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    डोभा निर्माण बना अभियान

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    Updated: Mon, 27 Jun 2016 10:59 PM (IST)

    बेरमो : वर्षा जल संरक्षण को सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी योजना डोभा निर्माण में लक्ष्य के करीब पहुंच कर

    बेरमो : वर्षा जल संरक्षण को सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी योजना डोभा निर्माण में लक्ष्य के करीब पहुंच कर जिला प्रशासन ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि जिले में प्रथम चरण के निर्धारित लक्ष्य से महज 14 फीसद डोभा ही नहीं बन पाये। इसमें अधिकांश में भूमि संबंधी अड़चनों को रेखांकित किया गया है। जाहिर है कि प्रशासनिक सक्रियता के कारण 86 फीसद डोभा बन कर तैयार हो गया। सरकार ने इसी सप्ताह मैट्रिक और इंटर में खराब प्रदर्शन करने वाले स्कूलों की पहचान कर वहां के शिक्षकों पर विभागीय कार्रवाई का निर्देश सभी जिला प्रशासन को दिया है। इसी तर्ज पर डोभा निर्माण में कोताही बरतने वालों को पूर्व में ही सरकार ने कड़ा अल्टीमेटम दे रखा था। सरकार के कड़े रूख का फलाफल भी दिखा। डोभा निर्माण की मियाद 25 जून को पूरी हो गयी, लिहाजा अब अधूरे निर्माण कार्यों को अक्टूबर माह के बाद अभियान के तौर पर लेकर फिर से शुरू करने का विभागीय आदेश जारी कर दिया गया है। प्राप्त आंकड़े के अनुसार बेरमो अनुमंडल क्षेत्र के नावाडीह प्रखंड में भूमि संरक्षण विभाग की ओर से 618 और मनरेगा से 352 डोभा बन कर तैयार हैं। बेरमो प्रखंड ने भी शत प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। यहां मनरेगा से 80 और भूमि सरंक्षण से 59 डोभा बन कर तैयार हैं। 9 डोभा जमीन का एनओसी नहीं मिलने से लंबित है। इसी तरह गोमिया प्रखंड से 534 डोभा मनरेगा से बने हैं। यहां भूमि संरक्षण विभाग से 678 डोभा पूर्ण किया गया है। चंद्रपुरा प्रखंड में मनरेगा से लक्ष्य से अधिक डोभा बनाया गया है। यहां लक्ष्य 150 था जबकि 170 डोभा का निर्माण कार्य पूर्ण कराया गया। जबकि भूमि संरक्षण विभाग से 293 डोभा बनाए गये हैं। पेटरवार प्रखंड में डोभा निर्माण की उपलब्धि उत्साहजनक है। यहां कुल 264 डोभा पूर्ण करा लिये गये हैं।

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    प्रथम चरण में प्रति गांव 5-5 डोभा :

    मनरेगा और भूमि संरक्षण विभाग की ओर से इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह के बाद राज्य सरकार ने वर्षा जल संरक्षण की दिशा में अभिनव प्रयोग करते हुए डोभा निर्माण का निर्णय लिया। प्रथम चरण में प्रत्येक राजस्व ग्राम में प्राथमिकता के साथ पांच-पांच डोभा के निर्माण का लक्ष्य रखा गया। इसे गांव में किसानों की जमीन पर बनाते हुए उनका मालिकाना हक भी संबंधित किसान को प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। इसके द्वितीय चरण में प्रति गांव 20-20 डोभा के निर्माण का लक्ष्य है। 25 जून तक यदि कोई डोभा पूर्ण नहीं हो पाया है तो शेष अधूरे कार्य को अक्टूबर माह से फिर से शुरू करने का प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। इसके लिए प्रखंड महकमा व भूमि संरक्षण विभाग को विशेष हिदायत दी गयी है। सरकार ने निर्मित डोभा में मत्स्य पालन और पौधरोपण के लिए भी लाभुकों को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। डोभा निर्माण के तीन मॉडल आकार हैं। इसमें 20 गुना 20 गुना 10 फीट अधिक कारगर है। इसकी लागत 22 हजार से अधिक आती है। वहीं अधिकतम लागत वाले डोभा एक लाख रुपये से अधिक में बनते हैं।

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    वर्जन

    डोभा निर्माण अब गांव स्तर पर अभियान बन चुका है। लोगों में इसको लेकर काफी जागरूकता आयी है। निश्चित रूप से आने वाले दिनों में यह जल संरक्षण के लिए प्राकृतिक रूप से वरदान साबित होगा। गांव के किसान डोभा को लेकर अधिक उत्साहित भी है। छोटे आकार के कारण इसकी उपयोगिता सीमित किसानों के लिए अधिक होगा। आने वाले दिनों में प्रत्येक गांव में 20-20 डोभा का निर्माण कराये जायेंगे। इसमें मत्स्य पालन और पौधरोपण को लेकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है।

    - रामलखन गुप्ता, उपविकास आयुक्त, बोकारो।