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    आठ वर्ष बाद 130 लाभुकों को मिली राजीव आवास योजना की अंतिम किस्त Dhanbad News

    By Atul SinghEdited By:
    Updated: Fri, 12 Feb 2021 12:51 PM (IST)

    2012 में राजीव आवास योजना के तहत नगर निगम क्षेत्र में 1200 आवास की स्वीकृति हुई थी। इसमें 130 लाभुकों को अंतिम किस्त नहीं मिल सकी थी। गुरुवार को 130 की अंतिम किस्त जारी की गई। लगभग आठ वर्ष बाद राजीव आवास योजना के लाभुकों की सुध ली गई है।

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    2012 में राजीव आवास योजना के तहत नगर निगम क्षेत्र में 1200 आवास की स्वीकृति हुई थी। (प्रतीकात्‍म तस्‍वीर)

    धनबाद, जेएनएन : 2012 में राजीव आवास योजना के तहत नगर निगम क्षेत्र में 1200 आवास की स्वीकृति हुई थी। इसमें 130 लाभुकों को अंतिम किस्त नहीं मिल सकी थी। गुरुवार को 130 की अंतिम किस्त जारी की गई। लगभग आठ वर्ष बाद राजीव आवास योजना के लाभुकों की सुध ली गई है। इतने लंबे समय का खामियाजा लोगों को उठाना पड़ा। कई लाभुकों ने तो अपने पैसे से घर बनवा लिया तो कई अभी तक अधूरे मकान में ही रह रहे हैं। इस योजना के तहत पहली किस्त 72996 और दूसरी-तीसरी किस्त एक लाख 9485 रुपये दी गई थी। अंतिम किस्त के तौर पर 31 हजार 79 रुपया दिया जा रहा है।

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    नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 23 के रंगिनीभीठा इलाके के कोड़ा समुदाय के लोगों को इस योजना का पूरा लाभ आज तक नहीं मिल सका था। दो दर्जन से अधिक लोगों को आवास तो मिल गया, लेकिन लगभग 16 लाभुकों को इस योजना की अंतिम किस्त नहीं मिल सकी है। कुछ मकान बन चुके हैं तो कुछ अधूरे खड़े हैं। समस्या यह है कि लोगों ने पहली किस्त मिलने के बाद अपना पुराना घर तोड़ कर गिरा दिया और अब नया घर भी रहने को मयस्सर नहीं है। इस कारण लोगों ने घर तो बनवा लिया, लेकिन इसकी रंगाई-पुताई के लिए राशि उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

    लाभुक जोसना देवी, रागी देवी, बबिता और सादेश्वरी ने बताया कि चार वर्ष से ज्यादा समय हो गया, लेकिन अभी तक अंतिम किस्त नहीं मिली है। कोई सुनने वाला भी नहीं है, कहां फरियाद लेकर जाएं। पार्षद को भी कई बार बोला गया, लेकिन ध्यान ही नहीं देते। अब तो पूर्व पार्षद हो गए और ध्‍यान नहीं दे रहे हैं। राजीव आवास योजना की राशि निगम के पास पड़ी है, लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना आने के बाद से राजीव आवास योजना शिथिल पड़ गई है। काम कराने वाली एजेंसियां भी बदल गईं, लिहाजा किसी की दूसरी, किसी की तीसरी तो किसी की अंतिम किस्त लटक गई।