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    Dumka Medical College: राष्ट्रीय आर्युविज्ञान के मानकों पर खरा नहीं है फूलोझानो मेडिकल कॉलेज, सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

    By MritunjayEdited By:
    Updated: Sat, 30 Jan 2021 03:15 PM (IST)

    संस्थागत कमियों की वजह से मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत पहले बैच के छात्र परेशान हैं। कॉलेज के छात्रों के लिए कहने को तो 23 संकायों की पढ़ाई हो रही है लेकिन अधिकांश संकायों में प्रोफेसर एसोसिएट प्रोफेसर असिस्टेंट प्रोफेसर की कमी है।

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    दुमका मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल ( फाइल फोटो)।

    दुमका [ राजीव ]। दुमका में संचालित फूलोझानो हॉस्पिटल एवं मेडिकल कॉलेज राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान के मानकों पर खरा नहीं है। मेडिकल कॉलेज में सबसे बड़ा बॉटल नेक संसाधनों की कमी है। राज्य सरकार के स्तर से जो रिपोर्ट एनएमसी को भेजी गई है उसके मुताबिक यहां 50 फीसद से अधिक विषय विशेषज्ञ व्याख्याताओं की कमी है। जबकि कायदे से 18 फीसद तक की कमी होने की स्थिति में ही एनएमसी कॉलेज संचालन के लिए स्वीकृति प्रदान करती है। हाल यह है कि फूलाझानो मेडिकल एवं हॉस्पिटल में अध्ययनरत छात्रों  केलिए न तो फैकल्टीवाइज व्याख्याता उपलब्ध हैं और ना लैब है ना लाइब्रेरी। क्लास रूप तक अप टू मार्क नहीं है।

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    संस्थागत कमियों की वजह से छात्र परेशान

    संस्थागत कमियों की वजह से मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत पहले बैच के छात्र परेशान हैं। कॉलेज के छात्रों के लिए कहने को तो 23 संकायों की पढ़ाई हो रही है लेकिन अधिकांश संकायों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर की कमी है। ट्यूटर के भरोसे ही छात्रों का पठन-पाठन चल रहा है। कॉलेज में सहायक प्राध्यापक 37 के विरूद्ध 17 कार्यरत हैं। अपनी परेशानी को लेकर  लगातार सरकार से गुहार लगा रहे हैं लेकिन दूसरी ओर इस मामले में सत्ता और विपक्ष एक-दूसरे की कमियां निकाल कर ठीकरा फोडऩे में मगन हैं। इधर कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि यहां व्याप्त कमियों को लेकर सरकार को पत्राचार किया जा रहा है।

    कुल 23 संकायों में ये है व्याख्याताओं की स्थिति

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    • संकाय       - प्रोफेसर    -  एसोसिएट प्रो. - असिस्टेंट प्रोफेसर - ट््यूटर- सी./जू.रेजीडेंट
    1. एनाटॉमी -  01 - नहीं     -   01- नहीं    - 02  - 01        - 03- 02  -  ---
    2. फिजियोलॉजी- 01 - नहीं   - 01  - नहीं  -  02  -  01        - 03 - 02 - ----
    3. बॉयोकेमेस्ट्री - 01 - नहीं    - 01 - नहीं  -  02  - नहीं        - 03  - 01 - ------
    4. फार्मेकोलॉजी - 01 - नहीं   - 01 - नहीं   - 02   - नहीं        - 03 - 02  -  ----
    5. पैथोलॉजी     - 01 - नहीं  - 02  - 01    - 03   - नहीं        - 04 - 03  - ----
    6. माइक्रोबायोलॉजी- 01 - नहीं - 01 - नहीं   -  02   - 01        - 04 - 01  - ----
    7. फॉरेंसिक मेडिसीन - 01 - नहीं -01 - नहीं -   01   - 01       - 02  - 01  - ----
    8. प्रीवेंटिव एंड सोशल मेडिसीन-01-है - 02- नहीं - 03-01        - 03   -01  - ----
    9. मेडिसीन           - 01 - 01  - 02 -01       - 03 -01      - -------  - 03- 03
    10. पेडियेट्रिक         - 01  - 01  - 01 - नहीं     - 01 - नहीं   - ------   03 -  नहीं
    11. टीबी एंड चेस्ट    -    ----     01   - नहीं  - 01 -नहीं     -  -------- 02 - नहीं
    12. स्कीन वीडी       -   ---        01  - नहीं   - 01 - नहीं   -  -------- 02  - नहीं
    13. साइकेटरी         -  ---          01 - नहीं   - 01 -  01     - -------- 02  - नहीं
    14. सर्जरी             - 01 - नहीं   - 02 - 01    - 03 - 04     - ----     -09   - 04
    15. अ्रॉथो             -  01 - नहीं  - 01  - नहीं   - 01 - 01      -----     - 03 - नहीं
    16. ईएनटी            -  ----       - 01 - 01    - 01 - 01     -----      - 02  - 01
    17. आई               - ----        - 01 - 01    - 01- नहीं    -----       - 02 - 02
    18. गायनी             - 01 - 01     - 01 - 01    - 02  - 02    -----      - 06 - 02
    19. एनेसथिसिया      - ------     - 02  - नहीं   -02  - नहीं    -------   - 04 - 01
    20. रेडियोडायग्नोसिस - ----        - 01 - नहीं   - 01 -  01      ------   - 04  -नहीं
    21. डेनटिस्ट्री          -  ---        -  -----     - 01  - 01      --------- 01 - 01
    22. रेडियोकमेस्ट्री  -सहायक प्रोफेसर योगदान के बाद से अबतक नहीं आए हैं।
    23. इमरजेंसी मेडिसीन - विभाग क्रियाशील नहीं है।

    क्या कहते हैं कॉलेज के प्राचार्य

    दिसंबर माह में सरकार के प्रधान सचिव को तमाम स्थितियों की जानकारी देते हुए पत्राचार

    किया गया है। जिसमें तमाम विभागों में मानव संसाधन की कमी है। लैब समेत अन्य आधारभूत संरचनाओं की कमियों से भी अवगत कराया गया है।

    डॉ.हीरालाल मुर्मू, प्राचार्य, फूलोझानो मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल, दुमका

    पूर्ववर्ती रघुवर सरकार पर आरोप मढ़ने के बजाए हेमंत सरकार को मेडिकल कॉलेज को सुचारू ढंग से चलाने की दिशा में गंभीरता से पहल करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री को चाहिए

    कॉलेज में व्याप्त आधारभूत संरचनाओं में कमियों को दूर कराने की पहल के साथ स्वीकृत

    मानव संसाधनों को उपलब्ध कराने के लिए बहालियां करें ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सके। बयानबाजी के बजाए वर्तमान सरकार को गंभीरता से पहल करना ज्यादा उचित होगा। झारखंड बनने के बाद राज्य में एक भी नए मेडिकल कॉलेज नहीं बने थे। रघुवर दास को माैका मिला तो दुमका समेत तीन का निर्माण करवाया। अब आगे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को काम करने दिखाएं।

    लुइस मरांडी, पूर्व मंत्री, झारखंड सरकार

    पूर्ववर्ती रघुवर सरकार की वजह से मेडिकल कॉलेज के छात्र परेशानी में है। हड़बड़ी में राज्य में मेडिकल कॉलेज की शुरूआत की गई। बिना आधारभूत संरचना और मानव संसाधनों के ही छात्रों का नामांकन कर लिया गया है। इसकी वजह से छात्रों को परेशानी हो रही है। वर्तमान हेमंत सरकार इस मामले को गंभीरता से देख रही है और इस दिशा में समुचित पहल भी कर रही है।

    विजय कुमार सिंह, केंद्रीय महासचिव, झामुमो दुमका