यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 31, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पाकिस्तान में शियाओं पर हमले के खिलाफ कश्मीर से उठी आवाज, इमरान रजा ने भारत सरकार से की हस्तक्षेप करने की मांग
पाकिस्तान में शिया समुदाय पर हो रहे हमलों को लेकर अब कश्मीर (Jammu Kashmir News) से आवाज उठने लगी है। ...और पढ़ें

HighLights
- पाक में शिया शियाओं पर हो रहे हमलों पर इमरान रजा ने उठाई आवाज
- 'पाकिस्तान में शिया समुदाय के लिए बिगड़ रही परिस्थितियां'
- 'पाक सरकार हमलों को रोकने में उठा रही उदासीन रवैया'
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। पाकिस्तान में शिया समुदाय पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ जम्मू-कश्मीर के शिया समुदाय ने भी अपनी आवाज उठाना शुरू कर दी है। पाऑल जम्मू एंड कश्मीर शिया एसोसिएशन के अध्यक्ष इमरान रजा अंसारी ने मंगलवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह पाकिस्तान में शिया समुदाय के उत्पीड़न के खिलाफ कड़ा रुख अपनाए।
वह पाकिस्तान सरकार के साथ अपनी चिंता व्यक्त करते हुए शिया समुदाय की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाए। इमरान रजा अंसारी ने इस विषय में विदेश मंत्री एस जयशंकर को भी पत्र लिखा है।
शिया समुदाय के नरसंहार को रोकने की जरूरत: इमरान रजा
पूर्व मंत्री और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के महासचिव इमरान रजा अंसारी जम्मू-कश्मीर में शिया समुदाय के एक बड़े वर्ग के धर्मगुरु भी हैं। उन्होंने विदेश मंत्री को पत्र लिखने की पुष्टि करते हुए कहा कि पाकिस्तान में शियाओं पर जो हमले हो रहे हैं, उससे हम कैसे खुद को अलग रख सकते हैं।
यह अत्यंत चिंता का विषय है। पाकिस्तान में शिया समुदाय के लिए परिस्थितियां लगातार बिगड़ रही हैं। वहां शिया समुदाय के नरसंहार को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।
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'पाक सरकार अपना रही उदासीन रवैया'
अंसारी ने अपने पत्र में लिखा कि पाकिस्तान में वर्षों से चली आ रही सांप्रदायिक हिंसा और शिया समुदाय पर आए दिन होने वाले हमलों को रोकने में पाकिस्तान सरकार ने हमेशा ही उदासीन रवैया अपनाया है।
'भारत सरकार करे तत्काल कार्रवाई'
पाकिस्तान की सरकार की निष्क्रियता के कारण ही वहां शिया समुदाय पर हमले लगातार बढ़े हैं। हाल ही में वहां शिया समुदाय के प्रति बढ़ती हिंसक घटनाओं ने मानवीय संकट पैदा कर दिया है और यह जरूरी है कि भारत सरकार इस खून-खराबे को रोकने के लिए कड़ा रुख अपनाए।
उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को देखते हुए भारत का नैतिक कर्तव्य है कि वह इस विषय में तत्काल कार्रवाई करे।
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