MLA Jairam Mahto ने हासिल की पीएचडी की डिग्री, अब नाम के आगे लगेगा ‘डॉक्टर’
JLKM Chief Jairam Mahto ने बिनोद बिहारी कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू) से अपनी पीएचडी की डिग्री हासिल की है, जिससे वे ...और पढ़ें

BBMKU दीक्षा समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से पीएचडी की डिग्री लेते विधायक जयराम महतो।(फोटो जागरण)
HighLights
डुमरी विधायक जयराम महतो ने बिनोद बिहारी कोयलांचल विश्वविद्यालय से पीएचडी की।
झारखंड के पहले विधायक, पद पर रहते हुए नियमित छात्र के रूप में।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने दीक्षा समारोह में उन्हें उपाधि प्रदान की।
आशीष सिंह, धनबाद। झारखंड की राजनीति में अपनी अलग पहचान बना चुके गिरिडीह जिले की डुमरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक जयराम महतो ने एक नई उपलब्धि हासिल की है। राजनीति के तीखे संघर्षों, आलोचनाओं और व्यस्त दिनचर्या के बीच जयराम महतो ने बिनोद बिहारी कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू) से अपनी पीएचडी की डिग्री हासिल की है।
पीएचडी की डिग्री हासिल करने के साथ ही जयराम झारखंड के इतिहास में ऐसे पहले विधायक बन गए हैं, जिन्होंने एक नियमित छात्र के रूप में पढ़ाई करते हुए और विधायक रहते हुए अपनी पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है।
शुक्रवार को बीबीएमकेयू के तीसरे दीक्षा समारोह में उन्हें राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया। अब वे डा. जयराम महतो लिख सकते हैं।
इस ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण की साक्षी बनने के लिए उनकी मां शीला देवी भी उनके साथ विश्वविद्यालय परिसर पहुंची थीं। इस खास उपलब्धि के मौके पर दैनिक जागरण के संवाददाता ने विधायक डा.जयराम महतो से खास बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश।
रात को चार-पांच घंटे दोस्तों के साथ चर्चा और पढ़ाई
राजनीति के व्यस्त शेड्यूल के बीच पढ़ाई के संतुलन पर जयराम महतो ने कहा, राजनीति के सफर में कई चुनौतियां, आलोचनाएं और हमले आए, लेकिन पढ़ाई कभी नहीं रुकी।
15 से 20 दिनों के अंदर कम से कम चार-पांच घंटे अपने साथियों के साथ बैठते थे, उनसे सवाल पूछने को कहते थे और अंग्रेजी में विषयों को गहराई से डिस्कस करते थे। जब लंबी यात्राओं पर होते थे तो अपने साथियों को गाड़ी में साथ बिठाकर उपन्यासों, पात्रों और उनके शोध पत्र के निष्कर्षों पर चर्चा किया करते थे।
प्रजेंटेशन से पहले इंटरनेट मीडिया से हो जाते थे गायब
अपनी पढ़ाई के प्रति समर्पण को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष में एक बार होने वाले प्रेजेंटेशन के समय वो कम से कम सात दिनों के लिए बाहरी दुनिया और इंटरनेट मीडिया से पूरी तरह दूरी बना लेते थे।
इस बार भी प्रेजेंटेशन से पहले तीन दिनों के लिए पूरी तरह आफलाइन हो गए थे। वाट्सएप, इंस्टाग्राम, एक्स और फेसबुक जैसे अपने सभी इंटरनेट मीडिया अकाउंट्स को एक सप्ताह के लिए डीएक्टिवेट कर दिया था ताकि पूरा ध्यान केवल शोध पर केंद्रित रहे।
आठ साल लग गए, कोरोना और यूनिवर्सिटी बदलाव बना कारण
सामान्यतः पीएचडी में पांच से छह साल का समय लगता है, लेकिन आठ साल लगने के सवाल पर जयराम स्पष्ट किया कि प्रवेश परीक्षा विनोबा भावे विश्वविद्यालय से पास की थी, लेकिन बाद में एडमिशन बिनोद बिहारी कोयलांचल विश्वविद्यालय में हुआ। इस बदलाव के कारण सत्र छह से नौ महीने लेट हो गया।
इसके अलावा, कोरोना महामारी के कारण लगभग डेढ़ साल तक काम पूरी तरह ठप रहा। यदि ये परिस्थितियां न होतीं तो यह डिग्री छह वर्ष में ही पूरी हो जाती। तोपचांची प्रखंड के मानटांड़ गांव के जयराम ने बीबीएमकेयू के अंग्रेजी विभाग से अपना शोध कार्य बीएसके कालेज मैथन की सहायक प्राध्यापक डा. पी. रेबेका के मार्गदर्शन में पूरा किया।
मां ही सबसे बड़ी प्रेरणा, भावुक हुए जयराम
अपनी पीएचडी की मौखिक परीक्षा और दीक्षा समारोह दोनों ही मौकों पर जयराम महतो अपनी मां शील देवी को साथ लेकर पहुंचे थे। मां के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि एक अत्यंत निर्धन और गरीब परिवार से आकर उच्च शिक्षा के बारे में सोच पाना ही बहुत कठिन कार्य है। मां ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं।
मां ने खुद इच्छा जताई थी कि वो मेरे साथ इस ऐतिहासिक पल की साक्षी बनना जाना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने यह डिग्री हासिल की तो ऐसा लगा जैसे उन्होंने जिंदगी का कोई बहुत बड़ा सपना पूरा कर लिया हो। आने वाली पीढ़ी और युवाओं को प्रेरित करते हुए डा.जयराम महतो ने कहा कि शिक्षा ही हमारी सफलता का एकमात्र रास्ता है।
यह सफलता केवल हम तक सीमित नहीं होनी चाहिए। हम अपने राज्य और देश को एक बेहतर विचार कैसे दे सकें, इसके लिए व्यक्तित्व का विकास बहुत आवश्यक है और बिना उच्च शिक्षा के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।
