राज्य ब्यूरो, श्रीनगर : कश्मीर में हिदू और बौद्ध धर्म से संबंधित ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व के चार विरासत स्थलों को यूनेस्को की वैश्विक विरासत सूची में शामिल कराया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) एक ब्लू प्रिट तैयार करने की प्रक्रिया में लगा हुआ है।

जम्मू कश्मीर अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधिकारियों ने हाल ही में एनएमए के अध्यक्ष तरुण विजय के साथ वादी में स्थित हिदू और बौद्ध धर्म से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के सभी स्थलों का सर्वे किया है। हालांकि तरुण विजय चल-फिर नहीं सकते और वह व्हीलचेयर पर हैं, इसके बावजूद उन्होंने खुद श्रीनगर के रैनावारी में मंदिरों, अवंतीपोरा में मंदिर, श्रीनगर के हारवन में बौद्ध स्थल, गांदरबल के नारानाग में शिव मंदिर और श्रीनगर में श्री प्रताप सिंह संग्रहालय का मौके पर जाकर जायजा लिया। तरुण विजय ने बताया कि कश्मीर घाटी में यह अपनी तरह का पहला सर्वेक्षण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत बनाने की परिकल्पना के अंतर्गत ही कश्मीर में यह प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रधानमंत्री जम्मू कश्मीर के सदियों पुराने सांस्कृतिक गौरव को पुन: बहाल करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मैंने खुद यहां विभिन्न पुरातत्व और ऐतिहासिक स्मारक स्थलों का दौरा किया है, इन सभी के संरक्षण के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पूरे जम्मू कश्मीर में पुरातत्व और ऐतिहासिक महत्व के कई स्मारक स्थल हैं। इनमें से कई पौराणिक काल से संबंधित बताए जाते हैं और इनका धार्मिक महत्व भी है। कश्मीर में स्थित विभिन्न ऐतिहासिक धरोहरों को यूनेस्को की वैश्विक विरासत स्थल सूची में स्थान दिलाने के लिए एक प्रभावी योजना और प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मार्तंड मंदिर, श्रीनगर में परिहासपोरा, गांदरबल में शिव मंदिर और श्रीनगर में हारवन उन विशिष्ट ऐतिहासिक धरोहरों में प्रमुख हैं, जिन्हें यूनेस्को की वैश्विक विरासत स्थल सूची में स्थान जरूर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक बार संभावित सूची में नाम शामिल हो जाए, फिर यूनेस्को विरासत स्थलों की अंतिम सूची में स्थान बनाना सुगम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा खुद इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

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