संवाद सहयोगी, झरिया : यूं तो प्रतिवर्ष पौष के महीने में फल का कारोबार मंदा रहता है। क्योंकि इस माह ना कोई विवाह और ना ही कोई पर्व त्योहार होते है। जिस वजह से खुदरा बाजारों में फलों की बिक्री काफी कम हो जाती है। इसका सीधा असर धनबाद स्थित कृषि उत्पादन बाजार समिति के थोक फल कारोबारियों पर पड़ता है। वही पौष के महीने में फलों की आवक भी काफी कम हो जाती है।

क्योंकि इन दिनों बगीचों में फलों की कीमतें आसमान छू रही है। लेकिन धनबाद के थोक मंडी में इनके भाव नरम है। धनबाद की थोक फल व्यापारियों की मानें तो हर वर्ष पौष के महीने फल की आवक कम हो जाती है। परंतु इस वर्ष पौष माह बीत जाने के बाद भी फलों की बिक्री में तेजी नहीं आई है।

व्यापारियों के अनुसार सरस्वती पूजा से फलों की बिक्री में तेजी आने के आसार दिख रहे है। फिलहाल अभी फलों की आवक कम आ रही है। क्योंकि बाजारों में फलों की बिक्री काफी कम है। लेकिन धीरे-धीरे फलों की आवक बढ़ने थे फलों के व्यापार में रौनक आ सकती है।

नागपुर के व्यापारी

नागपुर के संतरा व्यापारी विवेक अल्लो दे ने बताया कि इस वर्ष संतरे की कीमतों में काफी तेजी आएगी क्योंकि इस वर्ष संतरे की फसल काफी कमजोर हुई है पूर्व में यहां प्रतिदिन नागपुर धनबाद के लिए चार से पांच प्रतिदिन गाड़ियां निकलती थी। वही इस वर्ष दो से तीन गाड़ियां धनबाद मंडी में पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस वर्ष संतरे के शौकीन जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी।

 दिल्ली के सेव व्यापारी

दिल्ली के सेव व्यापारी राकेश कुमार ने बताया कि कश्मीर से सेव की आवक धीरे धीरे कम होते जा रही है। जिस वजह से इनकी कीमतों में भी तेजी आने के अनुमान लगाए जा रहे है। फिलहाल पौष के महीने में फलों की आवक कम हो जाती है। मगर इस वर्ष पौष का महीना बीत जाने के बाद भी फलों में तेजी नहीं आई है।

बंगाल के केला व्यापारी

पश्चिम बंगाल के केला व्यापारी अनूप पाल ने बताया की पौष के महीने में केला का व्यापार काफी मंदा हो जाता है। यू तो सर्दियों में केले की चाहत कम रहती है। वही पौष के महीने की वजह से इसका कारोबार काफी कम रहता है। इस वर्ष पौष का महीना बीत जाने के बाद भी केला का कारोबार में कोई तेजी नही आया है ।

Edited By: Atul Singh