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देश के किसी भी कोने से कैसे पहुंचें लद्दाख? इन 5 अद्भुत जगहों का जरूर करें दीदार; खूबसूरत वादियों के हो जाएंगे फैन

Published: Sat, 03 Oct 2026 06:09 PM (IST)

यह लेख लद्दाख पहुंचने के विभिन्न तरीकों (सड़क और हवाई मार्ग) और वहां के 5 प्रमुख पर्यटन स्थलों की जानकारी ...और पढ़ें

लद्दाख ट्रिप गाइड: लद्दाख में इन पांच जगहों का करें दीदार।

लद्दाख ट्रिप गाइड: लद्दाख में इन पांच जगहों का करें दीदार।

HighLights

  1. लद्दाख पहुँचने के हवाई और सड़क मार्ग की विस्तृत जानकारी।

  2. पैंगोंग त्सो, नुब्रा घाटी, खारदुंग ला प्रमुख दर्शनीय स्थल।

  3. थिकसे मठ, मैग्नेटिक हिल भी लद्दाख के आकर्षण हैं।

डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है। जम्मू-कश्मीर से अलग हुए लद्दाख भी अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। पर्यटक घाटी की वादियों का दीदार करने खींचे चले आते हैं। यहां की वादियां पर्यटकों का मन मोह लेती है।

अगर घूमने का प्लान है तो देश के किसी भी कोने से आसानी से सड़क और हवाई मार्ग से लद्दाख पहुंच सकते हैं। यहां कई टूरिस्ट स्पॉट हैं, जो अपने आप में नायाब हैं। अगर आप लद्दाख आ रहे हैं तो इन 5 जगहों का दीदार जरूर करें।

कैसे पहुंचे लद्दाख?

सड़क और हवाई मार्ग से लद्दाख पहुंच सकते हैं। सबसे आसान साधन हवाई मार्ग है। लेह के कुशोक बकुला रिम्पोछे एयरपोर्ट है। अगर आप फ्लाइट से आ रहे हैं तो आपको यहीं लैंड करना होगा। कई शहरों से यहां के लिए सीधी उड़ान है। दिल्ली से डेढ़ घंटे में लद्दाख पहुंच सकते हैं।

वहीं, लद्दाख में कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। निकटतम रेलवे स्टेशन जम्मू तवी है। यहां से टैक्सी या बस से श्रीनगर पहुंचें। श्रीनगर से जोजिला पास होते हुए कारगिल के रास्ते लेह पहुंच सकते हैं। चंडीगढ़ से पहले मनाली पहुंचे फिर अटल टनल और लाचुलुंग ला होकर लेह पहुंच सकते हैं।

पैंगोंग त्सो झील

इसे दुनिया की सबसे ऊंची खारे पानी की झीलों में से एक माना जाता है। यह लगभग 5 किमी चौड़ी और 134 किमी लंबी है। इसका एक तिहाई हिस्सा भारत में और दो तिहाई चीन में स्थित है। इस मनमोहक झील के रंग लगातार बदलते रहते हैं।

इसका रंग कभी नीला, भूरा-हरा और लाल होता जाता है। सर्दियों में यह पूरी तरह जम जाती है। बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग के लिए यह एक प्रसिद्ध स्थान बन गई है। गर्मी के मौसम में विभिन्न प्रकार के पक्षियों के लिए प्रजनन स्थल भी है।

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नुब्रा घाटी

लेह से लगभग 120 किलोमीटर उत्तर में नुब्रा घाटी स्थित है। इसे लद्दाख का बाग कहा जाता है। इसके मनोरम दृश्य हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। यहां पनामिक गर्म पानी के झरने, दो कूबड़ वाले ऊंटों की सफारी, रिवर राफ्टिंग, ट्रेकिंग और हुंडर के रेतीले टीलों में धूप सेंकना जैसे रोमांच का आनंद लिया जा सकता है।

यहां का मुख्य आकर्षण 108 फीट ऊंची मैत्रेय बुद्ध की प्रतिमा है। सियाचिन ग्लेशियर नुब्रा घाटी में काफी ऊंचाई पर स्थित है और हाल ही में घरेलू पर्यटकों के लिए खोला गया है। तुरतुक एक अनूठा गांव है, जहां जनजातीय पर्यटन का आनंद ले सकते हैं और स्थानीय लोगों से बातचीत कर सकते हैं।

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खारदुंग ला पास

खारदुंग ला विश्व का दूसरा सबसे ऊंचा मोटर-योग्य दर्रा है। उमलिंग ला विश्व की सबसे ऊंची मोटर-योग्य सड़क है, जो लद्दाख में स्थित है। हाल ही में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने इसे निर्माण किया है। खारदुंग ला श्योक और नुब्रा घाटियों का प्रवेश द्वार है।

यहां से मनोरम दृश्य दिखाई देते हैं। खारदुंग ला दर्रा लेह से 40 किमी दूर 18 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर है। पर्यटक विश्व के सबसे ऊंचे कैफे में गरमागरम भोजन का आनंद लेते हैं।

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थिकसे मठ

लद्दाख का ऐतिहासिक मठ लेह से 19 किमी दूर है। 1433 में इसका स्थापना हुआ था। पहाड़ी के दोनों ओर बसे गांवों के मनोरम दृश्य के लिए भी जाना जाता है। इसमें प्राचीन प्रतिमाएं, स्तूप, स्क्रॉल पेंटिंग मौजूद हैं। मैत्रेय बुद्ध की 48 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा भी है। यहां प्रतिदिन सुबह में प्रार्थनाएं आयोजित की जाती हैं, पर्यटक भी जाकर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कर सकते हैं।

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मैग्नेटिक हिल

यह लेह से 30 किमी की दूरी पर है। यहां गाड़ियां बिना गियर के ढलान पर ऊपर की ओर खींचती हुई महसूस होती हैं। कहा जाता है कि इस पहाड़ी से एक रहस्यमय चुंबकीय बल निकलता है जो इसके दायरे में आने वाले स्थिर वाहनों को अपनी ओर खींचता है। इसका अनुभव लेने काफी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं।

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