झारखंड के 24 जिलों के लिए एक ही फूड टेस्टिंग लैब, जांच रिपोर्ट आने में लग रहा एक महीना
Deoghar Food Safety: खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के बावजूद, राज्य में केवल एक लैब होने के कारण सैंपल रिपोर्ट में एक महीने की देरी होती है।

Deoghar Food Safety: दुकान से खाद्य सुरक्षा के सैंपल लेते खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी। (फाइल फोटो)
HighLights
झारखंड में एक लैब से खाद्य जांच में देरी होती है।
देवघर में 61 खाद्य लाइसेंस निलंबित किए गए हैं।
सावन में भारी मात्रा में एक्सपायर्ड सामग्री नष्ट की गई।
जागरण संवाददाता, देवघर। Deoghar Food Safety: उद्देश्य है लोगों को स्वच्छ वातावरण में शुद्ध, गुणवत्तायुक्त खाद्य सामग्री मिले। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी व कर्मियों की टीम भी इस दिशा में सक्रिय भी है। लगातार कार्रवाई भी की जा रही है।
जांच के दौरान मिलावट होने के संदेह पर सैंपल भी लिया जा रहा है। जांच के लिए लैब भी भेजा जा रहा है । लेकिन रिपोर्ट मिलते-मिलते कम से कम एक महीने का वक्त लग ही जाता है। वजह साफ है। राज्य के सभी 24 वो जिला की निर्भरता केवल एक लैब पर है।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि रिपोर्ट में देरी होगी तो इस आधार पर होने वाली कार्रवाई भी स्वत: देर होगा। केवल देवघर जिला से माह अप्रैल से अक्टूबर 2026 तक कुल 36 सैंपल को जांच के लिए भेजा गया था।
जिसमें से केवल 21 सैंपल का रिपोर्ट प्राप्त हुआ। जिसमें 11 को मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया है । इन 11 में से छह सब-स्टैंर्ड श्रेणी के थे। सभी को नोटिस भेजा गया है।
61 लाइसेंस को किया गया निलंबित
विभाग की ओर से प्राप्त नोटिस सहित कार्रवाई के दौरान मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर ना केवल नोटिस थमाती है बल्कि लाइसेंस को भी निलंबित कर देती है। इस बाबत खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी सुबीर रंजन ने बताया कि माह अप्रैल से 10 नवंबर तक कुल 61 लाइसेंस को निलंबित किया गया है।
लाइसेंस को निलंबित करने की कई वजह होती है। जिसमें अधिकांश प्रतिष्ठान संचालकों द्वारा आनलाइन के माध्यम से लाइसेंस प्राप्त करने के लिए गलत जानकारी देते है। लाइसेंस प्राप्त करने के बाद कारोबार शुरू कर दिया जाता है। हालांकि आनलाइन से प्राप्त लाइसेंस की बाद में जांच की जाती है।
जांच के दौरान ऐसे मामले सामने आने के बाद लाइसेंस को निलंबित कर दिया जाता है। वहीं निर्गत लाइसेंस को नियमानुसार प्रतिष्ठान में प्रदर्शित नहीं करने की वजह से भी निलंबित कर दिया जाता है।
ऐसे सभी मामलों में प्रतिष्ठान संचालकों को नोटिस निर्गत कर सात दिनों का समय दिया जाता है। इस अवधि के दौरान उन्हें अपनी दस्तावेजों में सुधार व नियमों का पालन करना सुनिश्चित करना होता है। इस तरह के मामले में सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का भी प्रावधान है।
सावन माह में की गई कार्रवाई
सावन माह के दौरान फूड सेफ्टी टीम द्वारा लगातार कार्रवाई की गई थी। जिसमें बड़ी मात्रा में एक्सपायर सामग्री को वापस भेजवाया था और मौके पर ही नष्ट कराया था।
विभाग की टीम द्वारा नष्ट कराए गए सामग्री में 45 किलोग्राम घी, तीन किलोग्राम पकौड़ा, 276.5 किलोग्राम हल्दी, 136 किलोग्राम छोला व सब्जी, पांच लीटर सास, 300.5 किलोग्राम पेड़ा, 24 बोतल एक्सपायर्ड एनर्जी ड्रिंक्स, चार पैकेट चना मसाला, 3.5 किलोग्राम बालूशाही, दो किलोग्राम नारियल लड्डू, एक लीटर दूध, दो केन एक्सपायर्ड डायट कोक,चार लीटर सोया सास, दो पैकेट ब्रेड, 36 किलोग्राम लड्डू , एक किलोग्राम एक्सपायर्ड मसाला, पांच किलोग्राम चना दाल, आठ किलोग्राम बर्फी, एक किलोग्राम काजू, नौ किलोग्राम बना हुआ दाल, नौ लीटर इस्तेमाल किया हुआ तेल, 20 किलोग्राम रसगुल्ला, दो किलोग्राम चटनी सहित एक सौ किलोग्राम पेड़ा को ट्रेन के माध्यम से वापस बिहार भेजा गया।
616 प्रतिष्ठानों की हुई थी जांच
कार्रवाई के दौरान टीम द्वारा कुल 616 प्रतिष्ठानों की जांच की गई थी। इस दौरान 91 खाद्य सामग्री गलत पाए गए थे। जिसमें से 15 सैंपल को कलेक्ट किया गया था। वहीं 279 लाइसेंस निर्गत किए गए थे। जबकि लाइसेंस रिन्युअल नहीं करने के मामले में 13 हजार पांच सौ रुपये बतौर जुर्माना वसूला गया।
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