंपरानुसार पाग और दोपटा से किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि जन शिक्षण संस्थान गया के पूर्व निदेशक और सुप्रतिष्ठित शिक्षाविद डॉ. नरेश झा ने बनगाँव के दो महान और समकालीन विभूतियों पं. छत्रनाथ झा और परमहंस लक्ष्मीनाथ गोसाईं (बाबा जी) के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विद्वतापूर्ण व्याख्यान दिया। इसे सुनकर उपस्थित ग्रामीण और प्रबुद्ध श्रोतागण अभिभूत हो गए। विशिष्ट अतिथि प्रो. ललितेश मिश्र ने मिथिला की ज्ञान परम्परा पर विस्तृत चर्चा की। छत्रनाथ रचनावली पुस्तक की विशिष्टता पर भी प्रकाश डाला। सहरसा कॉलेज के पं. हरिश्चन्द्र मिश्र, विश्वनाथ मिश्र, डॉ. शिशिर कुमार मिश्र, रघुवंश खां, पं. एस मिश्र ने भी छत्रनाथ झा की रचनाओं पर अपने विचार रखे। विक्रमादित्य खां ने कहा कि महामान्य स्व. छत्रनाथ झा रचित इस काव्य संग्रह के संकलन, प्रकाशन और सम्पादन से जुड़े सभी लोग धन्यवाद के पात्र हैं। समारोह का संचालन डॉ. विनय कर्ण व धन्यवाद गणेश 'जनगण' ने दिया। मौके पर हीरा झा, धनंजय कुमार झा, शशिधर ठाकुर, राहुल झा बिल्टू, राम नारायण मिश्र, सुमित सौरभ आदि उपस्थित थे।