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    पुलवामा हमले की बरसी पर कश्मीरी युवाओं को बरगलाने की साजिश, आतंकियों को बताया शहीद

    कश्मीर घाटी में प्रतिबंधित आतंकी और अलगाववादी संगठन युवाओं को गुमराह करने के लिए जिहादी प्रोपेगेंडा साहित्य बांट रहे हैं। पुलिस ने श्रीनगर में छापेमारी कर 668 किताबें जब्त की हैं। इन किताबों में कश्मीर और भारत के इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और आतंकवाद को सही ठहराया गया है। सुरक्षा एजेंसियां इस साहित्य से चिंतित हैं क्योंकि यह युवाओं को हिंसा की ओर प्रेरित कर सकता है।

    By naveen sharma Edited By: Prince Sharma Updated: Fri, 14 Feb 2025 07:23 PM (IST)
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    आज पुलवामा आतंकी हमले को 6 साल हो गए हैं (फाइल फोटो)

    राज्य ब्यूृरो, श्रीनगर। पुलवामा हमले को 6 साल हो गए हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई। दरअसल, कश्मीर घाटी में अपने एजेंडे की विफलता से हताश प्रतिबंधित आतंकी और अलगाववादी संगठनों ने अब स्थानीय युवाओं में कट्टर हिंसक जिहादी मानसिकता पैदा करने के लिए जिहादी प्रोपेगेंडा साहित्य बांटना शुरू कर दिया है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस जिहादी साहित्य का भंडाफोड़ किया है

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    यह प्रतिबंधित साहित्य संबंधित संगठन अपने ओवरग्राउंड नेटवर्क के जरिए बांट रहे हैं। इसमें कई दुकानदार भी शामिल हैं। पुलिस ने शुक्रवार को इस षडयंत्र का पर्दाफाश करते हुए श्रीनगर शहर के विभिन्न हिस्सों में चिह्नित ठिकानों पर छापा मारा। इस दौरान 668 किताबों को जब्त किया है।

    यह किताबें कट्टर धर्मांध जिहादी मानसिकता को बढ़ावा देती हैं। प्रतिबंधित संगठनों के साहित्य और प्रोपेगेंडा साहित्य के मिलने से सुरक्षा एजेंसियां भी सकते में आ गई हैं।

    पुस्तकें अत्यंत भड़काऊ हैं

    पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपना नाम न छापे जाने की शर्त पर बताया कि बरामद की गई पुस्तकें अत्यंत भड़काऊ हैं और इन्हें कश्मीरी युवाओं को विशेषकर किशोरावास्था के लड़कों को गुमराह करने के लिए ही छपवाया गया है और कश्मीर में बांटा जा रहा है।

    इन किताबों में कश्मीर और भारत के संदर्भ में कई ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है, यह कश्मीर में आतंकी हिंसा काे सही ठहराते हुए, कश्मीरी मुस्लिमों को भारत के खिलाफ जिहाद व बगावात के लिए उकसाती हैं।

    इनमें आतंकियों का महिमामंडन किया गया है और मारे गए आतंकियों को बलिदानी बताया गया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई इन किताबों को पढ़ता है तो उसके भीतर आक्रोश और अलगाववाद की गहरी भावना पैदा हो सकती है। वह आतंकी हिंसा को सही ठहराने लगेगा और अंतत:हथियार उठाकर आतंकी हिंसा के रास्ते पर निकल पड़ेगा।

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    कहां से आई ये किताबें?

    उन्होंने बताया कि कश्मीर में यह किताबें कहां से आ रही हैं, इन्हें किस तरीके से वितरित किया जा रहा है,क्या इन्हें कश्मीर में ही छपवाया जा रहा है,इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है।

    इस बीच, एक अन्य अधिकारी ने बताया कि सोशल मीडिया पर सक्रिय जिहादी तत्वों और आतंकी हैंडलरों की निगरानी बढ़ने के बाद ही जिहादी संगठनों ने स्थानीय युवाओं में जिहादी मानसिकता पैदा कर उनहें आतंकी हिंसा के मार्ग पर धकेलने के लिए कश्मीर में फिर से जिहादी साहित्य को बांटना शुरू किया है।

    इस तरह का साहित्य अक्सर तस्करी के जरिए ही कश्मीर में लाया जाता है। इसके अलावा एन्क्रिप्टेड प्लेटफार्म पर डिजिटल प्रतियां भी प्रसारित की जाती हैं।

    युवाओं को प्रभावित कर सकती हैं ये किताबें

    कश्मीर मामलों के जानकार अरशद रसूल ने कहा कि आप जो पढ़ते हैं, उसका आप पर गहरा असर होता है और यही कारण है कि यहां पाकिस्तान समर्थित जिहादी संगठनों ने अब एक बार फिर जिहादी साहित्य बांटना शुरू कर दिया है। उन्होंने यह तरीका सोशल मीडिया पर पुलिस की कड़ी निगरानी को देखते हुए ही अपनाया होगा।

    यह बहुत खतरनाक है और ऐसी सामग्री से प्रभावित होकर कई युवा आतंकी हिंसा की तरफ बढ़ सकते हैं। कश्मीर में हमने देखा है कि कई कई नौजवान कश्मीर में सुरक्षाबलों द्वारा मानवाधिकार हनन की झूठी कहानियों, आतंकियों के महिमामंडन के किस्सों और जिहाद की गलत व्याख्या व कश्मीर को लेकर झूठी जानकारियों से प्रभावित होकर आतंकी बने हैं। मारे घए आतंकियों में से कुछ तो डॉक्टर, इंजीनियर की पढ़ाई कर रहे थे।

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