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शिक्षक ट्रांसफर-पोस्टिंग में भ्रष्टाचार का आरोप, निरसा विधायक अरूप चटर्जी भूख हड़ताल पर

Published: Wed, 04 Nov 2026 12:06 AM (IST)

धनबाद विधायक अरूप चटर्जी ने शिक्षा विभाग में शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग और आरटीई एडमिशन में भ्रष्टाचार के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की है।

धनबाद उपायुक्त कार्यालय के समक्ष भूख हड़ताल पर बैठे विधायक अरूप चटर्जी और साथ में अन्य लोग। (फोटो जागरण)

धनबाद उपायुक्त कार्यालय के समक्ष भूख हड़ताल पर बैठे विधायक अरूप चटर्जी और साथ में अन्य लोग। (फोटो जागरण)

HighLights

  1. विधायक अरूप चटर्जी ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की।

  2. शिक्षक ट्रांसफर-पोस्टिंग और आरटीई एडमिशन में अनियमितता का आरोप।

  3. शिक्षा विभाग पर तीन करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप।

जागरण संवाददाता, धनबाद। निरसा विधायक अरूप चटर्जी मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठक गए। विधायक शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रस्टाचार और कार्यशैली से आहत हैं। भूख हड़ताल पर बैठे विधायक ने शिक्षा विभाग में शिक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग और प्रतिनियुक्ति में रुपयों के लेनदेन का आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा कि अगस्त में ही डीएसई शालिनी डुंगडुंग से मिलकर आरटीआइ के तहत जवाब मांगा। यह भी अभी तक नहीं मिला। पिछले एक वर्ष में जिले के सरकारी स्कूलों में किए गए शिक्षकों की अंतर जिला ट्रांसफर-पोटिंग, नए शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति, स्कूलों में छात्र शिक्षक अनुपात की जानकारी मांग रहे हैं। यह नहीं दिया जा रहा है।

आरोप लगाया कि लगभग तीन करोड़ रुपये लेकर बड़े पैमाने पर शिक्षकों का स्थानांतरण और प्रतिनियुक्ति की गई। ग्रामीण स्कूलों में छात्रों के अनुपात में कम शिक्षक दिए गए हैं, शहरों में छात्र कम हैं तो शिक्षक अधिक दे दिए गए हैं।

शहरी क्षेत्र में शिक्षकों को 20 प्रतिशत एचआरए मिलता है, इसलिए लाखों रुपये देकर मनचाहे स्कूल में पोस्टिंग करा लिया। इसी कारण ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में शिक्षक नहीं है, पढ़ाई बाधित हो रही है, परिणाम बेहतर नहीं आ रहा है।

विधायक ने कहा शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर है। उपायुक्त आदित्य रंजन को भी कई बार इससे अवगत कराते हुए जानकारी उपलब्ध कराने की बात कही। उन्होंने भी संज्ञान नहीं लिया। शिक्षा सचिव को भी इस बात की जानकारी है। वहां से भी कोई ठोस पहल नहीं हुई। यही नहीं निजी स्कूलों में बीपीएल एडमिशन में भी गड़बड़ी हुई है।

पैसे वालों को गरीबों की सीट बेच दी गई। दूरी का मानक भी नहीं माना गया है। अधिकतर एडमिशन सरकारी नौकरी करने वालों का किया गया है। डीएसई कार्यालय में बिचौलियों का बोलबाला है। शिक्षा विभाग भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा बना हुआ है। ग्रामीण और शहरी स्कूलों में शिक्षक छात्र अनुपात समान किया जाना चाहिए।

विधायक ने कहा कि जब तक उनकी मांगे मान नहीं ली जाती, ग्रामीण स्कूलों को शिक्षक नहीं मिलते, आरटीई के एडमिशन सूची व्यवस्थित जांच नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। मौके पर पूर्व सिंदरी विधायक आनंद महतो उपस्थित थे।

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