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    Pahalgam Attack: एलजी मनोज सिन्हा के पहलगाम हमले पर दिए ब्यान पर सीएम उमर अब्दुल्ला का कटाक्ष, बोले- देर आए दुरुस्त आए

    Updated: Tue, 15 Jul 2025 06:56 PM (IST)

    जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पहलगाम हमले पर एलजी मनोज सिन्हा की प्रतिक्रिया पर कहा कि खुफिया तंत्र की विफलता के लिए किसी को तो जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। 26 लोगों की जान जाने के बाद कार्रवाई होनी चाहिए और सुरक्षा तंत्र की विफलता के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने नक्शबंद साहिब की जियारतगाह में पुलिसकर्मियों के साथ हुई धक्का-मुक्की की घटना पर भी प्रतिक्रिया दी।

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    उमर ने कहा कि जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए।

    राज्य ब्यूरो,जागरण, श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि अगर पहलगाम हमले के लिए खुफिया तंत्र की विफलता जिम्मेदार है तो फिर कोई न कोई तो खुफिया तंत्र की विफलता के लिए जिम्मेदार होगा। उसे चिह्नित किया जाना चाहिए।

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    उन्होंने यह प्रतिक्रिया उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा पहलगाम हमले की जिम्मेदारी स्वीकार किए जाने पर व्यक्त की। उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू कश्मीर में कानून व्यवस्था और सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी है, इसलिए मेरी भी जिम्मेदारी बनती है।

    आज यहां बोन एंड जायंट अस्पताल बरजुला में एक नए ब्लाक को जनता को समर्पित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि चलो देर आए दुरुस्त आए। कम से कम 82 दिन के बाद हमने यह माना कि इसमें हमारी विफलता है।

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    अगर सुरक्षा तंत्र में विफलता नहीं हुई होती तो इतना बड़ा हमला नहीं होता। पहली बात तो यही होती है कि विफलता को स्वीकार किया जाए, फिर विफलता के लिए कौन जिम्मेदार है, यह तय करना होता है। उपराज्यपाल ने कहा कि कहीं न कहीं यह खुफिया तंत्र की विफलता भी है। अगर खुफिया तंत्र की विफलता है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन?

    उमर अब्दुल्ला ने कहा कि ऐसा तो हो नहीं सकता कि 26 लाेगों की कीमती जान चली जाए और हमारी तरफ से कोई कार्रवाई न हो। जब हम मानते हैं कि सुरक्षा तंत्र और खुफिया तंत्र विफल हैं तो किसी को तो जिम्मेदार ठहराना होगा, उसे चिह्नित करना होगा।

    गत सोमवार को नक्शबंद साहिब की जियारतगाह में पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की से जुड़े सवाल के जवाब में उन्होंने कहा पहली बात तो यह कि ऐसा नहीं होना चाहिए था। लेकिन हमारी बदकिस्मती है।

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    हमारी तरफ से कहीं भी कानून नहीं तोड़ा जा रहा था। पाबंदी तो सिर्फ 13 जुलाई के लिए थी, 14 जुलाई के लिए कोई रोक नहीं थी। चलिए जो हुआ सो हुआ।