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    Amarnath Yatra : जानिए, क्या है अमरनाथ यात्रा में छड़ी मुबारक का महत्व, 10 जुलाई से शुरू हो रहा पूजन

    Updated: Mon, 07 Jul 2025 03:21 PM (IST)

    श्री अमरेश्वर धाम की वार्षिक छड़ी मुबारक तीर्थयात्रा-2025 10 जुलाई को व्यास-पूर्णिमा पर शुरू होगी। पहलगाम में लिद्दर किनारे शिव मंदिर में भूमि पूजन और ध्वजारोहण होगा। महंत दीपेंद्र गिरी के संरक्षण में छड़ी-मुबारक 4 अगस्त को दशनामी अखाड़ा श्रीनगर से पवित्र गुफा के लिए प्रस्थान करेगी। यह यात्रा सनातन परम्परा के अनुसार होगी जिसका समापन श्रावण-पूर्णिमा को अमरेश्वर धाम में भगवान शिव-माता पार्वती के पूजन के साथ होगा।

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    श्रीनगर में छड़ी मुबारक के लिए भूमि पूजन 10 जुलाई से आरंभ हो जाएगा। फाइल फोटो।

    राज्य ब्यूरो, जागरण, श्रीनगर। भारतीय हिन्दू धर्म के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में अमरनाथ यात्रा और छड़ी मुबारक एक है। यह विशेष रूप से कश्मीर में आयोजित होती है। श्री अमरेश्वर धाम की वार्षिक छड़ी मुबारक तीर्थयात्रा-2025 के लिए सनातन परम्परा के अनुसार भूमि पूजन, नवग्रह पूजन और 'ध्वजारोहण' जैसे अनुष्ठान गुरुवार, 10 जुलाई को आषाढ़-पूर्णिमा (व्यास-पूर्णिमा) के शुभ अवसर पर पहलगाम में लिद्दर किनारे स्थित शिव मंदिर में होंगे।

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    इसके साथ ही सनातन और धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, श्री अमरेश्वर धाम की तीर्थयात्रा का शुभारंभ होगा। श्री अमरेश्वर धाम की छड़ी मुबारक चार अगस्त को महंत दीपेंद्र गिरी के संरक्षण में अपने विश्राम स्थल दशनामी अखाड़ा श्रीनगर से पवित्र गुफा के लिए प्रस्थान करेगी।

    व्यास पूर्णिमा के दिन से माना जाता है वार्षिक तीर्थयात्रा का शुभारंभ

    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, श्री अमरेश्वर धाम की वार्षिक तीर्थयात्रा का शुभारंभ व्यास पूर्णिमा के दिन से माना जाता है। दशनामी अखाड़ा के महंत और पवित्र छड़ी मुबारक के संरक्षक महंत दीपेंद्र गिरी के अनुसार, इस वर्ष आषाढ़-पूर्णिमा जिसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं, 10 जुलाई को है। इसलिए श्री अमरेश्वर धाम की तीर्थयात्रा का शुभारंभ उसी दिन होगा और गुरूवार को पहलगाम में जहां भगवान शिव ने अपने प्रिय वाहन और साथी नंदी का त्याग किया था, वहां लिद्दर किनारे भूमि पूजन, नवग्रह पूजन और ध्वजारोहण का अनुष्ठान होगा। उन्होंने कहा यह अनुष्ठान संपन्न करने के बाद हम लोग वापस यहां श्रीनगर में दशनामी अखाड़ा लौट आएंगे।

    पहलगाम मार्ग से ही है अमरनाथ यात्रा का महत्व

    श्री अमरेश्वर धाम जिसे श्री अमरनाथ की पवित्र गुफा के नाम से पुकारा जाता है, की तीर्थयात्रा का महत्व पहलगाम मार्ग से ही है। पहलगाम ही यात्रा का पहला और प्रमुख आधार शिविर है। शिव-शक्ति का स्वरूप पवित्र छड़ी मुबारक की श्री अमरेश्वर धाम की यात्रा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि छड़ी मुबारक को 24 जुलाई को ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर और 25 जुलाई को शारिका भवानी मंदिर ले जाया जाएगा। उसके बाद 27 जुलाई 2025 को रविवार को श्री अमरेश्वर मंदिर दशनामी अखाड़ा श्रीनगर में छड़ी स्थापना की रस्में निभाई जाएंगी।

    चार अगस्त को पहलगाम के लिए प्रस्थान करेगी छड़ी मुबारक

    पारंपरिक पवित्र छड़ी पूजन 29 जुलाई को ‘नाग-पंचमी’ के शुभ अवसर पर दशनामी अखाड़ा श्रीनगर में किया जाएगा। चार अगस्त को छड़ी मुबारक पहलगाम के लिए प्रस्थान करेगी। रास्ते में सभी प्रमुख तीर्थस्थलों में छड़ी मुबारक पूजा अर्चना के लिए जाएगी और चार व पांच अगस्त को पहलगाम में ही विश्राम करेगी।

    छह अगस्त को छड़ी मुबारक चंदनवाड़ी, सात अगस्त को शेषनाग और आठ अगस्त को पंचतरणी में रात्रि विश्राम करने के बाद नौ अगस्त को ‘श्रावण-पूर्णिमा’ के शुभ अवसर पर छड़ी मुबारक अमरेश्वर धाम में प्रवेश करेगी। उसी दिन श्री अमरेश्वर धाम में भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन व मुख्य दर्शन होगा। इसके बाद छड़ी मुबारक वापस लौटेगी और तीर्थयात्रा संपन्न होगी।