धनबाद, जेएनएन: यदि मैं जुगनू को सूरज समझ बैठूं, तो हमलोगों की बड़ी भूल होगी। देश की औद्योगिक राजधानी माना जाने वाला धनबाद आज कई विसंगतियों से जूझ रहा है। कोयलांचल देश के मानस पटल पर अपनी छाप छोड़ने में असफल है। प्रतिवर्ष बच्चे दिल्ली, इलाहाबाद, बनारस व कोटा आदि स्थानों में पलायन करने के लिए विवश हैं और इसकी वजह है धनबाद में शिक्षा संस्थानों की घोर कमी।

 धनबाद को एजुकेशन हब बनना होगा। हो सकता है कि किसी परीक्षा या प्रतियोगिता में कोयलांचल के क्षेत्र से किसी बालक बालिका ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का डंका बजाया हो, किंतु धनबाद और इसके आसपास के क्षेत्र से भारी संख्या में छात्रों का पलायन हो रहा है। यदि धनबाद के संस्थानों पर नजर डालें तो उच्च शिक्षा या रोजगरोन्मुखी शिक्षा के लिए आइआइटी आइएसएम को छोड़ बच्चों को कुशल मार्गदर्शन देने वाली संस्थाओं के घोर कमी है। यह बात दीगर है की सीबीएसई एवं आइसीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त कुछ संस्थाएं धनबाद में स्कूली शिक्षा के लिए जानी जाती है, लेकिन इनकी संख्या भी आधे दर्जन से आगे नहीं है।

 राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पैठ बनाने वाली संस्थाओं व कोचिंग इंस्टीट्यूट की कोई शाखा धनबाद में नहीं है। कुछ है भी तो वह ना के बराबर ही है। यहां स्पष्ट करना चाहूंगा कि मेरे इस लेख का उद्देश्य किसी संस्थान चलाने वाले को ठेस पहुंचाना नहीं है। लेकिन सत्य के परे मैं और कहीं नहीं जाना चाहता हूं। धनबाद की स्थिति देखिए डॉक्टर इंजीनियर बनने का सपना लिए विद्यार्थी दर-दर भटकने को विवश हैं। धनबाद में एक आधुनिक सुविधाओं वाला एक मेडिकल कॉलेज और होना चाहिए ताकि यहां छात्र तराशे जा सकें।

 केंद्र की या राज्य की सरकार पर कोई आरोप नहीं मढ़ना चाहता हूं। किंतु दोनों सरकारों को समन्वय स्थापित कर धनबाद में शिक्षा व्यवस्था हेतु गंभीर चिंतन करना ही चाहिए। ऐसे तो बीएड डीएलएड कराने वाली संस्थाएं धनबाद में दर्जनभर हैं लेकिन सभी मध्यम वर्ग के अभिभावकों की पकड़ से बाहर हैं। वंचित वर्ग तो वंचित है ही। बी पॉलिटेक्निक के अलावा तकरीबन 10 की संख्या में स्वतंत्र तौर पर वनमैन इंस्टीट्यूशन है। बावजूद इसके विद्यार्थी अन्य स्थानों पर पलायन को मजबूर हैं। बीआइटी सिंदरी जैसे संस्थाओं में भी बच्चों को मनचाहा विभाग नहीं मिल पाता है। धनबाद में प्रबंधकीय संस्थाएं एक भी नहीं है। प्रयास कर मैनेजमेंट स्टडीज के सेंटर धनबाद में खोले जाने चाहिए।

 मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि सीपीटी और सीए जैसी डिग्रियां हासिल करने के लिए कोयलांचल के बच्चों को कोलकाता और दिल्ली या अन्य मेट्रो सिटी की ओर मुंह मोड़ना पढ़ता है। बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय के अधीन लड़के लड़कियों के लिए कॉलेज तो है, लेकिन इन सभी कॉलेज में फैकल्टी की घोर कमी है। कई वर्षों से न तो शिक्षकों की बहाली हुई है न ही संसाधन उपलब्ध है। बावजूद इसके कड़ी मेहनत के कारण कॉलेजों का परीक्षा परिणाम अव्वल होता है। कई नियुक्ति तो उच्च एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा में लंबित है।

 कोयलांचल धनबाद के लिए दुख का विषय यह भी है कि केंद्र सरकार द्वारा बड़ी संस्थाएं जो राज्यों में खोली जाती है संस्थाओं का केंद्र बिंदु धनबाद नहीं हो पाता। इसके लिए जनप्रतिनिधि एवं जनता जनार्दन को जागरूक होकर प्रयास करना चाहिए। धनबाद में केवल कोयला ही नहीं हीरे भी हैं। इन हीरों को तराशने के लिए जानकार जौहरी कम पड़ जाते हैं। इसलिए सरकारी प्रयास वांछनीय है। मेरा मानना है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार संयुक्त पहल कर धनबाद में एक और आधुनिक मेडिकल कॉलेज इंजीनियरिंग कॉलेज और देश की नामचीन मैनेजमेंट कोचिंग संस्थाओं को धनबाद लाने में सफल रही तो देखते ही देखते तस्वीर बदलने लगेगी।

 फिर मंजर बदला बदला सा लगेगा। बावजूद इसके निराश होने की कोई आवश्यकता नहीं है, जब जगे तभी सवेरा। हमें हमेशा धनी सोच का बना रहना पड़ेगा। सर्वत्र शिक्षा का दीप जले। धनबाद में फैशन डिजाइनिंग, मास कम्युनिकेशन, फाइन आर्ट्स जैसी रोजगार परक शिक्षा देने वाली संस्थाओं का धनबाद में होना आवश्यक है। कोयलांचल में प्रतिभा की कमी नहीं है। जरूरत मात्र उन्हें कुशल दिशानिर्देश देने की जरूरत है।

 

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