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श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। वादी में धीरे धीरे सामान्य हो रही जिंदगी के बीच घटती प्रशासनिक पाबंदियों के साथ ही शनिवार को 12 दिनों से बंद पड़े 1.5 लाख से ज्यादा लैंडलाइन फोन बहाल हो गए। फिलहाल, 17 एक्सचेंज ही बहाल की गई हैं, शेष अन्य काे इतवार की शाम तक बहाल कर लिया जाएगा। 35 पुलिस थाना क्षेत्राें में ढील दी गईहै और सोमवार को वादी में प्राथमिक स्कूलों में अकादमिक गतिविधियों को बहाल करने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा प्रबंधों को प्रशासन ने अंतिम रुप देना शुरु कर दिया है।

गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर विशेषाधिकार समाप्त करने और इसे दो केंद्र शासित राज्याें में विभाजित किए जाने से कश्मीर में उपजी स्थिति के मददेनजर प्रशासन ने वादी में निषेधाज्ञा लागू कर रखी है। सभी प्रकार की टेलीफोन और इंटरनेट सेवाएं भी चार अगस्त की रात को बंद कर दी गई थी। एहतियात के तौर पर सभी शिक्षण संस्थान भी बंद रखे गए हैं। कई इलाकों में आने जानेके रास्ते भी पूरी तरह सील किए गए।

सड़कों पर वाहनों की आवाजाही भी बढ़ रही है

अलबत्ता,वादी में तनाव के बावजूद कोई बड़ा हिंसक प्रदर्शन न होने और कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने में जनसहयोग का संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने भी प्रशासनिक पाबंदियों को हटाना शुरु कर दिया है। इसका असर सामान्य जनजीवन पर भी हो रहा है। विभिन्न इलाकों में दुकानें खुल रही हैं और सड़कों पर वाहनों की आवाजाही भी बढ़ रही है। हालात में सुधार को देखते हुए गत रोज मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने भी टेलीफोन सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से बहाल करने का यकीन दिलाया था।

आज तड़के ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के अलावा उत्तरी कश्मीर में एलओसी के साथ सटे केरन, टंगडार समेत विभिन्न इलाकों में 17 टेलीफोन एक्सचेंज को पूरी तरह क्रियाशील बनाया गया। इसके अलावा पूरी वादी में 35 थाना क्षेत्रों में भी प्रशासनिक पाबंदियों में ढील दी गई है, जिसे धीरे धीरे बढ़ाया जा रहा है।

वादी में 96 टेलीफोन एक्सचेंज में से 17 को बहाल कर दिया गया 

राज्यपाल के प्रमुख सचिव रोहित कंसल और कश्मीर रेंज के पुलिस आईजी एसपी पाणी ने एक बातीचत के दौरान बताया कि पूरी वादी में 96 टेलीफोन एक्सचेंज हैं। इनमें से 17 को बहाल कर दिया गया है। आज शाम तक 50 एक्सचेंज को क्रियाशील बनाया जाएगा और संभवत: इतवार की शाम तक हर एक्सचेंज बहाल हो चुकी होगी। उन्होंने बताया कि सिर्फ लैंडलाइन फोन बहाल किएजा रहे हैं। हालात की लगातार समीक्षा हो रही है। अगर स्थिति यूं ही शांत व सामान्य रहती है तो फिर मोबाईल फोन व इंटरनेट सेवा को भी बहाल करने पर विचार किया जाएगा। फिलहाल, जम्मू संभाग के पांच जिलों में मोबाईल इंटरनेट सेवा भी बहाल कर दी गई है। वादी के मौजूदा हालात पर उन्होंने कहा कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है। बेशक कई जगह दुकानें बंद हैं, लेकिन सड़कों पर लोगों की आवाजाही सामान्य हो चली है। अधिकांश जगहों पर प्रशासनिक पाबंदियों में ढील दी गई है।

आईजीपी कश्मीर एसपी पाणी ने बताया कि कानून व्यवस्था में सुधार को देखते हुए ही आज पूरी वादी में 35 पुलिस थाना क्षेत्रों के कार्याधिकार क्षेत्र में प्रशासनिक पाबंदियों में ढील दी गई है। इनमें उत्तरी कश्मीर के 15, दक्षिण कश्मीर के 15 और सेंट्रल कश्मीर में 5 पुलिस थाना क्षेत्र हैं। हम स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं। वादी में सोमवार को प्राथमिक स्कूलों को खोले जाने की तैयारियों का जिक्र करते हुए रोहित कंसल ने कहा कि हमारा प्रयास है कि अगले एक सप्ताह के दौरान पूरी वादी में अकादमिक गतिविधियां बहाल हों। हम विभिन्न जिलों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरुप क्रमानुसार स्कूल कालेज खोलने का फैसला किया है। लोग शांति व्यवस्था बनाए रखने में पूरा सहयोग कर रहे हैं। यही कारण है कि पिछले 15 दिनों में कहीं कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है।

कश्मीर के हालात में हो रहा सुधार 

जम्मू-कश्मीर के हालात में धीरे-धीरे अब सुधार हो रहा है। राज्य प्रशासन सोमवार से स्कूलों को खोलने के लिए सारी तैयारी कर ली है। श्रीनगर में कई जगहों पर दुकानें खुली है। राज्यपाल के सभी सलाहकार लगातार कश्मीर में मूल सुविधाओं की समीक्षा कर रहे हैं। वहीं जम्मू में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बहाल होने से लोगों ने राहत की सांस ली है। नेट बैंकिंग, ऑन लाइन शॉपिंग के साथ पेट्रोल पंपों व शोरूम में पॉज मशीनें चलने से कारोबार को भी राहत मिली है। 

लेह में शुरू होगा आदि महोत्सव 

लेह में आज शनिवार को आदि महोत्सव शुरू होगा। राज्यपाल सत्यपाल मलिक इस महोत्सव का उद्घाटन करेंगे। इसमें भाग लेने के लिए दूर-दूर से लोग लेह पहुंचे हुए हैं।  

अल्पसंख्यक समुदाय को अधिकार मिलेंगे 

ऐसा माना जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने और 31 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यक समुदाय के साथ इंसाफ होगा। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का क्षेत्राधिकार जम्मू-कश्मीर तक पहले नहीं था। अल्पसंख्यक समुदाय को अब अधिकार मिलेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि स्कॉलरशिप, आनंद मैरिज एक्ट मसलों का समाधान भी होगा। 

अवकाश के दिन भी हो रहे दाखिले 

जम्मू विश्वविद्यालय में शनिवार अवकाश होने वाले दिन भी पीजी दाखिले किए जा रहे हैं। दाखिले के वक्‍त  डेबिट क्रेडिट कार्ड न होने पर कैश या ड्राफ्ट लिया जाएगा। दाखिलों को लेकर विद्यार्थियों में भारी उत्साह है। पहली मेरिट सूची में नाम पाने वाले विद्यार्थी इस समय दाखिला ले रहे हैं। वहीं जम्मू विश्वविद्यालय ने आज शनिवार को होने वाली परीक्षाओं को स्थगित किया है। 

अस्थायी कर्मचारियों में स्थायी होने की बंधी उम्मीद 

जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने से राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत अस्थायी कर्मियों में भी स्थायी होने की उम्मीद बनी है। मौजूदा समय में साठ हजार से अधिक ऐसे कर्मियों की संख्या हैं। राज्य सरकार ने पीडीडी व पीएचई के अस्थायी कर्मियों को स्थायी करने की प्रक्रिया आरंभ कर रखी है। 

कश्मीर घाटी में लोगों की आवाजाही 

कश्मीर घाटी में लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध को शनिवार को कम कर दिया गया है। अधिकारियों ने कहा कि शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों को शनिवार सुबह सरकारी कार्यालयों में अपने कर्मचारियों की आवाजाही के लिए आसान किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा बल तैनात है,  सड़कों पर बैरिकेड बने हुए हैं, लेकिन लोगों को आवाजाही कि अनुमति दी गई। अधिकारियों ने कहा कि सिविल लाइंस क्षेत्र और घाटी के अन्य जिला मुख्यालयों में निजी वाहनों की आवाजाही में वृद्धि हुई है। अधिकारियों ने कहा कि शहर के सिविल लाइंस इलाकों में भी शनिवार सुबह कुछ दुकानें खुलीं। 

जम्मू में बहाल हुई इंटरनेट सेवा
जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य होने लगे हैं। जम्मू में 4 अगस्त से बंद पड़ी इंटरनेट सेवा को बहाल कर दिया गया है। हालांकि, फिलहाल जम्मू में उपभोक्ता सिर्फ 2जी सेवा का फायदा ही उठा पाएंगे। लेकिन, अब उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही जम्मू-कश्मीर के हालात सामान्य हो जाएंगे। जम्मू में इंटरनेट सेवा बहाल करने के बाद अब आज ही प्रशासन घाटी में लैंडलाइन फोन सेवा को फिर से शुरू करने जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के पांच जिलों में 2G मोबाइल इंटरनेट बहाल हो गया है। 

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12 जिलों में स्थिति पूरी तरह सामान्य

कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जारी एहतियातन गिरफ्तारियों और रिहाई का सिलसिला अभी चलता रहेगा। जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रहमण्यम ने कहा कि 22 में से 12 जिलों में स्थिति पूरी तरह सामान्य है। इनमें से सिर्फ पांच जिलों में ही अब कुछ हद तक रात्रिकालीन पाबंदियां हैं। जैसे-जैसे हालात सामान्य होते जाएंगे, सभी जिलों से पाबंदियां हटा ली जाएंगी। 

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शांतिपूर्वक नमाज संपन्न 

शुक्रवार होने के बावजूद पूरी वादी में शांति रही। सभी मस्जिदों में शांतिपूर्वक नमाज संपन्न हुई। ज्ञात हो, जम्मू संभाग में भी इंटरनेट सेवा पूरी तरह ठप है। पांच जिलों जम्मू, सांबा, कठुआ, रियासी व ऊधमपुर में मोबाइल और टेलीफोन सेवा सुचारू रूप से चल रही है, जबकि अन्य जिलों में मोबाइल सेवा ठप है।

विकास से ही खत्म होगा अलगाववाद :

मुख्य सचिव ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 समाप्त कर इसे दो केंद्र शासित राज्य बनाने के केंद्र सरकार के फैसले का जिक्र किए बगैर कहा कि यह निर्णय स्थानीय लोगों के दीर्घकालिक कल्याण के लिए लिया गया है। सरकार को यकीन है कि समग्र विकास से ही अलगाववाद को रोका जा सकता है।

आतंकी हमलों को रोकने के लिए लगाई पाबंदी :

मुख्य सचिव ने कहा कि लश्कर, जैश और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों का मकसद हमले कर यहां डर पैदा करना और युवाओं का विकास रोकना है। दुनिया और संयुक्त राष्ट्र भी इन संगठनों के मंसूबों को समझता है। पाकिस्तान ने भी हालात बिगाड़ने की हर संभव कोशिश की। वहीं, आतंकी हमलों की पक्की सूचना थी। ऐसे में आम लोगों के जान माल की सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए निषेधाज्ञा लगाई गई थी। टेलीफोन और इंटरनेट सेवाओं को बंद किया गया है।

मुख्य सचिव सुब्रह्मण्यम बोले-

जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने श्रीनगर मे प्रेसवार्ता कर हालात की जानकारी दी। 

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राज्य के 22 में से 12 जिलों में स्थिति पूरी तरह सामान्य

आवश्यक सेवाएं बहाल

बीवीआर सुब्रहमण्यम ने कहा कि लोगों को दिक्कत न हो इसके लिए आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई कमी नहीं है। हाजियों के आगमन के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। मीडिया सेंटर भी बनाया है, जहां रोज संबंधित अधिकारी हालात का पूरा ब्योरा दे रहे हैं। कश्मीर में सभी प्रमुख अखबार छप रहे हैं, सेटलाइट टीवी नेटवर्क भी काम कर रहा है।

राजभवन का दावा

राजभवन के प्रवक्ता ने कहा, ''स्वतंत्रता दिवस पर कहीं भी कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिन्होंने समारोह में खलल डालने की किसी भी कोशिश को नाकाम कर दिया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने प्रतिबंधों के दौरान लोगों को सहयोग करने के लिए धन्यवाद दिया और उन्हें आश्वासन दिया कि इसे धीरे-धीरे कम किया जाएगा। 

शनिवार को बुलाई गई है बैठक

सभी शिक्षण संस्थानों के भीतर अकादमिक गतिविधियों के अनुकूल माहौल बनाए रखने, शिक्षण संस्थानों आसपास के इलाके में किसी भी तरह के हिंसक प्रदर्शन को रोकने की कार्ययोजना पर भी काम हो रहा है। इस संदर्भ में राज्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों, विभिन्न स्कूलों के प्रबंधकों और प्रिंसिपल की एक बैठक भी शनिवार को हुई है।

यहां यह बताना असंगत नहीं होगा कि जम्मू-कश्मीर के विशेषाधिकारों को समाप्त कर इसे दो केंद्र शासित राज्यों में विभाजित किए जाने के संसद के फैसले के बाद उपजे हालात को देखते हुए प्रशासन ने पूरे राज्य में पांच अगस्त की सुबह से शिक्षण संस्थानों को एहतियातन बंद कर दिया था।

अलबत्ता, हालात में सुधार को देखते हुए प्रशासन ने जम्मू संभाग के जिला कठुआ और सांबा में चार दिनों के बाद ही स्कूल खोल दिए गए थे। लेह व करगिल में भी बीते सप्ताह ही शिक्षण संस्थान खोल दिए गए थे। लेकिन कश्मीर घाटी में सभी शिक्षण संस्थान बंद रखे गए थे।

 सुरक्षा परिषद सदस्य देशों की अनौपचारिक बैठक 

भारत और पाकिस्तान के सवाल पर शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बंद कमरे में अनौपचारिक बैठक हुई। बैठक में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और इससे जुड़े अन्य मसलों पर सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों और दस अस्थायी देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चीन की मांग पर बुलाई गई इस आपात बैठक में दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव पर चिंता जताई गई और संयम बरतने की अपील की गई। पाकिस्तान की मंशा के अनुसार जम्मू-कश्मीर मसले को तूल नहीं दिया जा सका।

पाकिस्तान के बैठक में भाग लेने के अनुरोध को पहले ही खारिज कर दिया गया था। बैठक के सूचना पत्र में इसके अनौपचारिक होने का स्पष्ट उल्लेख था। सुरक्षा परिषद की अनौपचारिक बैठक में विषय पर सामान्य चर्चा होती है और इनमें सदस्य देश विचार रखने से ज्यादा ताजा जमीनी हालात के जानकारी लेते हैं। इसमें न कोई संकल्प लिया जा सकता है और न ही मतदान होता है। 

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Posted By: Preeti jha

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