चासनाला, जेएनएन। Illegal Sand Mining रांची में नदी पर बने पुल के पिछले दिनों धराशायी होने के बाद अब धनबाद और बोकारो को जोड़ने वाले सुदामडीह पुल पर खतरे को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। इंटरनेट मीडिया में सुदामडीह पुल के नीचे हो रहे बालू के अवैध खनन को लेकर पक्ष व विपक्ष में वार भी शुरू हो चुका है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी ट्वीट कर राज्य सरकार को घेरा है। उन्होंने लिखा है कि एक नदी पर बने पुल को गिराकर हमारी सरकार को बदनाम करने की तैयारी है। सुदामडीह में दामोदर नदी पर बने इस पुल के आसपास अवैध बालू खनन से भारी नुकसान हो रहा है। लेकिन सरकार कान में तेल डालकर सो रही है। वहीं भाजपा के प्रतिपक्ष नेता व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी व अन्य ने भी पुल को लेकर ट्वीट कर सरकार पर हमला किया है।

बालू के अवैध खनन से पुल को खतरा

झरिया विधानसभा के सुदामडीह रिवर साइड में दामोदर नदी व भोजूडीह को जोड़ने वाले नए पुल के नीचे अवैध बालू खनन से इस पर खतरा बढ़ गया है। पुल के दूसरी छोर पर पोकलेन मशीन से बालू व मिट्टी की कटाई की जा रही है। अगर जल्द सरकार व जिला प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाया गया तो यहां भी हादसा होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। सुदामडीह पुल के अंतिम छोर भोजूडीह के पास पुल के पाया कि नीचे से पोकलेन मशीन लगाकर बालू का खनन कई दिनों से किया जा रहा है। इससे पुल के भविष्य पर खतरा मंडराने लगा है। 

पश्चिम बंगाल के थर्मल प्लांट में हो रही बालू की सप्लाई

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल के पास गहराई तक भारी मात्रा में बालू की कटाई की जा रही है। पुल के पास कार्य कर रहे युवक ने बताया कि यह कार्य बंगाल के पीडीसीएल थर्मल प्लांट के जीएम के आदेश पर किया जा रहा है। पुल निर्माण के बाद इसके नीचे बालू व मिट्टी का काफी जमाव हो गया है। गर्मी के समय में थर्मल प्लांट को जाने वाला पानी पंप के पास नहीं पहुंच रहा है। इससे काफी परेशानी हो रही है। इसलिए प्रबंधन ने बालू व मिट्टी हटाने का कार्य अंबुज महथा को दिया है। बालू व मिट्टी कटाई का कोई कागजात लोग नहीं दिखा पाए। अगर पुल के पास बालू खनन को नहीं रोका गया तो बारिश में हादसा हो सकता है।  

सुदामडीह में पुल बनने से लोगों को मिली राहत

सुदामडीह में नया पुल बनने से बीसीसीएल अधिकारियों व चासनाला, सुदामडीह व भौंरा के कर्मियों को काफी राहत मिली है। बीसीसीएल की बंगाल स्थित भोजूडीह वाशरी, सुदामडीह आदि क्षेत्रों में कार्यरत सैकड़ों कर्मी रोज आना-जाना करते हैं। बिरसा पुल के रास्ते मानपुर होकर जाने में करीब 15 किलोमीटर की दूरी अधिक होती है। पुल के बनने से यह दूरी मात्र पांच किलोमीटर हो गई है।

Edited By: Mritunjay