सत्संग में सुभाष शास्त्री ने दिए सुखी जीवन के मंत्र
उन्होंने कहा कि संत कबीर जी ने कितनी सरलता से मानव जाति को संदेश दिया कि जीवन में कुछ पाना है या कमाना ऐसा होना चाहिए जो मृत्यु पश्चात भी साथ रहे।

संवाद सहयोगी, बिलावर : संत शिरोमणि सुभाष शास्त्री महाराज ने मंगलवार को फिंतर में आयोजित एक दिवसीय सत्संग में सुखी जीवन के मंत्र दिए। कबीर जी दोहे के साथ सत्संग की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा- कबीर जो धन संचे जो आगे को होए, सीस चढ़ाये पोटली, ले जात ना देख्यो कोए..। उन्होंने कहा कि संत कबीर जी ने कितनी सरलता से मानव जाति को संदेश दिया कि जीवन में कुछ पाना है या कमाना ऐसा होना चाहिए जो मृत्यु पश्चात भी साथ रहे। आप उसी धन का संचय करो, जो आगे काम आ सके। आपने पाप की गठरी सिर पर रखकर किसी को भी आज तक लेते साथ जाते नहीं देखा।
शास्त्री जी ने कहा कि शास्त्रानुसार हम आपको हमेशा समझाते हैं कि इन लोगों के कारण ही इस संसार में अधिकतर पाप कर्म होते हैं। इसीलिए लोगों को त्यागना का पर्यटन करें देखें बड़े से बड़ा गड्ढा भर सकता है पर मनुष्य का मन नहीं भरता है। जो मनुष्य लालसा और वासना से प्रभावित रहते हैं और जिनका मन कामनाओं का जाल बुनता रहता है वह कभी तृप्त और संतुष्ट नहीं हो सकते। शास्त्री जी ने आगे कहा की धनी वह निर्धन के संबंध में शास्त्रों में कहा गया है कि अधिक धन संपन्न होने पर ही तो असंतुष्ट रहता है वह सदा निर्धन है। धन रहित होने पर भी जो मनुष्य संतुष्ट है वह सदा धनी है। देखो धनसंपदा संसाधित जीवन भोग विलास और विविध प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों के सेवन के मामले में सभी प्राणी अतृप्त रहकर भी ही चले गए जाएंगे और जाते हैं। इसीलिए कहा गया है कि सदा अपने धर्म का अनुसरण करें। क्योंकि मृत्यु होने पर संबंधी मित्र अधिक मृत शरीर को लकड़ी व मिट्टी के ढेर के समान समझ कर मुंह फेर लेते हैं। सिर्फ धर्म की उसका साथ देता है और जी के साथ भी जाता है।
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