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रियासी हमले के बाद अब दुनिया देखेगी भारत की ताकत, आर्च पुल से इस महीने दौड़ेगी ट्रेन, अमरनाथ यात्रियों के लिए बनेगा आकर्षण का केंद्र

Reasi Terrorist Attack रियासी हमले के बाद दुनिया अब भारत की तकनीक की ताकत देखेगी। इस महीने दुनिया के सबसे ऊंचे ब्रिच पर रेल दौड़ेगी। रियासी स्टेशन ग्रां बरेयोतरां इलाके में दो सुरंगों के बीच है। स्टेशन की खासियत यह है कि जब यहां ट्रेन खड़ी होगी तो उसका कुछ हिस्सा सुरंग में और कुछ हिस्सा वहां बने पुल पर होगा।

By Jagran News Edited By: Sushil Kumar Sun, 16 Jun 2024 03:20 PM (IST)
Reasi Terror Attack: आर्च पुल पर इस महीने से दौड़ेगी ट्रेन

राजेश डोगरा, रियासी। कश्मीर को कन्याकुमारी तक रेल के जरिए जोड़ने का सपना अब अंतिम चरण में है। चिनाब दरिया पर बने विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज पर इस माह के अंत तक ट्रेन दौड़ सकती है। 30 जून को पहली बार रियासी स्टेशन तक ट्रेन पहुंचने के लिए ट्रायल रन होगा। उस दौरान रेलवे के आला अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

बनिहाल से रियासी तक ट्रैक का कार्य पूरा हो चुका है। उसके बाद सुरक्षा ट्रायल के बाद इस हिस्से पर रेल संचालन को अनमुति मिल सकती है। अब सिर्फ टी1 सुरंग के निर्माण कार्य के चलते कटड़ा से रियासी के बीच करीब 30 किलोमीटर के ट्रैक का कार्य लंबित है। यह कार्य पूरा होते ही जम्मू से श्रीनगर का सफर साढ़े तीन घंटे में पूरा हो सकेगा।

रियासी स्टेशन पर ट्रायल रन की तैयारी 

272 किलोमीटर लंबी ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना पर दशकों से कार्य चल रहा है। बनिहाल से श्रीनगर होते हुए बारामुला तक 161 किलोमीटर पहले से ट्रेन दौड़ रही है। शेष बचे 111 किमी कटड़ा-बनिहाल रेल खंड में 37 पुल हैं। इसी खंड में चिनाब पर बना विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च पुल भी है। इसी वर्ष 20 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हरी झंडी दिखाने के बाद बनिहाल से रामबन के संगलदान तक 48 किलोमीटर ट्रेन दौड़ने लगी है। शेष 63 किलोमीटर ट्रैक के भी ज्यादातर हिस्से का कार्य पूरा हो चुका है और रियासी स्टेशन पर ट्रायल रन की तैयारी की जा रही है।

कटड़ा टी 1 सुरंग के कारण लटका हुआ काम

रियासी से कटड़ा तक ट्रेन पहुंचने का कार्य 3.2 किलोमीटर लंबी टी 1 सुरंग के कारण लटका है। इसकी भौगोलिक परिस्थितियां इस तरह हैं कि इंजीनियरों की चुनौतियां कम नहीं हो रही हैं। सुरंग में पानी टपकने से कार्य में बाधा आती रही है।

इस सुरंग का कार्य पूरा होते ही कश्मीर से कन्याकुमारी तक ट्रेन के सफर का सपना साकार हो जाएगा। रियासी रेलवे स्टेशन पर कोंकण रेलवे के डिप्टी चीफ इंजीनियर सुजय कुमार से रियासी स्टेशन पर ट्रेन पहुंचने की आधिकारिक जानकारी लेने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने कोई भी जानकारी देने से असमर्थता जताई।

श्रद्धालुओं को मिल सकता है तोहफा

इस बार श्रीअमरनाथ यात्रा 29 जून को आरंभ हो रही है और 52 दिन चलेगी। अगर सुरक्षा ट्रायल के बाद इस ट्रैक पर रेल संचालन को जल्द हरी झंडी मिल जाती है तो रियासी में बना दुनिया का सबसे ऊचा आर्च ब्रिज और हैंगिग पुल श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकते हैं। इसके अलावा मां वैष्णो देवी और शिव खोड़ी पहुंचने वाले श्रद्धालु भी इस सफर का आनंद उठाना चाहेंगे।

चुनौतीपूर्ण व रोमांचक होगा ट्रैक

पहाड़ों, खाइयों और नदी-नालों पर यही वह ट्रैक है जिसका निर्माण जितना चुनौतीपूर्ण रहा उस पर सफर भी उतना रोमांचक होगा। इसी ट्रैक पर विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च पुल का सफर यादगार बनेगा जो एफिल टावर से 35 मीटर ऊंचा और 1.3 किलोमीटर लंबा है।

कौड़ी में एक हाल्ट स्टेशन भी रहेगा ताकि अगर यात्री चाहे तो यहां उतरकर नजारे को कैमरे में कैद कर सकें। बनिहाल की तरफ से रियासी की तरफ जाते समय इस पुल को पार कर जब ट्रेन छह किमी लंबी टनल नंबर 36 से होकर रियासी स्टेशन पहुंचेगी तो वहां का नजारा देखते बनता है।

रियासी स्टेशन ग्रां बरेयोतरां इलाके में दो सुरंगों के बीच है। स्टेशन की खासियत यह है कि जब यहां ट्रेन खड़ी होगी तो उसका कुछ हिस्सा सुरंग में और कुछ हिस्सा वहां बने पुल पर होगा।

इस पुल को बनाने के लिए एक पिलर की लंबाई 103.26 मीटर और जमीन के ऊपर का भाग 95 मीटर है। यह पिलर कुतुबमीनार से भी 22 मीटर ऊंचा है। कुतुब मीनार की ऊंचाई 73 मीटर है।

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