Bokaro: मिट्टी का अनोखा तेनुघाट डेम बना पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र, जानें इसकी खासियतें
बोकारो जिले के बेरमो उपखण्ड के तेनुघाट स्थित विशालकाय जलाशय व मिट्टी का डैम यहां के पिकनिक स्पाट में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। यह डेम समुद्र का फील करवाता है। तेनुघाट में वर्ष-1973 में स्थापित यह मिट्टी के तटबंधों वाला एशिया का सबसे बड़ा बांध है।

जागरण संवाददाता, बोकारो: बेरमो उपखण्ड के तेनुघाट स्थित विशालकाय जलाशय व मिट्टी का डैम यहां के पिकनिक स्पाट में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। यहां डैम के जलाशय में एकत्रित अथाह पानी जहां समुद्र के दर्शन का अहसास कराता है, वहीं डैम के फाटक से गिरते पानी से झरने के नजारे का भी आनंद मिलता है। तेनुघाट में वर्ष-1973 में स्थापित यह मिट्टी के तटबंधों वाला एशिया का सबसे बड़ा बांध है। दूर-दूर से लोग इस डैम की खूबसूरती व आसपास की प्राकृतिक छटा को निहारने अक्सर आते हैं।
पर्यटकों के लिए बोटिंग की भी व्यवस्था
बता दें दिसंबर के अंतिम सप्ताह और जनवरी माह में नववर्ष के स्वागत को पिकनिक करने वालों का यहां तांता लगा रहता है। बरसात के मौसम में इस डैम के जलाशय में क्षमता से अधिक पानी जमा हो जाने पर जब फाटकों को खोला जाता है, तब उससे तेजी से गिरते झागदार पानी के नजारे को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। तेनुघाट के जलाशय में पर्यटकों के लिए बोटिंग की भी व्यवस्था की गई है। बोट से जलाशय के बीच जाकर लोग उसके मनोरम दृश्य को निहारने का आनंद उठाते हैं।
डेम तक कैसे पहुंचे?
तेनुघाट डैम बेरमो अनुमंडल कार्यालय से सटा हुआ है। बोकारो जिले से इसकी दूरी करीब 70 किलोमीटर है, सड़क मार्ग से यहां सीधे पहुंचा जा सकता है। वहीं बेरमो प्रखंड कार्यालय से इसकी दूरी करीब 35 किलो मीटर के आस-पास है। दो व चार पहिया दोनों वाहनों से तेनुघाट डैम तक सीधे पहुंच सकते हैं। अनुमंडल मुख्यालय होने से यहां हर वक्त चहल पहल रहती है।
224 क्यूसेक जल संचय किया जाता है
तेनु डैम के जलाशय की गहराई 180 फीट और परिधि 16000 फीट है, जिसमें 224 क्यूसेक जल संचय एक साथ किया जाता है। इस डैम का निर्माण बोकारो स्टील प्लांट एवं बोकारो शहर में जलापूर्ति के लिए किया गया। वहीं, ललपनिया में तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन की स्थापना की गई तो तेनु डैम का पानी विद्युत उत्पादन में सहायक सिद्ध हो रहा है।
यह सावधानी बरतें
पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि जब भी तेनुडैम जाएं तो सावधानी जरूर बरतें। जब भी डैम से जुड़ी दामोदर नदी में जलप्रवाह तेज हो तो उसमें न तो नहाएं और न ही करीब जाएं। क्योंकि तब तेनु डैम से जुड़ी दामोदर नदी में जलधारा इस कदर तीव्र रहती है कि दूर तक बहा ले जाती है। आए दिन यहां नदी में डूब जाने या बह जाने की घटना घटती रहती है। इसलिए यहां की नयनाभिराम छटा को निहारने व पिकनिक मनाने जरूर जाएं, लेकिन डैम के जलाशय व नदी की जलधारा में जाने से परहेज करें। ऐसा करना खतरनाक हो सकता है।
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