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न मंदिर, न मूर्ति… बरगद के नीचे 300 साल से मां काली का दरबार, मन्नत मांगने उमड़ते हैं भक्त

Published: Mon, 02 Nov 2026 08:13 PM (IST)

Kali Puja 2026: धनबाद के धारजोरी गांव में एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे 300 साल से अधिक समय ...और पढ़ें

धनबाद के धारजोरी गांव में खुले आसमान के नीचे बरगद के वृक्ष के नीचे होती है मां काली की पूजा।

धनबाद के धारजोरी गांव में खुले आसमान के नीचे बरगद के वृक्ष के नीचे होती है मां काली की पूजा।

HighLights

  1. धनबाद के धारजोरी में 300 साल पुराना काली दरबार।

  2. विशाल बरगद के नीचे होती है मां काली की पूजा।

  3. बिना मूर्ति और मंदिर के पूरी होती हैं मन्नतें।

अमृत बाउरी, निचितपुर (धनबाद))। Kali Puja 2026: श्रद्धा और आस्था का एक ऐसा केंद्र, जहां न कोई मंदिर है और न ही माता की कोई मूर्ति, फिर भी सदियों से यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। हम बात कर रहे हैं झारखंड के धनबाद जिले की रेंगुनी पंचायत के धारजोरी गांव की, जहां विशाल बरगद के वृक्ष के नीचे खुले आसमान में पिछले तीन सौ से अधिक वर्षों से मां काली की पूजा-अर्चना की जा रही है।

यहां एक अनोखी परंपरा के तहत मां काली की पूजा की जाती है। किसी मंदिर या गर्भगृह में नहीं, बल्कि खुले आसमान के नीचे विशाल बरगद के वृक्ष के नीचे स्थित मां काली स्थान में माता की आराधना की जाती है। यहां मां काली की कोई मूर्ति स्थापित नहीं है। इसके बावजूद मां काली स्थान श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, विश्वास और भक्ति का केंद्र बना हुआ है।

धारजोरी, पातामहुल, बांसमुड़ी, काडामारा, झारखंड मोड़ सहित आसपास के क्षेत्रों और दूर-दराज के सैकड़ों श्रद्धालु यहां मां के दरबार में पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां काली के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत अवश्य पूरी होती है।

यही वजह है कि दूर-दूर से लोग यहां शीश नवाने आते हैं। इस वर्ष भी मां काली की पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।

दीपावली पर विशेष पूजा 

इस वर्ष यानी 2026 में काली पूजा (दीपावली की रात-अमावस्या की रात) 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। काली पूजा पर धारजोरी गांव के बरगद वृक्ष के नीचे विशेष पूजा होती है। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। 

पूजा की तैयारियां जोरों पर

ग्रामीण अंगद महतो, विकास कुमार महतो, धीरेन चंद्र महतो, तरुण कुमार महतो, मनोहर महतो, जगदीश महतो और प्रेमचंद महतो ने बताया कि जिस तरह यहां के बूढ़ा बाबा की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है, उसी तरह मां काली की प्रसिद्धि भी दूर-दूर तक है। यही कारण है कि काली पूजा के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है।

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मां काली के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और अटूट विश्वास है। आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां काली के दरबार में मत्था टेकने पहुंचते हैं। जो श्रद्धालु मां के दरबार में सच्चे मन से मन्नत मांगते हैं, उनकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है।

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देवानंद तिवारी, पुजारी

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