पंद्रह साल से फरार कुख्यात अशोक राय गिरफ्तार, व्यवसायियों से वसूलता था रंगदारी
कुख्यात अशोक राय रांची, रामगढ़ व बोकारो समेत अन्य जिलों के व्यवसायियों से रंगदारी वसूल रहा था।
जागरण संवाददाता, बोकारो। बीते पंद्रह वर्षों से बोकारो पुलिस को लगातार चकमा देना वाला कुख्यात अशोक राय पुलिस के हत्थे चढ़ गया। एसपी कार्तिकएस को मिली गुप्त सूचना के बाद जिले की पुलिस टीम ने इसे पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्थित कदमतल्ला से गिरफ्तार किया। जिले में अभी तक इसके खिलाफ आधा दर्जन संगीन मामले दर्ज होने की बात सामने आ रही है। इनमें हत्या व रंगदारी के मामले भी शामिल हैं। गुरुवार की शाम अपने कार्यालय कक्ष में एसपी ने पत्रकारों को बताया कि अशोक राय रेलवे का ठेका मैनेज करता था तो बोकारो स्टील प्लांट व सीसीएल में स्क्रैप के ऑक्सन में भी प्रति टन रंगदारी वसूल रहा था।
पहले यह धूमल सिंह के काम करता था तो वर्तमान में कुख्यात राजेश सिंह के साथ मिलकर गुंडा टैक्स वसूलने का काम कर रहा था। वाराणसी के लंका थाना स्थित चितरपुर का रहने वाले इस अपराधी को अदालत कई मामलों में फरार घोषित कर चुकी थी। इसकी गिरफ्तारी में सीसीआर डीएसपी रजत माणिक बाखला, बालीडीह थानेदार सह संगठित अपराध कोषांग के प्रभारी इंस्पेक्टर कमल किशोर, सेक्टर बारह थाना इंचार्ज अनिल कुमार सिंह, सियालजोरी के दारोगा रंजीत कुमार और एसपी की क्यूआरटी टीम का सराहनीय योगदान रहा।
रांची, रामगढ़ व बोकारो के व्यवसायियों से वसूल रहा था रंगदारी
एसपी ने बताया कि कोलकाता के महंगे होटलों में ठहरकर यह अपने गिरोह को संचालित कर रहा था। रांची, रामगढ़ व बोकारो समेत अन्य जिलों के व्यवसायियों से यह लगातार रंगदारी वसूल रहा था। पुलिस को चकमा देने के लिए यह अपराधी लगातार अपना ठिकाना बदल लेता था।
लोहा व्यवसायी अशोक चौधरी हत्याकांड समेत अन्य मामलों का है वॉन्टेड है
वर्ष 2004 में सिटी थाना इलाके के एलोरा हॉस्टल के पास हुई लोहा व्यवसायी अशोक चौधरी हत्याकांड में इसकी तलाश पुलिस को थी। चौधरी की हत्या रंगदारी देने से इनकार करने पर कर दी गई थी। लोहा व्यवसायी एसएन सिंह से रंगदारी मांगने के मामले में भी पुलिस को इसकी तलाश थी। इन मामलों के अलावा अन्य रंगदारी के मामले में भी पुलिस इसकी खोज में जुटी हुई थी। हालांकि इन सभी मामलों में बाहुबली विधायक धूमल समेत अन्य आरोपी अदालत से रिहा हो चुके हैं।
3 हजार टन के स्क्रैप की नीलामी मैनेज करने में जुटा था अशोक
रेलवे ठेकेदारों व लोहा व्यवसायियों में भय का पर्याय बने अशोक राय की गिरफ्तारी पुलिस के एक बड़ी चुनौती थी। इस अपराधी की फोटो तक पुलिस के पास बीते पंद्रह साल से नहीं थी। कई बार पुलिस के हाथ से यह फिसल चुका था तो फोटो व पहचान के अभाव में बोकारो पुलिस की टीम को वर्ष 2005 में यूपी के वाराणसी में फजीहत झेलनी पड़ी थी। उस समय इस अशोक की जगह पुलिस ने दूसरे अशोक को धर दबोचा था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि कुछ टेंडर को इन लोगों ने मैनेज भी किया। प्रत्येक टन पांच सौ रुपये की वसूली भी होने लगी। कोलकाता में सीसीएल का 3 हजार टन लोहा की नीलामी का टेंडर होने वाला था।
इसी को मैनेज करने के लिए अशोक राय हावड़ा में जाकर रूका था। यहां राजेश भी आने वाला था। एसपी तक यह सूचना पहुंची तो उन्होंने तुरंत यहां पुलिस की टीम को मौके पर भेजा। राजेश तो नहीं मिला, लेकिन अशोक राय पुलिस के हत्थे चढ़ गया। बताया जा रहा है कि कई बार धोखा खा चुकी बोकारो पुलिस के वर्तमान कप्तान ने अशोक राय के हुलिया से लेकर अन्य सटीक जानकारियां पहले ही जुटा ली थीं। अशोक की गिरफ्तारी के बाद इसके खिलाफ पुलिस कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। संभव है इसके स्थानीय लिंक तक भी पुलिस बहुत जल्द पहुंच जाए।
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