श्रीश्री ठाकुर अनुकूल चंद्र का 70वां आगमन दिवस आज
देवघर : श्रीश्री ठाकुर अनुकूलचंद्र दो सितंबर देवघर आए थे। तभी से इस दिन को भव्य तरीके से मनाया जाता
देवघर : श्रीश्री ठाकुर अनुकूलचंद्र दो सितंबर देवघर आए थे। तभी से इस दिन को भव्य तरीके से मनाया जाता है। बुधवार को 70वां शुभागमन दिवस पर भव्य शोभा यात्रा निकाली जाएगी। सारी तैयारी आश्रम प्रबंधन की ओर से पूरी कर ली गयी है। इसको लेकर आश्रम में उत्साह का माहौल है। बंगाल, बिहार, झारखंड, दिल्ली समेत विभिन्न प्रांतों से अनुयायियों का आना जारी है। आश्रम को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है। आगमन दिवस को लेकर मंगलवार को सुबह 7.30 बजे शोभा यात्रा आश्रम से निकलेगी। यह विभिन्न मार्ग का भ्रमण करते हुए बैद्यनाथधाम स्टेशन होकर वापस आश्रम पहुंचेगी। इसके बाद वहां कई अनुष्ठान होंगे। पूरा सत्संग नगर अनुयायियों से पट चुका है। अनुयायियों के ठहरने व खाने पीने के लिए सत्संग में विशेष व्यवस्था की गयी है।
देश के विभाजन की पीड़ा ने पहुंचाया देवघर: श्रीश्री ठाकुर के देवघर आगमन के पीछे एक लंबा इतिहास है। भारत माता के विखंडन की असहनीय पीड़ा ने उन्हे देवघर पहुंचाया। आजाद भारत के पहले की बात है कि मुस्लिम लीग की स्थापना हुई तथा भारत को दो भागों में विभाजित करने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय ने अनुकूलचंद्र को पूरी तरह से तोड़ दिया। अचानक उनका रक्तचाप बढ़ गया। इलाज के लिए कोलकाता से डॉक्टर बुलाए गए। डॉक्टरों ने स्वास्थ्य में सुधार के लिए उन्हे स्थान परिवर्तन की सलाह दी। उस समय ठाकुर अनुकूलचंद्र बांग्लादेश के पावना जिले में सपरिवार रहते थे। डॉक्टर की सलाह पर ठाकुर जी के भक्त प्रकाश वसु व राजेन मजुमदार देवघर घूमने आए तथा यहां सत्संगी गुरुभाई सुरेन सेन से मुलाकात की। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती ने उन लोगों को इस कदर आकर्षित किया कि वह सुरेन बाबू व यहां के मन्मथों दास के साथ बम्पास टाउन, पुरनदाहा, कास्टर टाउन, बिलासी, बेलाबगान आदि स्थानों में ठाकुर जी के इच्छानुसार रहने का ठिकाना ढूंढने लगे। अंतत: रोहिणी रोड स्थित बड़ाल बंगला को ठाकुर जी के रहने के लिए पसंद किया गया। प्रकाश वसु एवं राजेन मजुमदार ने पावना लौटकर ठाकुर जी को सारी बातें बतायी। कोलकाता में बड़ाल बंगला के मालिक से मिले तथा मकान मालिक ने 31 अगस्त 1946 को 80 रुपये मासिक किराया पर मकान देने की बात कही। ठाकुर जी ने मर्जी के अनुकूल सितंबर माह की पहली, तीसरी व छठी तिथि को देवघर आगमन के लिए उपयुक्त चुना। रेलवे के तत्कालीन व्यावसायिक प्रबंधक मिस्टर मजुमदार से 1 सितंबर को एक डब्बा ईश्वरदी स्टेशन में देने के लिए अनुरोध किया गया। कहा गया कि यह नैहाटी होकर बैंडेल स्टेशन पर जाएगी एवं कोलकाता से एक अन्य डब्बा रिजर्व होकर मुगलसराय पैसेंजर से आएगा। बैंडल स्टेशन में गाड़ी बदल कर डिब्बे को जसीडीह स्टेशन तक आने वाली गाड़ी में जोड़ दिया जाएगा और जसीडीह में इसे बैद्यनाथधाम जाने वाली गाड़ी में जोड़ दिया जाएगा। तय कार्यक्रम के अनुसार अनुकूल चंद्र ठाकुर 70 भक्तों व पारिवारिक सदस्यों के साथ 1 सितंबर को पावना से देवघर के लिए रवाना हुए। 2 सितंबर 1946 की सुबह आठ बजे सभी बैद्यनाथधाम स्टेशन पहुंचे। इसी याद को आश्रम में हर साल आगमन दिवस के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है।
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अनुष्ठान
- सुबह 5:29 बजे : ठाकुर बंगला में सामूहिक प्रार्थना
- सुबह 7:30 बजे : शोभा यात्रा
- शाम 5:46 बजे : ठाकुर-बंगला में सामूहिक प्रार्थना
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