मारा गया हाफिज सईद का भतीजा, जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट; शिवखोड़ी समेत कई बड़े आतंकी हमलों में शामिल था अबू कताल
लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद के भतीजे अबू कताल की गुलाम जम्मू-कश्मीर में हत्या से जम्मू-कश्मीर में जारी आतंक के खिलाफ लड़ाई में बड़ी कामयाबी मिली है। अबू कताल पिछले दो दशक से जम्मू कश्मीर में बड़े आतंकी हमलों और घुसपैठ कराने का अहम सूत्रधार रहा है। उसकी मौत से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के अंत के संकेत मिल रहे हैं।

जागरण संवाददाता, राजौरी। लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद के भतीजे अबू कताल की गुलाम जम्मू-कश्मीर में हत्या से जम्मू-कश्मीर में जारी आतंक के खिलाफ लड़ाई में बल मिलेगा। लश्कर के शीर्ष पर हुए करारे प्रहार से जम्मू-कश्मीर में अब आतंक अंत की तरफ बढ़ने के संकेत हैं।
अबू कताल पिछले दो दशक से जम्मू कश्मीर में बड़े आतंकी हमलों और घुसपैठ कराने का अहम सूत्रधार रहा है। विशेषकर पुंछ जिले में सेना के काफिलों, राजौरी के ढांगरी गांव में हिंदुओं और रियासी के शिवखोड़ी श्रद्धालुओं पर हमले कताल के इशारे पर ही हुए थे।
बताया जाता है कि जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कराने से पहले कताल ही आतंकियों को प्रशिक्षित करता था। उसका मारा जाना भारतीय सुरक्षाबलों के लिए बड़ी राहत की बात है।
हाफिज ने बनाया था लश्कर का चीफ ऑपरेशन कमांडर
वहीं, अबू की हत्या के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां और सतर्क और गई हैं। अबू कताल ने पिछले सात वर्षों में छह से सात बड़े हमले करवाए थे। कताल की पुंछ-राजौरी के अलावा जम्मू, किश्तवाड़ और डोडा में मजबूत पकड़ थी। 25 वर्षों से कताल गुलाम जम्मू-कश्मीर के कोटली में रह रहा था।
कताल एनआईए की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल था। हाफिज ने उसे लश्कर का चीफ ऑपरेशन कमांडर बनाया था। हाफिज के इशारों पर कताल आतंकी घटनाओं को अंजाम देता था। एलओसी से आतंकियों को भारतीय क्षेत्र में दाखिल करवाने का वह माहिर माना जाता रहा है।
पुंछ-राजौरी में उसने ओवर ग्राउंड वर्कर का नेटवर्क काफी मजबूत किया था। गत वर्षो में राजौरी-पुंछ में आतंकी हमलों में तेजी के पीछे भी कताल का दिमाग चलता था। वह सीधे आतंकियों से संपर्क में रहता था। सीमा पार से ही उन्हें दिशा निर्देश जारी करके हमलों को अंजाम तक पहुंचाने में जुटा रहता था।
इन हमलों में शामिल था अबू कताल
बता दें कि वर्ष 2022 में पुंछ के चमरेड़ व भाटाधुलियां के जंगल में हुए हमले अबू कताल ने ही कराए थे। इन हमलों में सेना के 12 जवान बलिदान हो गए थे। इसके बाद एक जनवरी 2023 को ढांगरी आतंकी हमले में भी इसका हाथ था, जिसमें सात हिंदुओं की हत्या कर दी थी।
22 दिसंबर 2023 में पुंछ के टोपा मीर क्षेत्र में सेना के वाहन पर हमले में भी इसी का हाथ था, जिसमें पांच जवान बलिदान हो गए थे। पिछले वर्ष नौ जून को शिव खोड़ी से दर्शन कर रहे श्रद्धालुओं की बस पर भी हमले के पीछे कताल का नाम ही सामने आया था। इसमें 10 श्रद्धालु मारे गए थे।
आतंकवाद में गिरावट
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2022 में जम्मू-कश्मीर में कुल 135 आतंकी सक्रिय थे। इनमें से 85 विदेशी आतंकी और 50 स्थानीय आतंकी थे। जबकि 2024 में 91 सक्रिय आतंकियों में 61 विदेशी और 30 स्थानीय आतंकी थे। वर्ष 2025 में इसमें और गिरावट आ रही है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।