संवाद सहयोगी, लोयाबाद। धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन के बांसजोड़ा स्टेशन के समीप बुधवार की रात सिग्नल बाक्स से 21 रिले डिवाइस चोरी हो गई। इसकी कीमत करीब 30 हजार रुपये आंकी गई है। आरपीएफ मामले की जांच में जुट गई है। रिले डिवाइस चोरी हो जाने से सिग्नल फेल कर गया, जिससे मौर्य एक्सप्रेस व वनांचल एक्सप्रेस और दुमका इंटरसिटी सहित आठ माल गाड़ियों को पेपर से पास कराया गया। सिग्नल फेल होते ही महकमे में हलचल मच गई। रात में ही आरपीएफ और रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंच गए और रुकी हुई ट्रेनों को पेपर के माध्यम से पास कराया। गाड़ियों को इधर से गुजरने में काफी परेशानी और विलंब हुआ।

जांच में सामने आई चोरी

नया रिले लगाने के बाद सिग्नल ने काम करना शुरू कर दिया। करीब तीन घंटे से अधिक समय तक सिग्नल फेल रहा। कर्मियों को रात करीब दो बजे सिग्नल फेल होने का पता चला था। स्टेशन मास्टर सुब्रतो कर्मकार द्वारा अधिकारियों को उक्त घटना की जानकारी दी गई। सिग्नल विभाग के अधिकारी सहित अन्य रेलवे व आरपीएफ अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे। कर्मियों ने पहले तकनीकी खराबी आने की बात समझा। जांच के दौरान पता चला कि एलओसी बाक्स नंबर नौ से छह पिस बाक्स नंबर 10 से सात पिस व बाक्स नंबर 10/2 से आठ पीस रिले गायब है।

बाक्स का ताला खोले बिना रिले की चोरी

बांसजोड़ा रेलवे स्टेशन के पास तीन रिले बाक्स लगा हुआ है। तीनों में ताला लगा हुआ था। जांच के दौरान भी ताला लगा हुआ ही पाया गया। चाबी से ताला खोले जाने के बाद रेलवे अधिकारी आश्चर्यचकित रह गए। बाहर से ताला लगा था और अंदर से रिले गायब था। घटना से लोग चकित थे। अपराधियों द्वारा बक्सों को बिना कोई छेड़छाड़ किए कैसे रिले चोरी कर ली यह समझ से परे था।

रेलवे कर्मी संदेह के घेरे में

बंद बाक्सों से रिले डिवाइस की चोरी हो जाने पर रेल कर्मी संदेह के घेरे में हैं। आरपीएफ और क्राइम इंटेलीजेंस ब्रांच के अधिकारियों का मानना है कि बाक्स को न तोड़ा और न ही किसी तरह से छेड़छाड़ की गई है, फिर चोरी कैसे हुई ? जिस तरह से चोरी की घटना को अंजाम दिया गया है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि चोरी करने वाले के पास चाबी थी।

रेल कर्मियों और आरपीएफ के बीच नोकझोंक

सुबह में जब आरपीएफ और क्राइम इंटेलीजेंस ब्रांच के अधिकारी घटना स्थल पहुंचे। जांच पड़ताल के क्रम में कर्मियों से पूछताछ के दौरान दोनों के बीच नोकझोंक हो गई। जांच कर रहे अधिकारियों को बंद बाक्स से रिले डिवाइस की चोरी हो जाना गले से नीचे नहीं उतर रहा था। रेल कर्मियों का कहना था कि इससे पहले भी चोरी की घटना घटी थी।

सुरक्षा के लिए आरपीएफ जवानों की रहती है तैनाती

बांसजोड़ा और गडे़रिया के बीच सुरक्षा करने के लिए आरपीएफ जवानों की ड्यूटी रहती है। दो बजे अपराधियों के द्वारा घटना का अंजाम दिया गया। यदि जवान ड्यूटी पर होते तो जरूर चोरों पर नजर पड़ी होती। इससे साफ पता चलता है कि जवानों द्वारा भी ड्यूटी में लापरवाही बरती गई है। इस इलाके में पहले भी केबल और रियल मानीट¨रग सिस्टम की चोरी घटना घट चुकी है।