डॉक्टर सिर्फ डिग्री नहीं, सेवा और संवेदना को बनाएं अपना धर्म; देवघर एम्स के दीक्षा समारोह में बोले उप राष्ट्रपति
AIIMS Deoghar Convocationः उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने एम्स देवघर के दीक्षा समारोह में डॉक्टरों से कहा कि वे केवल ...और पढ़ें

AIIMS Deoghar Convocation में मंचासीन उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार व अन्य। (फोटो जागरण)
HighLights
डॉक्टरों को निष्ठा, ईमानदारी और दया से सेवा करनी चाहिए।
विकसित भारत के लक्ष्य में स्वास्थ्य व्यवस्था अहम कड़ी है।
एम्स देवघर पूर्वी भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
जागरण संवाददाता, देवघर। AIIMS Deoghar Convocation: एम्स देवघर में शनिवार को आयोजित दूसरे दीक्षा समारोह में उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने छात्रों, चिकित्सकों और उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि डॉक्टर जरूरतमंद लोगों का सबसे बड़ा भरोसा हैं, क्योंकि समय पर दूसरों का जीवन उनके हाथ में होता है।
इसलिए जरूरी है कि वे सिर्फ डॉक्टर की डिग्री हासिल न करें, बल्कि अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन पूरी निष्ठा, ईमानदारी और दया के भाव के साथ करें।
PM Modi के लक्ष्य में स्वास्थ्य व्यवस्था अहम कड़ी
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 में विकसित भारत का जो लक्ष्य तय किया है, उसमें स्वास्थ्य व्यवस्था एक अहम कड़ी है। कोई भी शिक्षा समाज को सीधे तौर पर उतना लाभ नहीं दे सकती, जितना एक डॉक्टर दे सकता है।
एम्स जैसी संस्थाओं की प्रधानमंत्री की विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में अहम भूमिका है। इस दिशा में लगातार महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।
देवघर समेत देश के 12 स्थानों पर चल रहे एम्स
छोटे शहरों और गांवों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में देवघर एम्स जैसी संस्थाओं की अहम भूमिका है। आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए ही देवघर सहित अन्य स्थानों पर 12 नए एम्स बनाए गए।
ये संस्थान क्षेत्र के विकास और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। पहले एम्स में इलाज कराने के लिए लोगों को दिल्ली जाना पड़ता था, लेकिन अब देवघर आकर भी लोग बेहतर इलाज करा सकते हैं।
एमबीबीएस की सीटें 51 हजार से बढ़कर हो गईं 1.39 लाख
उन्होंने कहा कि देश में पहले एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए 380 मेडिकल कॉलेज थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 846 हो गई है। पहले एमबीबीएस की कुल 51 हजार सीटें थीं, जो अब बढ़कर 1.39 लाख हो गई हैं।
पहले देश में पीजी की पढ़ाई के लिए 31 हजार सीटें थीं, जो बढ़कर 86 हजार हो गई हैं। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देश की जनता की बुनियादी जरूरत हैं।
डाक्टरी की पढ़ाई में लड़कियों की बढ़ती संख्या खुशी की बात
डॉक्टरी की पढ़ाई में लड़कियों की बढ़ती रुचि और उनकी अधिक संख्या देखकर उन्होंने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह महिला सशक्तीकरण को दर्शाता है।
आधुनिक युग में तकनीक, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक चाहे कितनी भी तरक्की कर ले, लेकिन वह मानवीय स्पर्श की जगह नहीं ले सकती।
उन्होंने देश की आजादी में भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू और तिलका मांझी के त्याग एवं योगदान को याद करते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने हमें साहस, स्वाभिमान, हौसले और जज्बे का पाठ पढ़ाया।
इलाज के साथ शोध के क्षेत्र में अहम भूमिका
देवघर एम्स का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान इलाज के साथ-साथ शोध के क्षेत्र में भी अहम भूमिका निभा रहा है। आने वाले समय में यह देवघर और झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
उन्होंने नर्सिंग और पैरामेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि वे समाज में उपचार के क्षेत्र की पहली और अहम कड़ी हैं।
नशा न करने का लें संकल्प
उन्होंने कहा कि बाबा बैद्यनाथ की नगरी में आना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने छात्रों से अपने शिक्षकों और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए सभी से तालियां बजाने को कहा। साथ ही, उन्होंने उपस्थित लोगों को नशा न करने का संकल्प भी दिलाया।
इस अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे, राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा, देवघर के विधायक सुरेश पासवान, एम्स देवघर की अध्यक्ष एमवी पद्मा श्रीवास्तव और एम्स देवघर के निदेशक सह सीईओ प्रो. डॉ. नितिन एम. गंगने उपस्थित थे।
