Jammu & Kashmir News: कश्मीर में टूरिस्टों की मौज, ट्यूलिप गार्डन के साथ लहलहाते सरसों के खेत भी पर्यटकों से आबाद
कश्मीर में बसंत की बहार खिली हुई है। एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन के साथ-साथ खेतों में लहलहाते सरसों के फूल पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। उत्तर से दक्षिण और मध्य कश्मीर तक हर जगह सरसों के खेत पर्यटकों को मदहोश कर रहे हैं। इस बदलाव के साथ ही देश-विदेश से पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। यहां के नजारे लोगों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं।

रजिया नूर, श्रीनगर। धरती पर स्वर्ग कहलाने वाली घाटी इन दिनों बहार के रंग में रंगी हुई है। एक तरफ डल झील किनारे जब्रवान पहाड़ी की तलहटी में एशिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन आबाद है तो दूसरी तरफ खेतों में खिली सरसों पर्यटकों का मन मोह रही है।
पर्यटक जगह-जगह खेतों में सरसों की इस सुनहरी बहार का आनंद लेते नजर आ रहे हैं। उत्तर हो या दक्षिण या फिर मध्य कश्मीर हर जगह पर्यटक सरसों के खेत पर्यटकों को मदमस्त कर रहे हैं। बीते चंद वर्षों विशेषकर अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर विशेषकर घाटी के हालातों में अभूतपूर्व बदलाव आया है। इस बदलाव के के यहां फूल खिल रहे हैं।
देश-विदेश के पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
देश-विदेश के पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही है। इसे भुनाने के लिए प्रशासन ने गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग, मुगल गार्डन समेत अन्य प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के साथ गुमनाम पर्यटन स्थलों को भी पर्यटन के मानचित्र पर लाया है ताकि पर्यटक उन स्थलों का भी लुत्फ उठा सकें और उस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में चार चांद लगें।
वर्ष 2023 में श्रीनगर में जी-20 शिखर सम्मेलन की पर्यटन कार्यसमूह की बैठक के बाद से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों तक पहुंच गई। सबसे बड़ी बात कि इनमें विदेशी पर्यटकों की भी एक अच्छी खासी संख्या है।
अक्टूबर-नवंबर में यहां बोई जाने वाली सरसों अप्रैल-मई में पककर तैयार हो जाती है। अच्छा मुनाफा देने वाली इस फसल ने बीते चंद वर्षों में किसानों को लुभाया है। मार्च महीना समाप्त होते-होते सरसों के फूल खिलने लगते हैं। घाटी में 1.40 लाख कनाल (सात हजार हेक्टयेर से अधिक) जमीन पर सरसों की खेती होती है। एक तरफ ट्यूलिप तो दूसरी ओर खेतों में खिले सरसों के फूल से पर्यटकों हटने नहीं देते, घाटी की सैर के लिए देश-विदेश के पर्यटकों की संख्या में रिकार्ड़ बढ़ोतरी हो रही है।
पर्यटकों को रिझा रहे सरसों के खेत, होटल मालिकों की चांदी
डलगेट श्रीनगर में स्थित होटल मालिक मुनीब अल्ताफ ने बताया कि पहले तो हमारा स्प्रिंग सीजन बहुत शॉर्ट टर्म होता था। इस सीजन में पर्यटकों को दिखाने के लिए बादमबाड़ी और ट्यूलिप गार्डन के अलावा और वेन्यू नहीं हुआ करता था। अब यहां सरसों के खेत भी पर्यटकों को खूब रिझा रहे हैं। पर्यटकों के इन खेतों में जमावड़ा व्यापार बढ़ा रहा है।
सरसों के खेतों के पास चाय की चुस्की कोलकाता से घूमने आए संजय घोष ने कहा कि अपने परिवार के साथ घाटी में पहली बार घूमने आया हूं। अभी तक पहलगाम, सोनमर्ग और गुलमर्ग की सैर की है। यह पर्यटनस्थल तो खूबसूरत हैं ही, साथ में इनके आसपास सरसों के खेत भी देखने लायक है। गुलमर्ग से वापसी पर हमने टंगमर्ग में स्थित सरसों के खेतों के पास चाय की चुस्की ली। साथ में उस मनोहारी दृश्य के बीच काफी तस्वीरें भी खींची।
कश्मीर का हर मौसम खूबसूरत
उत्तर प्रदेश के मेरठ से आए सुकेश रंजन ने अपने मोबाइल फोन में सरसों के खेतों में अपने दोस्तों संग ली गई तस्वीरें दिखाते हुए कहा कि कश्मीर का हर मौसम खूबसूरत होता है। मैं पांच वर्ष पहले यहां पतझड़ के मौसम में आया था। चिनार के पेड़ों से झड़कर जमीन पर गिर चुके सुर्ख पत्तों से जैसे हर तरफ सुर्ख कालीन बिछी हुई थी। वह समां अभी तक भूल नहीं पा रहे।
दूसरी बार इस मौसम में यहां आने का सौभाग्य मिला और सरसों के फूलों की यह पीली व सुनहरी चादर ओड़े नजारों ने मन मंत्रमुग्ध कर दिया।
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