कैसे बना लद्दाख और क्या है इसका इतिहास? सिल्क रूट-पश्मीना से UT बनने का सफर, सोनम वांगचुक क्यों कर रहे संघर्ष?
लद्दाख के लोग पूर्ण राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें सोनम वांगचुक भी शामिल हैं।

कैसे बना लद्दाख और क्या है इसका इतिहास?
HighLights
लद्दाख का इतिहास सिल्क रूट और प्राचीन राजवंशों से जुड़ा है।
2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद लद्दाख बना केंद्र शासित प्रदेश।
स्थानीय लोग पूर्ण राज्य और छठी अनुसूची के दर्जे की मांग कर रहे हैं।
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। लद्दाख के लोग अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित उच्च स्तरीय कमेटी से बातचीत जारी है। सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक इसको लेकर आंदोलन भी कर चुके हैं।
हालांकि, 19 से 23 सितंबर तक चलने वाली पदयात्रा स्थगित हो चुकी है। लद्दाखी पूर्ण राज्य का दर्जा की मांग कर रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं लद्दाख कैसे बना? इसका इतिहास क्या है? रोजगार के क्या प्रमुख साधन हैं? दूसरे राज्यों से लद्दाख कितना अलग है?
लद्दाख का इतिहास
लद्दाख को अतीत में कई नामों से जाना जाता था। कुछ लोग इसे मरयुल या निचला इलाका कहते थे, तो कुछ इसे खा-चुम्पा। लद्दाख कभी सिल्क रूट का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र था, जहां से होकर मध्य एशिया, चीन और भारत के बीच सिल्क, मसाले और पश्मीना ऊन का व्यापार होता था।
10वीं शताब्दी में यहां लद्दाखी राजवंश की स्थापना हुई। 17वीं सदी में राजा सेंगे नमग्याल के शासनकाल में लद्दाख का स्वर्णिम युग रहा।
1834 में राजा गुलाब सिंह के सेनापति जोरावर सिंह ने लद्दाख को जीतकर जम्मू और कश्मीर के डोगरा साम्राज्य में मिला लिया। 1947 में भारत के विलय के समय लद्दाख, जम्मू-कश्मीर राज्य का एक क्षेत्र बना रहा।
कैसे बना लद्दाख
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटा दिया। इसके बाद जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हट गया। वहीं, जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग कर दिया और केंद्रशासित प्रदेश बना दिया। लेकिन लद्दाख को बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। यहां जनता द्वारा चुनी सरकार का शासन नहीं है, बल्कि केंद्र का शासन होता है।
रोजगार के मुख्य साधन
लद्दाख के लोग प्रमुख रूप से पर्यटन, पशुपालन व पश्मीना ऊन और कृषि-बागवानी पर निर्भर हैं। लद्दाख की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा स्तंभ पर्यटन है। चांगथांगी बकरियों से दुनिया की सबसे बेहतरीन पश्मीना ऊन प्राप्त होती है। याक और भेड़ पालन भी मुख्य साधन है। यहां जौ, गेहूं और विशेष रूप से लद्दाखी खुबानी और सेब की खेती होती है।
अन्य राज्यों से कितना अलग है लद्दाख?
मैदानी या सामान्य पहाड़ी राज्यों के विपरीत, लद्दाख बहुत कम बारिश और अत्यधिक ठंड वाला एक उच्च ऊंचाई वाला मरुस्थल है। यहां घर मुख्य रूप से मिट्टी, लकड़ी और पत्थर से बनाए जाते हैं, जो प्राकृतिक रूप से इंसुलेटेड होते हैं। पानी की कमी से निपटने के लिए यहां कृत्रिम ग्लेशियर यानी 'आइस स्तूप' बनाए जाते हैं, जो वसंत ऋतु में पिघलकर खेती के काम आते हैं।
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दो भागों में बंटा है लद्दाख
लद्दाख को दो भागों में बांटा गया है, एक लेह और दूसरा कारगिल। इन दोनों में काफी सांस्कृतिक व भौगोलिक अंतर है। लेह मुख्य रूप से बौद्ध बहुल क्षेत्र हैं, जबकि कारगिल मुस्लिम बहुल क्षेत्र है।
संस्कृति और जीवनशैली
शांतिप्रिय बौद्ध और शिया मुस्लिम संस्कृति का अनूठा संगम, पारंपरिक पोशाक (गोन्चा), बटर टी (गुर-गुर चाय) और प्रकृति के साथ पूर्ण सामंजस्य यहां की जीवनशैली को देश के बाकी हिस्सों से बिल्कुल अलग बनाता है।
क्या है वर्तमान परिस्थिति
स्थानीय जमीन, नौकरियों और पर्यावरण को बाहरी हस्तक्षेप से बचाने के लिए छठी अनुसूची की मांग कर रहे हैं। हर साल लाखों पर्यटकों के आने से कचरा प्रबंधन और पिघलते ग्लेशियर लद्दाख के नाजुक इकोसिस्टम के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं।
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Ladakh Padyatra March
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) September 17, 2026
Due to prevailing weather conditions with cold nights, we’re making it into a symbolic 20 Km march on 23rd Sept. followed by martyrs day event on 24th.
Inconvenience regretted, look forward to joining you & marching together… pic.twitter.com/iq8aRuwh5k
