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कोयला कंपनियों पर कैग की पैनी नजर, गुणवत्ता ढुलाई और कीमतों पर उठे सवाल

Published: Fri, 06 Nov 2026 10:06 PM (IST)

Coal India: कैग टीम ने कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनियों (सीसीएल, बीसीसीएल, ईसीएल) में कोयला उत्पादन, ढुलाई और गुणवत्ता मूल्यांकन की निष्पादन लेखापरीक्षा की है।

CCL क्षेत्र में कोयले की गुणवत्ता की जांच। (सांकेतिक फोटो)

CCL क्षेत्र में कोयले की गुणवत्ता की जांच। (सांकेतिक फोटो)

जागरण संवाददाता, धनबाद। कोयला उत्पादन, परिवहन व्यवस्था और कोयले की गुणवत्ता के आकलन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की टीम ने मगध एवं संघमित्रा क्षेत्र का दौरा किया।

कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनियों में कोयला उत्पादन से लेकर उसकी ढुलाई, गुणवत्ता परीक्षण और मूल्यांकन तक की प्रक्रिया की निष्पादन लेखापरीक्षा (परफार्मेंस ऑडिट) की जा रही है।

इसी सिलसिले में कैग की टीम ने खदानों और संबंधित सुविधाओं का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसी कड़ी में टीम सीसीएल पहुंच चुकी है। इसके बाद झारखंड के अन्य कोयला कंपनियों को भी दौरा करेगी। इसमें बीसीसीएल , ईसीएल भी शामिल है।

टीम में अपर उप नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक श्री बीडी परमार और भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कार्यालय, कोलकाता क्षेत्र के निदेशक श्री आदर्श अग्रवाल शामिल थे।

दौरे के दौरान अधिकारियों ने क्षेत्र में संचालित खदानों, कोयला परिवहन व्यवस्था, रेलवे साइडिंग और गुणवत्ता परीक्षण से संबंधित सुविधाओं का निरीक्षण किया। खदानों से निकलने वाले कोयले की गुणवत्ता, उसके परिवहन और निर्धारित मानकों के अनुरूप आकलन की व्यवस्था को भी देखा।

कैग की मौजूदा लेखापरीक्षा ऐसे समय हो रही है, जब बीसीसीएल में पहले भी कोयला उत्पादन, परिवहन, वाशरी संचालन और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कई मामलों में ऑडिट आपत्तियां सामने आ चुकी हैं। कैग की रिपोर्ट संख्या 18, वर्ष 2025 में बीसीसीएल की नई वाशरियों के निर्माण और संचालन में कई कमियां उजागर की गई थीं।

रिपोर्ट के अनुसार, पाथरडीह-वन, दहीबाड़ी और मधुबन वाशरी के निर्माण में निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं होने से ठेकेदारों को करीब 22.24 करोड़ रुपये का मुआवजा देना पड़ा।

पाथरडीह-वन वाशरी में बोगी ओपन बॉटम रैपिड (बीओबीआर) ट्रैक हॉपर सिस्टम के निर्माण से संबंधित कमियों के कारण वाशरी की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो सका। कैग ने इससे 371.33 करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व अर्जित करने का अवसर प्रभावित होने की बात कही थी।

इसी तरह दहीबाड़ी वाशरी को निर्धारित मात्रा में कच्चा कोयला उपलब्ध नहीं कराने के कारण 36.18 करोड़ रुपये के प्रतिबद्धता शुल्क का भुगतान करना पड़ा। इसके अलावा 113.32 करोड़ रुपये के संभावित अतिरिक्त राजस्व का अवसर भी प्रभावित हुआ।

कैग ने वाशरियों की क्षमता का बेहतर उपयोग करने के लिए पर्याप्त मात्रा और गुणवत्ता वाला कोयला उपलब्ध कराने की अनुशंसा की थी।
कोयले की कीमत और गुणवत्ता के आकलन पर भी सवाल

बीसीसीएल और सीसीएल से जुड़े कोयले की कीमत तथा गुणवत्ता निर्धारण का मामला भी पहले कैग की जांच के दायरे में आ चुका है। कैग की रिपोर्ट संख्या 10, वर्ष 2025 में सेल को कोयला आपूर्ति और गुणवत्ता में ग्रेड स्लिपेज के आधार पर कीमतों में समायोजन का मुद्दा उठाया गया था।

रिपोर्ट में सीसीएल के मामले में वर्ष 2021-22 तक ग्रेड स्लिपेज के कारण 349.28 करोड़ रुपये की वसूली नहीं होने का उल्लेख किया गया था।

ऑडिट के अनुसार, तीसरे पक्ष से गुणवत्ता परीक्षण और कीमत में समायोजन की व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी। रिपोर्ट में बीसीसीएल की आपूर्ति के मामले में भी कोयले की गुणवत्ता और कीमत के समायोजन से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख किया गया था।

इसके अलावा बीसीसीएल की वाशरियों में पड़े रिजेक्ट कोयले के मूल्यांकन को लेकर भी हाल में सवाल उठे हैं। पुराने स्टॉक का पुनर्मूल्यांकन कर करीब 135.15 करोड़ रुपये की इन्वेंटरी में शामिल किए जाने पर ऑडिट ने मूल्यांकन का आधार स्पष्ट करने को कहा है। अलग-अलग लॉट के लिए निर्धारित दरों और वास्तविक बिक्री से प्राप्त कीमत के बीच अंतर भी जांच का विषय बना है।

ईसीएल में ढुलाई के दौरान कोयले की कमी पर भी आपत्ति

कोयला परिवहन में गड़बड़ी का मामला सिर्फ बीसीसीएल तक सीमित नहीं रहा है। ईसीएल के चितरा ओपनकास्ट प्रोजेक्ट से जामताड़ा रेलवे साइडिंग तक कोयला ढुलाई के दौरान कमी पाए जाने के मामले में भी कैग ने आपत्ति दर्ज की थी।

रिपोर्ट संख्या 12, वर्ष 2024 में अप्रैल 2017 से मार्च 2022 के बीच परिवहन के दौरान कोयले की कमी के लिए ठेकेदार से निर्धारित राशि की वसूली नहीं किए जाने पर 17.39 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का उल्लेख किया गया था।

इन मामलों से स्पष्ट है कि कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनियों में कोयले की गुणवत्ता, सही मूल्यांकन, परिवहन में होने वाली कमी और अनुबंधों के पालन जैसे विषय लगातार ऑडिट के केंद्र में रहे हैं।

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