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    त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी कश्मीर की VIP बारामूला सीट, अपना गढ़ छोड़ किस्मत अजमा रहे उमर अब्दुल्ला की राह आसान नहीं

    Updated: Fri, 17 May 2024 01:38 PM (IST)

    श्रीनगर लोकसभा सीट पर बंपर वोटिंग के बाद जम्मू-कश्मीर ही नहीं पूरे देश की नजर कश्मीर की वीआईपी बारामूला सीट(Baramulla Lok Sabha Seat) पर है। इस सीट पर 20 मई को मतदान है और 22 प्रत्याशी मैदान में हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला इस बार अपना गढ़ श्रीनगर छोड़ बारामूला सीट से किस्मत अजमा रहे हैं और अब ये सीट पूरी तरह त्रिकोणीय मुकाबले में फंस गई है।

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    कश्मीर की VIP लोकसभा सीट बारामूला पर त्रिकोणीय मुकाबला

    पंपोश रशीद/रजिया नूर, बारमूला। अपना गढ़ श्रीनगर छोड़कर नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला पहली बार बारामूला सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें टक्कर देने के लिए पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन और अवामी इत्तेहाद पार्टी के इंजीनियर रशीद चुनाव मैदान में उतरे हैं।

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    पीडीपी ने भी प्रत्याशी उतारा है किंतु चुनावी महासमर के फ्रेम में वह कहीं खास नजर नहीं आ रही। इस स्थिति में मुकाबला त्रिकोणीय उमर, लोन और रशीद के बीच है। परिणाम जो भी निकले लेकिन कश्मीर में बदले हालात का नतीजा है कि इस बार मतदाता अलगाववादियों और आतंकियों के किसी भी दबाव में नहीं हैं।

    पहले पार्टियों के समर्थक और आम मतदाता इन तत्वों के दबाव और भय के चलते चाहते हुए भी मतदान के लिए नहीं निकलते थे। इस बार ऐसा नहीं है। मतदाताओं में उत्साह है और वह खुले दिल से बिना खौफ के अपनी चहेती पार्टी और पसंदीदा प्रत्याशी को वोट देने के लिए पूरे जोश से तैयार है ईवीएम का बटन दबाने के लिए।

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    क्या श्रीनगर की तरह होगी बंपर वोटिंग?

    इसलिए श्रीनगर सीट की तरह बारामूला लोकसभा क्षेत्र के लिए भी रिकॉर्ड वोटिंग के दरवाजे खुले हैं। बारामूला लोकसभा क्षेत्र में 17 लाख से अधिक मतदाता हैं। इस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत बड़गाम, बारामूला, कुपवाड़ा और बांडीपोरा जिले आते हैं।

    इस सीट पर मतदान के लिए 2103 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें शहरी क्षेत्रों में 244 और ग्रामीण क्षेत्र में 1,859 मतदान केंद्र हैं।

    त्रिकोणीय मुकाबले ने रोचक किया खेल

    बारामूला लोकसभा सीट पर बिछी चुनावी बिसात के बारे में राजनीतिक विश्लेषक अंजर मोहजू और याकूब लाला का कहना है कि यह सीट पूरी तरह त्रिकोणीय मुकाबले में फंस गई है।

    जीते कोई भी लेकिन पहले से तीसरे तक वोटों का अंतर काफी कम रह सकता है। बारामूला, कुपवाड़ा और बांडीपोरा जिले में नेशनल कॉन्फ्रेंस का काफी प्रभाव रहा है। इसका उसे फायदा जरूर मिल सकता है, लेकिन इंजीनियर रशीद को कतई कम नहीं आंक सकते। उनके लिए रैलियों में युवाओं की अच्छी खासी भीड़ देखी जा रही है। इस सीट पर 2019 में नेकां के मोहम्मद अकबर लोन जीते थे।

    हालांकि, 2014 के चुनाव में पीडीपी तब जीती थी जब उसकी छवि के बारे में सुधार की उम्मीद की जा रही थी। अलबत्ता, इस बार पीडीपी चुनावी रेस में कहीं नहीं दिख रही है। अंजर का कहना है कि सज्जाद लोन का कुपवाड़ा के लंगेट और हंदवाड़ा क्षेत्र में काफी असर है, लेकिन पूरे लोकसभा क्षेत्र में उन्हें खुद को साबित करना उनके लिए अग्नि परीक्षा है।

    हमें इस सीट पर इंजीनियर रशीद को नहीं भूलना चाहिए। उनका जेल से चुनाव लड़ना न केवल कुपवाड़ा, बल्कि बांडीपोरा, बारामुला और बड़गाम में सियासी खेल में खलबली पैदा कर सकता है।

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