Dhanbad News: कोयलांचल में मजदूरों को है जान का जोखिम, अवैध खनन और पुलिस की चुप्पी बनी खतरा
कतरास कोयलांचल में मजदूरों को असुरक्षित मालवाहकों में ठूंसा जाता है जो अवैध खनन के लिए जोखिम भरी यात्रा करते हैं। सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन आम है। तोपचांची दुर्घटना ने खतरे को उजागर किया। पुलिस थानों के सामने से गुजरने वाले इन वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं होती यह चिंता का विषय है।

जागरण संवाददाता, कतरास। कतरास कोयलांचल की सड़कों पर एक भयावह तस्वीर आम हो चुकी है। यहां मालवाहकों में इंसान भेड़-बकरियों की तरह ठूसकर भरे होते हैं। प्रत्येक मालवाहक गाड़ी में 60 से 70 की संख्या में मजदूर सवार होते हैं। प्रतिदिन सैकड़ों मालवाहक गाड़ियां हजारों की संख्या में मजदूरों को लेकर जाती हैं।
पेट की आग बुझाने की मजबूरी इन मजदूरों को अपनी जान को जोखिम में डालकर 50 से 80 किलोमीटर की खतरनाक यात्रा करने को मजबूर करती है। ये दृश्य सड़क सुरक्षा के सारे नियमों का खुलेआम मखौल उड़ाते हैं और बताते हैं कि सुरक्षा मानकों की परवाह किए बिना लोगों को किस तरह मौत के मुहाने तक धकेला जा रहा है।
सड़क पर जान का खतरा और पुलिस की चुप्पी
बीते 11 मई को तोपचांची के लेदाटांड में एक ऐसी ही दुर्घटना ने इस खतरे पर मुहर लगा दी और एहसास करा दिया कि यह कितना गंभीर हो सकता है। एक मालवाहक वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने से उसमें सवार करीब 40 से अधिक मजदूर बुरी तरह घायल हो गए थे।
इस एक बड़ी घटना के अलावा धनबाद-गिरिडीह मार्ग में भी आए दिन इस तरह की छोटी-मोटी दुर्घटनाएं होती रहती हैं, जिनमें ये मजदूर घायल होते रहते हैं। यह स्थिति न केवल इन मजदूरों की जान के लिए खतरा है, बल्कि अन्य राहगीरों के लिए भी जोखिम पैदा करती है।
यह दृश्य स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि इस जानलेवा यात्रा के पीछे एक बड़ा कारण अवैध खनन का काला कारोबार है। इसी काम के लिए मजदूरों को इन असुरक्षित वाहनों में ढोया जा रहा है।
दर्जनों थानों के सामने से गुजरती है गाड़ियां
अवैध खनन के लिए मजदूरों को ले जाने वाले ये मालवाहक वाहन खुलेआम सड़कों पर दौड़ते हैं और कई पुलिस थानों के सामने से बेधड़क गुजर जाते हैं। यह स्थिति पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
प्रतिदिन देखने को मिलता है कि गिरिडीह जिले के पीरटांड, हरलाडीह और धनबाद जिले के मनियाडीह, बरवाअड्डा, राजगंज, तोपचांची, तेतुलमारी, निचितपुर, लोयाबाद, अंगारपथरा, जोगता, कतरास, सोनारडीह, मधुबन, महुदा, भाटडीह, बरोरा, और बाघमारा जैसे महत्वपूर्ण थानों के मुख्य गेट से ये गाड़ियां गुजरती हैं।
पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहते हैं। जिससे आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। पुलिस कानून का पालन कराने के बजाय अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
उपायुक्त और पुलिस कप्तान के आदेश भी बेअसर
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिला सड़क सुरक्षा समिति कि बैठक में उपायुक्त ने सड़क सुरक्षा को लेकर और ओवरलोडिंग को रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए थे। उन्होंने स्पष्ट रूप से पुलिस को कार्रवाई करने का आदेश दिया था।
उनके साथ-साथ जिले के पुलिस कप्तान प्रभात कुमार भी कई बार थाना प्रभारियों को अवैध खनन पर नकेल कसने का निर्देश देते आ रहें है। उन्होंने यहां तक कहा है कि जिस थाना प्रभारी के क्षेत्र में अवैध कोयला खनन होगा, वहां के प्रभारी नपेंगे, लेकिन इसके बावजूद अवैध खनन का यह काला कारोबार जोरों पर चल रहा है।
यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि उपायुक्त और पुलिस कप्तान दोनों के कड़े निर्देश केवल कागजों और फाइलों तक ही सीमित होकर रह गए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि नीचे के स्तर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही की गहरी जड़ें इन उच्च अधिकारियों के आदेशों को प्रभावी होने से रोक रही हैं।
समाधान की दिशा में उपायुक्त की भूमिका
फाइलों से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत का जायजा लिया जाये और सख्त कदम उठाएं जाएं। पुलिस पदाधिकारियों को जबाबदेह बनाया जाये। विशेष अभियान चलाकर इन अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकता है।
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