सीएमपीएफओ-डीएचएफएल निवेश घोटाला: 727 करोड़ के नुकसान की सीबीआई करेगी जांच, हाईकोर्ट का आदेश
झारखंड हाईकोर्ट ने सीएमपीएफओ द्वारा डीएचएफएल में किए गए निवेश से हुए 727.67 करोड़ रुपये के नुकसान की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया है।

सीएमपीएफओ में घोटाले की सीबीआइ जांच का आदेश। (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
सीएमपीएफओ-डीएचएफएल निवेश में 727.67 करोड़ रुपये का नुकसान।
झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का दिया निर्देश।
अधिकारियों की भूमिका और फाइल लौटाने पर भी होगी जांच।
जागरण संवाददाता, धनबाद। कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफओ) की ओर से दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) में किए गए निवेश से हुए 727.67 करोड़ रुपये के नुकसान की अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच करेगा।
गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कोल एम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन के संजीव श्रीवास्ताव की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया है।
मामले में सीएमपीएफओ की ओर से डीएचएफएल में किए गए बड़े निवेश और कंपनी की लगातार बिगड़ती वित्तीय स्थिति की जानकारी मिलने के बावजूद समय रहते पूरी रकम नहीं निकाल पाने को लेकर सवाल उठे हैं।
हाईकोर्ट के 10 सितंबर के आदेश में भी 727.67 करोड़ रुपये के नुकसान को गंभीर विषय माना गया था। अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम में संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए थे।
1,390 करोड़ के निवेश में हुआ 727 करोड़ का नुकसान
मामले से जुड़े अभिलेखों के अनुसार सीएमपीएफओ ने डीएचएफएल में करीब 1,300 करोड़ रुपये का निवेश किया था। वहीं, कोयला मंत्रालय से संबंधित लेखा अभिलेखों में निवेश की कुल राशि 1,390.25 करोड़ रुपये दर्ज है।
डीएचएफएल के खिलाफ नवंबर 2019 में दिवाला प्रक्रिया शुरू हुई थी और जून 2021 में समाधान योजना को मंजूरी मिली।
सितंबर 2021 में सीएमपीएफओ को 662.58 करोड़ रुपये वापस मिले। इसके बाद निवेश में करीब 727.67 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज हुआ।
याचिका में कहा गया है कि निवेश प्रबंधकों ने 24 जून 2019 को ही डीएचएफएल की वित्तीय स्थिति को लेकर खतरे का संकेत देते हुए निवेश निकालने की सलाह दी थी। इसके बावजूद समय रहते पूरी राशि नहीं निकाली जा सकी।
20 दिसंबर 2019 की बैठक में फंसी हुई राशि वापस लेने के लिए कदम उठाने का प्रस्ताव आया। इसके बाद 22 नवंबर 2021 को निवेश उपसमिति की बैठक में 727.67 करोड़ रुपये को बट्टे खाते में डालने का प्रस्ताव भी सामने आया।
कोयला मंत्रालय के लेखा परीक्षण संबंधी अभिलेखों में नुकसान की राशि को खातों में दर्ज नहीं किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई थी।
16 बार फाइल लौटने की भी होगी जांच
सीबीआई जांच का दायरा केवल डीएचएफएल में निवेश के फैसले तक सीमित नहीं रहेगा। कंपनी की कमजोर वित्तीय स्थिति की जानकारी मिलने के बाद भी समय पर निवेश क्यों नहीं निकाला गया, अधिकारियों और न्यासियों ने क्या निर्णय लिए तथा नुकसान के बाद रकम की वसूली के लिए क्या प्रयास किए गए, इसकी भी पड़ताल होगी।
मामले में फाइल कथित तौर पर 16 बार लौटाए जाने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। हालांकि उपलब्ध हाईकोर्ट आदेश में 16 बार फाइल लौटाए जाने के कारणों का विस्तृत उल्लेख नहीं है।
ऐसे में जांच में यह सामने आ सकता है कि फाइल हर बार क्यों लौटाई गई और उस दौरान क्या आपत्तियां या कमियां बताई गई थीं।
विभागीय जांच और कार्रवाई पर भी सवाल
हाईकोर्ट पहले ही यह सवाल उठा चुका है कि विभागीय जांच पूरी होने से पहले पूर्व सीएमपीएफओ आयुक्त को लगभग क्लीन चिट देने जैसी स्थिति कैसे बनी।
अदालत ने अगस्त में यह भी पूछा था कि मामले में प्राथमिकी या अन्य आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। संबंधित पक्षों से इस संबंध में शपथपत्र भी मांगा गया था।
अब सीबीआई जांच से डीएचएफएल में निवेश के निर्णय से लेकर नुकसान, जिम्मेदारी तय करने, राशि की वसूली के प्रयास और रकम को बट्टे खाते में डालने की प्रक्रिया तक पूरे घटनाक्रम की कड़ियां सामने आने की उम्मीद है।
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