धनबाद, आशीष अंबष्ठ। कोल माइंस भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफ) में फर्जी कागजात पर बीसीसीएल के 323 कर्मियों को 10 करोड़ का पीएफ अग्रिम भुगतान कर दिया गया। प्रारंभिक जांच में इसमें सीएमपीएफ के 31 कर्मचारियों की मिलीभगत उजागर हुई है। मुख्य सतर्कता आयोग के निर्देश पर जांच शुरू हो गई है। 31 अधिकारी व कर्मियों को चार्जशीट किया गया है। जांच व कार्रवाई को लेकर विजिलेंस विभाग भी सक्रिय हो गया है। सीएमपीएफ मुख्यालय की नाक के नीचे धनबाद स्थित डी 1 व डी 2 का मामला है।

बता दें कि भुगतान सही व्यक्ति को मिला है मगर कागजात गलत दर्शाया गया। इसमें उम्र छुपाकर, घर बनाने व जमीन खरीदने, शादी व बच्चों की पढ़ाई आदि के लिए राशि ली गई है। दस साल नौकरी रहने के बाद भी सीएमपीएफ में कुल जमा राशि का 90 फीसद तक भुगतान उठा लिया गया। कोलियरी से लेकर सीएमपीएफ क्लर्क तक मिलीभगत कर गलत तरीके से पीएफ राशि निकाली गई। सीएमपीएफ ने निष्पक्ष जांच के लिए सीवीसी के दिशा-निर्देश पर इंक्वायरी अफसर को बहाल कर दिया है। छानबीन के बाद इसमें शामिल अधिकारियों व कर्मचारियों का दायित्व तय होगा।

ऐसे पकड़ में आया मामलाः छह माह पहले लोदना एरिया के एक कर्मी ने भुगतान को लेकर पीएफ क्लर्क से कहा तो कुल राशि की दस फीसद राशि कमीशन के रूप में मांग की गई। कहा- दस फीसद राशि दो, पैसा खाते में चल जाएगा। कागजात तैयार है। उक्त कर्मचारी ने इसकी शिकायत विजिलेंस विभाग से कर दी था। इसके बाद विजिलेंस ने धनबाद रीजनल कार्यालय में जांच की तो मामला पकड़ में आया।

10 से 20 लाख तक भुगतानः बताया जाता है कि अग्रिम राशि के रूप में दस से बीस लाख रुपये तक का भुगतान किया गया। दस फीसद कमीशन पर सारा खेल हुआ। टीम इसकी भी सत्यता की जांच में जुटी है।

इन कोलियरियों का मामला : चांच विक्टोरिया एरिया बारह, लोदना, सिजुआ, कतरास, डब्ल्यूजे एरिया, बस्ताकोला, कुसुंडा, ईस्ट बसुरिया, ब्लॉक 2, बरोरा, गोविंदपुर, महेशपुर, बसंतीमाता, दामागोडिय़ा, दहीबाड़ी।

जांच को लेकर इंक्वायरी अफसर की नियुक्ति कर दी गई है। प्रारंभिक जांच के बाद इसमें शामिल कर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। निष्पक्षता से जांच के बाद ही दायित्व तय होगा। करीब 10 करोड़ का मामला है। फर्जी कागजात के आधार पर सारा खेल हुआ है।

- अनिमेष भारती, आयुक्त व कोल मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार

Posted By: mritunjay

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