वन्यजीव अंगों की तस्करी पर धनबाद में बड़ी कार्रवाई, सात साल तक की सजा का है प्राविधान
Dhanbad Wildlife Trafficking: धनबाद में वन्यजीवों के अंगों की अवैध खरीद-बिक्री के मामले में तीन आरोपितों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।

पकड़े गए तस्करों के साथ धनबाद के वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास पालीवाल। (फोटो जागरण)
HighLights
धनबाद में वन्यजीव अंगों की तस्करी पर केस दर्ज।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत 7 साल तक सजा।
बरामद अंगों की जांच के लिए देहरादून भेजा गया।
जागरण संवाददाता, धनबाद। वन्यजीवों के अंगों की अवैध खरीद-बिक्री के मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कड़ी सजा का प्राविधान है। धनबाद के वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) विकास पालीवाल ने बताया कि मेमको मोड़ स्थित होटल में छापेमारी के दौरान गिरफ्तार तीन आरोपितों के खिलाफ तीन अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है।
डीएफओ के अनुसार, अधिनियम की धारा 51 के तहत अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित वन्यजीवों के अंगों से संबंधित अपराध सिद्ध होने पर तीन से सात साल तक की कैद और कम से कम 25 हजार रुपये से दो लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि, सजा का निर्धारण मामले के तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
गौरतलब है कि वन विभाग ने आरोपितों के पास से पैंगोलिन के 17 स्केल्स, कैट फैमिली के तीन फर, नौ हड्डियां और तीन नाखून समेत अन्य सामान बरामद किए हैं। बरामद नाखूनों और हड्डियों को जांच के लिए देहरादून स्थित वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट भेजा जाएगा।
जांच के बाद ही पुष्टि हो सकेगी कि ये अंग तेंदुए चीता के हैं या बाघ के। डीएफओ विकास पालीवाल ने लोगों से अंधविश्वास में पड़कर वन्यजीवों के अंगों की खरीद-बिक्री नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
